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मई में लिंगानुपात गिरकर 875 पर पहुंचा, दो जनवरी के बाद पीएनडीटी की नहीं हुई कार्रवाई

Sat, 22 Jun 2019 01:00 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 22 Jun 2019 01:00 AM IST
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मई में लिंगानुपात गिरकर 875 पर पहुंचा, दो जनवरी के बाद पीएनडीटी की नहीं हुई कार्रवाई
रेवाड़ी। मई माह में लिंगानुपात गिरकर 875 पहुंचने पर डीसी यशेंद्र सिंह ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि दो जनवरी के बाद एक बार भी पीएनडीटी कार्रवाई नहीं होना गंभीर विषय है। अप्रैल में जिला का लिंगानुपात 924 रहा था। उपायुक्त यशेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को लैँगिंग अपराध अधिनियम बाल संरक्षण (पास्को) और पीसीपीएनडीटी की बैठक हुई, जिसमें अब तक की गई कार्यवाही की समीक्षा की गई।
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उपायुक्त यशेन्द सिंह ने कहा है कि जिला में लिंगानुपात सुधार के लिए अधिकारियों की गई गठित टीम मिलकर रैड प्लान तैयार करें ताकि घिनौना कार्य करने वाले अपराधी बच न सकें व जिला में लिंगानुपात में सुधार लाया जा सकें। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि पीएनडीटी के मामलों में चल रहे केसों की पैरवी अच्छे ढंग से करें ताकि अपराधी बच न सकें। उन्होंने कहा कि पीएनडीटी के कोर्ट केसों का ठीक प्रकार से फोलोअप किया जाए तथा पूरा विवरण स्पष्ट किया जाए। डीसी ने कहा कि 2 जनवरी के बाद पीएनडीटी की रैड क्यों नहीं की। उन्होंने कहा कि पीएनडीटी के मामले में सख्त कार्यवाही करें। उन्होंने सीटीएम को निर्देश दिये कि डॉ संजय राय जो कि पीएनडीटी के मामले को देखते है उनका स्पष्टीकरण जारी करें। पास्को के केसों के बारे में रेवाडी जिला के 77 प्रतिशत केसों में सजा हो चुकी है इसके लिए डीसी ने एडीसी, जिला न्यायवादी व बाल सरंक्षण अधिकारी की प्रशंसा की। पास्को के केसों के बारे में उन्होंने पीओआईसीडीएस व बाल संरक्षण अधिकारी को निर्देश दिये कि आप सभी केसों की पैरवी ढंग से करें तथा सभी केसों को ध्यान में रखे।
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लिंगानुपात के आंकड़े
जिला में वर्ष 2019 में लिंगानुपात जनवरी माह में 922, फरवरी माह में 914, मार्च माह में 916, अप्रैल में 924, मई में 875 रहा जबकि वर्ष 2018 में जिला में लिंगानुपात औसतन 913 रहा तथा वर्ष 2017 में जिला में लिंगानुपात औसतन 893 रहा। इस बैठक में एडीसी प्रदीप दहिया, नगराधीश रविन्द्र यादव, मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी सुमित चौधरी, डीएसपी हंसराज, उप-सिविल सर्जन डा. अशोक कुमार, डॉ टीसी तंवर व सुशील माही, जिला न्यायवादी हरपाल सिंह, पीओआईसीडीएस संगीता, बाल सरंक्षण अधिकारी दीपिका भी उपस्थित थी।
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