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गली से जल्द ही गायब होगी कपड़े प्रेस करने की रौनक
Updated Fri, 17 Nov 2017 02:30 AM IST
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प्रदूषण का असर..
कोयले से प्रदूषण के चलते बंद हो सकता है 600 कपड़ा इस्त्री करने वालों का काम
- उपायुक्त के आदेश के बाद कोयले का दाम बढ़ा, लोग बरत रहे हैं सावधानी
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
दिल्ली एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के ग्राफ पर नियंत्रण पाने के लिए जिला प्रशासन ने कोयले का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है। जिसके कारण शहर के अलग-अलग कालोनी व सेक्टर में चल रही 600 से अधिक कपड़ा स्त्री करने वालों के काम पर असर पड़ा है।
कपड़ा इस्त्री करने वालों की दुकान अगर बंद नजर आए तो चौंकिएगा नहीं। कोयला बेचने वालों पर प्रशासन की नजर है। जिन लोगों के पास कोयला है वह अपने काम को कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग अपना ठीहा बंद कर छुट्टी मना रहे हैं। कोयला 24 रुपया किया किग्रा था जो बढ़कर 30 तक पहुंच गया है। हरदोई के रहने वाले राजेश कन्नौजिया का कहना है कि सेक्टर 1 में दस साल से अपना कारोबार कर रह रहे हैं। पहली बार प्रशासन इतना सख्त है कि कोई कोयला देने को तैयार नहीं है।
इसे भी जानें ..
: शहर में कपड़ा इस्त्री करने वालों के 600 से अधिक ठीए हैं।
: एक आदमी 1200 से 1500 तक काम करता है।
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कोयले से प्रदूषण के चलते बंद हो सकता है 600 कपड़ा इस्त्री करने वालों का काम
- उपायुक्त के आदेश के बाद कोयले का दाम बढ़ा, लोग बरत रहे हैं सावधानी
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
दिल्ली एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के ग्राफ पर नियंत्रण पाने के लिए जिला प्रशासन ने कोयले का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है। जिसके कारण शहर के अलग-अलग कालोनी व सेक्टर में चल रही 600 से अधिक कपड़ा स्त्री करने वालों के काम पर असर पड़ा है।
कपड़ा इस्त्री करने वालों की दुकान अगर बंद नजर आए तो चौंकिएगा नहीं। कोयला बेचने वालों पर प्रशासन की नजर है। जिन लोगों के पास कोयला है वह अपने काम को कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग अपना ठीहा बंद कर छुट्टी मना रहे हैं। कोयला 24 रुपया किया किग्रा था जो बढ़कर 30 तक पहुंच गया है। हरदोई के रहने वाले राजेश कन्नौजिया का कहना है कि सेक्टर 1 में दस साल से अपना कारोबार कर रह रहे हैं। पहली बार प्रशासन इतना सख्त है कि कोई कोयला देने को तैयार नहीं है।
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: शहर में कपड़ा इस्त्री करने वालों के 600 से अधिक ठीए हैं।
: एक आदमी 1200 से 1500 तक काम करता है।