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वाह रे सरकारी सिस्टम: बुजुर्गों को मृत दिखा पेंशन काटी तो विधवाओं के पति किए जिंदा
Wed, 14 Sep 2022 02:04 AM IST
रोहतक ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
Published by: रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 14 Sep 2022 02:04 AM IST
सार
पेंशन काटे जाने से आहत 102 वर्षीय दुलीचंद ने सेक्टर छह स्थित बाग में मुर्दों का दरबार लगाया। यहां 15 बुजुर्गों ने खुद के जीवित होने का प्रमाण दिया। दरबार में चार विधवाओं के पति को जिंदा कर पेंशन रोके जाने का खुलासा हुआ।
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म़ुर्दा दरबार में डोगा दिखाकर नाराजगी प्रगट करती वृद्धा चमेली। अमर उजाला
विस्तार
अधिकारियों की लापरवाही के चलते पेंशन काटे जाने से आहत 102 वर्षीय किंग दुलीचंद ने मंगलवार को सेक्टर छह स्थित बाग में मुर्दा दरबार लगाया। यहां पेंशन योजना के पात्र 30 बुजुर्गों ने हाजिरी लगाई। इनमें 17 महिलाएं रहीं। दरबार में 15 बुजुर्गों ने खुद के जीवित होने का प्रमाण देते हुए कहा, थारा फूफा अभी जिंदा है। वहीं महिलाओं ने डोगा (डंडा) दिखाकर कहा- थारी बुआ अभी जिंदा है...।
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यही नहीं, चार विधवाओं के पति को जिंदा कर पेंशन रोके जाने का खुलासा हुआ। इन महिलाओं ने पेंशन की बजाय सरकार से अपना पति मांगा। इनमें से दो को तो सरकारी कर्मचारी तक बताया गया है। ऐसे में योजना के पात्रों ने पेंशन नहीं देने पर अपनी नौकरी मांगी है। शेष मामलों में दिव्यांग व अन्य लोग शामिल हैं। इनमें दो मामले पेंशन नहीं बनाने के भी रहे।
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मामला एक
पांच माह से बंद है मरी पेंशन
अब सत्तर की हूं। पिछले 10 साल से पेंशन मिल रही थी। अब पांच माह से पेंशन बंद है। पता करने पर मुझे मृत दिखाया होने की बात सामने आई। कर्मचारी ने पूछा किसने लिखवाया है तो जवाब मिला, कंप्यूटर ने डाटा उठा रखा है। उसी समय खुद को जिंदा बताते हुए जरूरी दस्तावेज व आवेदन दिया था। इस ओर पांच माह बाद भी कार्रवाई नहीं हुई है। बगैर पेंशन गुजारा मुश्किल हो गया है। इसलिए इस दरबार में आई हूं। - राजो, किलोई।
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मामला दो
5 लाख रुपये कमा रही हूं मैं
मेरी उम्र 67 बरस है। मैं पांच लाख रुपये कमा रही हूं। मेरे परिवार पहचान पत्र में यही लिखा है। आजादगढ़ में करीब तीन-चार साल पहले चार व्यक्ति परिवार पहचान पत्र बनाने आए थे। उन्हें मैंने विधवा पेंशन 2500 रुपये मिलने की जानकारी दी थी। जबकि परिवार पहचान पत्र में 25 हजार रुपये लिख दिया। अब नौ माह से पेंशन बंद है। सुधार के लिए कागज दिए थे, मगर डीसी कार्यालय तक चक्कर लगाने के बाद भी काम नहीं हुआ। - गोपाली, बसंत विहार।
मामला तीन
मृत बता बंद कर दी पेंशन
मेरी उम्र 85 साल है। देवीलाल ने 100 रुपये से पेंशन शुरू की थी। तब से पेंशन ले रही थी। अब 12 मार्च से पेंशन नहीं आ रही है। ई-दिशा केंद्र में पता करने पर मुझे मृत बताया गया। विभाग की गलती सुधारने के लिए उसी समय प्रार्थना पत्र व जरूरी दस्तावेज दिए थे। अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। - वेदो, सुंदरपुर।
मामला चार
गलती सरकारी, खामियाजा भुगत रहे हम
सरकार ने मुझे 76 की उम्र में मृत घोषित कर पेंशन बंद कर दी है। गलती सरकारी स्तर पर हुई है। खामियाजा हम भुगत रहे हैं। इस गलती को सुधारने के लिए सरपंच से खुद के जिंदा होने का प्रमाण मुहर लगवाकर देने के साथ आधार कार्ड, बैंक की कॉपी सहित सारे दस्तावेज दे चुका हूं। इसके बावजूद अब तक सुनवाई नहीं हुई है। - हवा सिंह, मकड़ौली कलां।
मामला पांच
कथूरा 14 बार गया, नहीं बनी पेंशन
शत प्रतिशत विकलांग हूं। विभाग ने 15 अप्रैल से पेंशन काटी हुई है। एडीसी, समाज कल्याण अधिकारी, गोहाना तहसील, कथूरा ब्लॉक सब जगह धक्के खा चुका हूं। कथूरा में तो 14 बार जाने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। पेंशन नहीं मिलने के कारण यहां दरबार में आया हूं। - कृष्ण, धनाना, सोनीपत।
मामला छह
7 साल बाद मृत पति को बताया जिंदा
मेरे पति सात पहले चल बसे। इसके बाद से विधवा पेंशन चल रही थी। अब नौ महीने से पेंशन नहीं मिल रही है। सरकारी कर्मचारी ने बताया कि तुम्हारा पति जिंदा है। इसलिए पेंशन काट दी गई है। अब न पेंशन मिल रही है न ही सात साल बाद जिंदा हुआ पति सामने आया है। - वीना नारंग, गोहाना अड्डा।
मामला सात
या तो मेरा पति दो या सरकारी नौकरी
पति के चल बसने के बाद मेरी विधवा पेंशन बनी थी। पिछले छह माह से पेंशन नहीं मिली है। कार्यालय में संपर्क किया तो पता लगा कि परिवार पहचान पत्र में सेवानिवृत्ति कर्मचारी की पेंशन लिखा है। यही नहीं, मेरा पति को भी जिंदा बताया गया है। इसलिए विधवा पेंशन नहीं दी जा सकती। अब सरकार व विभाग या तो मेरा पति दे या सरकारी नौकरी। अभी मेरी उम्र 56 साल है। ऐसे में नियमानुसार अभी मेरी नौकरी बाकी है। - रेनू, किला मोहल्ला।
मामला आठ
पति जिंदा है, पेंशन ले रही 1.40 लाख
मेरे पति तीन साल पहले गुजर गए। इसके बाद विधवा पेंशन बनी। अब इसे बंद कर दिया गया है। कार्यालय में पता किया तो बताया गया कि मैं 1.40 लाख रुपये सेवानिवृत्त पेंशन ले रही हूं। बेटे की आय भी 1.40 लाख रुपये है। यही नहीं, दस दिन पहले सरकारी कार्यालय से फोन आया। फोन करने वाले ने कहा कि मेरे पति जिंदा है। जबकि उन्हें पति के मृत्यु प्रमाणपत्र समेत सभी दस्तावेज दिए जा चुके हैं। - अनीता, गोहाना अड्डा।
बुजुर्गों को हम देंगे पेंशन
सरकार बुजुर्गों के साथ अन्याय कर रही है। जिंदा बुजुर्गों को मृत बताकर पेंशन काटना गलत है। यह बड़ी लापरवाही है। सरकार के पास धन नहीं है या उनकी नीयत ठीक नहीं है। बुजुर्गों को उनकी पेंशन दी जाए। यह उनका अधिकार है। किंग दुलीचंद ने यह दरबार लगाकर अपने जैसे दूसरे बुजुर्गों की समस्या उठाने का काम किया है। अब भी सरकार नहीं जागती है तो इस मुद्दे को और बड़े स्तर पर उठाया जाएगा। दरबार में आए लोगों को जब तक सरकार से पेंशन नहीं मिलती, तब तक उन्हें हम पेंशन देंगे। बुजुर्गों की सेवा भगवान की सेवा है। इसमें किसी तरह की कमी नहीं छोड़ेंगे। - नवीन जयहिंद, आप के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष