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प्रदेश में नहीं चलेगा जातिवाद का फार्मूला, विस चुनाव से छह माह पहले पब्लिक बनाएगी मूड
Updated Thu, 28 Jun 2018 02:44 AM IST
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फ्लैग : केबिनेट मंत्री बीरेंद्र सिंह डूमरखां के बेबाक बोल
हेडिंग : प्रदेश में नहीं चलेगा जातिवाद का फार्मूला, विस चुनाव से छह माह पहले पब्लिक बनाएगी मूड
: कांग्रेसी खुद कंफ्यूजन में, इनेलो-बसपा गठबंधन अप्राकृतिक, लिखकर देता हूं टूट जाएगा चुनाव से पहले
: भाजपा बदलाव महसूस करवा पाई तो लौट सकेगी सत्ता में
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह का कहना है कि जो लोग जातिवाद के फार्मूले पर 2019 का चुनाव जीतने की मंशा रखते हैं, उनको मुंह की खानी पड़ेगी। मेरा 40 साल का प्रदेश की राजनीतिक का अनुभव है, जिसके दम पर ऐसा बोल रहा हूं। वे बुधवार को अमर उजाला कार्यालय में पहुंचे और बेबाक राय रखी।
बीरेंद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश के अंदर 80 प्रतिशत लोग गांव में बसते हैं, जहां लोग एक-दूसरे पर निर्भर हैं। अगर किसी गांव में 50 प्रतिशत जाट समुदाय है तो 50 प्रतिशत नॉन जाट हैं। वहां जाति विशेष बाहुल्य होने के बावजूद प्रभुत्व नहीं जमा सकती। किसी नेता को जातिवाद का थोड़ा बहुत फायदा जरूर मिल सकता है, लेकिन कोई यह सोच रहा है कि सत्ता हासिल हो जाएगी। यह असंभव है। दूसरा, प्रदेश के अंदर फिलहाल राजनीतिक माहौल अनिश्चित है। कांग्रेसी खुद कंफ्यूज हैं। उनको ही नहीं पता कि पार्टी सत्ता में आई तो कौन सीएम बनेगा। जबकि इनेलो और बसपा का गठबंधन अप्राकृतिक है।
लोकसभा चुनाव तक चाहे गठबंधन चल जाए, लेकिन मैं लिखकर देता हूं विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन टूट जाएगा। इनेलो के मुख्य नेता जेल में हैं। लोगों के जहन में यह बात भी है कि सजा पूरी होने के बाद उनके चुनाव लड़ने पर वैधानिक दिक्कतें भी आएंगी। जहां तक भाजपा का सवाल है, पार्टी की कामयाबी इस बात पर निर्भर है कि वह लोगों को प्रदेश के अंदर सामाजिक, राजनीतिक व प्रशासनिक व्यवस्था में कितना बदलाव महसूस करवा सकी। अगर प्रदेश की जनता बदलाव महसूस करती है तो भाजपा दोबारा सत्ता में लौट सकती है। अगर किसी वर्ग विशेष या समुदाय ने यह महसूस किया कि उनके साथ भेदभाव हो रहा है तो पार्टी की दोबारा सत्ता में लौटने की राह कठिन होगी। मानता हूं, प्रदेश सरकार के 90 प्रतिशत मंत्री व खुद मुख्यमंत्री नए हैं।
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उन्हें स्थापित होने में समय लगा, लेकिन अब भी डेढ़ साल का समय है। प्रदेश के अंदर फिलहाल राजनीतिक दल माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कोई यह सोचकर बैठा है कि छह माह पहले पब्लिक के मूड को अपनी तरफ कर लूंगा, ऐसे नेता गलतफहमी में हैं। हालांकि कोई घटना हो जाए तो कुछ कह नहीं सकता। क्योंकि देश की राजनीति में कई ऐसे मौके आए हैं, जब लोगों ने भावनात्मक जुड़ाव के चलते कई सरकारों को धूल चटा दी और कई सरकारें बना दी। चाहे 1971 का लोकसभा चुनाव हो या कारगिल की लड़ाई रही। बैंकों के राष्ट्रीयकरण का मामला हो या इमरजेंसी के बाद कांग्रेस की करारी हार।
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फ्लैग : केबिनेट मंत्री बीरेंद्र सिंह डूमरखां के बेबाक बोल
हेडिंग : प्रदेश में नहीं चलेगा जातिवाद का फार्मूला, विस चुनाव से छह माह पहले पब्लिक बनाएगी मूड
: कांग्रेसी खुद कंफ्यूजन में, इनेलो-बसपा गठबंधन अप्राकृतिक, लिखकर देता हूं टूट जाएगा चुनाव से पहले
: भाजपा बदलाव महसूस करवा पाई तो लौट सकेगी सत्ता में
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह का कहना है कि जो लोग जातिवाद के फार्मूले पर 2019 का चुनाव जीतने की मंशा रखते हैं, उनको मुंह की खानी पड़ेगी। मेरा 40 साल का प्रदेश की राजनीतिक का अनुभव है, जिसके दम पर ऐसा बोल रहा हूं। वे बुधवार को अमर उजाला कार्यालय में पहुंचे और बेबाक राय रखी।
बीरेंद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश के अंदर 80 प्रतिशत लोग गांव में बसते हैं, जहां लोग एक-दूसरे पर निर्भर हैं। अगर किसी गांव में 50 प्रतिशत जाट समुदाय है तो 50 प्रतिशत नॉन जाट हैं। वहां जाति विशेष बाहुल्य होने के बावजूद प्रभुत्व नहीं जमा सकती। किसी नेता को जातिवाद का थोड़ा बहुत फायदा जरूर मिल सकता है, लेकिन कोई यह सोच रहा है कि सत्ता हासिल हो जाएगी। यह असंभव है। दूसरा, प्रदेश के अंदर फिलहाल राजनीतिक माहौल अनिश्चित है। कांग्रेसी खुद कंफ्यूज हैं। उनको ही नहीं पता कि पार्टी सत्ता में आई तो कौन सीएम बनेगा। जबकि इनेलो और बसपा का गठबंधन अप्राकृतिक है।
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लोकसभा चुनाव तक चाहे गठबंधन चल जाए, लेकिन मैं लिखकर देता हूं विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन टूट जाएगा। इनेलो के मुख्य नेता जेल में हैं। लोगों के जहन में यह बात भी है कि सजा पूरी होने के बाद उनके चुनाव लड़ने पर वैधानिक दिक्कतें भी आएंगी। जहां तक भाजपा का सवाल है, पार्टी की कामयाबी इस बात पर निर्भर है कि वह लोगों को प्रदेश के अंदर सामाजिक, राजनीतिक व प्रशासनिक व्यवस्था में कितना बदलाव महसूस करवा सकी। अगर प्रदेश की जनता बदलाव महसूस करती है तो भाजपा दोबारा सत्ता में लौट सकती है। अगर किसी वर्ग विशेष या समुदाय ने यह महसूस किया कि उनके साथ भेदभाव हो रहा है तो पार्टी की दोबारा सत्ता में लौटने की राह कठिन होगी। मानता हूं, प्रदेश सरकार के 90 प्रतिशत मंत्री व खुद मुख्यमंत्री नए हैं।
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उन्हें स्थापित होने में समय लगा, लेकिन अब भी डेढ़ साल का समय है। प्रदेश के अंदर फिलहाल राजनीतिक दल माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कोई यह सोचकर बैठा है कि छह माह पहले पब्लिक के मूड को अपनी तरफ कर लूंगा, ऐसे नेता गलतफहमी में हैं। हालांकि कोई घटना हो जाए तो कुछ कह नहीं सकता। क्योंकि देश की राजनीति में कई ऐसे मौके आए हैं, जब लोगों ने भावनात्मक जुड़ाव के चलते कई सरकारों को धूल चटा दी और कई सरकारें बना दी। चाहे 1971 का लोकसभा चुनाव हो या कारगिल की लड़ाई रही। बैंकों के राष्ट्रीयकरण का मामला हो या इमरजेंसी के बाद कांग्रेस की करारी हार।