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ईज ऑफ डूइंग बिजनेस
Updated Tue, 13 Mar 2018 02:40 AM IST
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ईज आफ डूइंग बिजनेस का लाभ लेकर रोजगार उपलब्ध कराने की कवायद
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में टॉप पर पहुंचने के बाद जिला प्रशासन की ओर से नए उद्योगों को लगाने का निमंत्रण
उद्योगपतियों के साथ ही प्रशासन ने की मीटिंग, उद्यमियों को इंसेंटिव और सुविधाओं के बारे कराया अवगत
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
देश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग के पहले पायदान पर काबिज हरियाणा में जिला स्तर पर नए उद्योगों को आमंत्रित करने का काम शुरू कर दिया गया है। मकसद है कि आने वाले वर्षों में यह रैंकिंग कायम रहे और ज्यादा से ज्यादा रोजगार उपलब्ध हों। इसी दिशा में सोमवार को उपायुक्त रोहतक ने लघु सचिवालय में उद्योगपतियों के साथ एक मीटिंग की, जिसमें उन्हें नए उद्योग लगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। उपायुक्त ने उद्यमियों को बताया कि सरकार की नई उद्योग नीति बहुत कारगर है, जिसके तहत जिला प्रशासन उद्योगपतियों को हर संभव मदद मुहैया कराएगा।
उपायुक्त डॉ. यश गर्ग ने बताया कि इस्टेट इंटरप्राइजिज पॉलिसी के तहत एक एकड़ भूखंड पर 10 करोड़ रुपये तक के निवेश पर जिला स्तर पर गठित कमेटी ही विचार करती है, जबकि इससे बड़े प्रोजेक्ट राज्य स्तरीय कमेेटी में स्वीकार किए जाते हैं। उद्योगपति नए उद्योगों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, इसके साथ ही एक सर्विस फार्म भी उपलब्ध होता है। इस तरह से उद्योगपति को नया उद्योग लगाने में परेशान नहीं होता है और उसे 70 विभागों की सेवाएं ऑनलाइन मुहैया कराई जा रही हैं। सरकार की नई पालिसी के तहत 27 प्रकार के इंसेंटिव दिए जाते हैं, जिससे उद्योगों को लगाने में मदद होती है। इनमें क्वालिटी सर्टिफिकेशन स्कीम, क्रेडिट लिंक सब्सिडी स्कीम आदि है। इसके साथ एनर्जी वाटर सेफ्टी आडिट पर उद्योगों को खर्च नहीं करना होता है। कैफ में रजिस्ट्रेशन कराकर 45 दिनों के अंदर उद्योगपतियों की समस्या का निवारण किया जाता है। इस दौरान अधिकारियों को उद्यमियों की समस्याओं का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर करने का निर्देश दिया गया। उद्योगपतियों ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में ईएसआई डिस्पेंसरी, फायर स्टेशन, वाटर एंड सीवरेज लाइन, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, बस स्टॉप, ग्रीनरी, टॉयलेट की सुविधाएं देने की मांग की, इसके साथ ही रोड सेफ्टी में उद्योगों को शामिल करने मांग रखी गई। उद्योगपतियों ने हर माह प्रशासन के साथ बैठक कराए जाने की मांग भी रखी। क्षेत्रीय निदेशक डीआईसी को उपायुक्त ने इस संदर्भ में निर्देश दिए। इस मौके पर नगराधीश महेंद्रपाल, संयुक्त निदेशक उद्योग केंद्र राजेश खेड़ा, डीएफएससी सुरेंद्र सैनी, कार्यकारी अभियंता जनस्वास्थ्य वीपी शर्मा, उप पुलिस अधीक्षक रवींद्र, उद्योगपति राजेश जैन, जयदीप, बिट्टू मल्होत्रा, राजेंद्र बंसल, एसके गोयल सहित कई उद्योगपति मौजूद रहे।
उद्योगों में 93 सक्षम युवाओं को मिला रोजगार
सक्षम योजना के तहत अब तक जिला में अधिकांश उद्योगों में 363 पद सृजित किए गए हैं, इनमें से 93 पदों को भरा भी जा चुका है। इस योजना के तहत उद्योगों को भी लाभ मिलता है। अप्रेंटेसशिप के तहत डीसी रेट का प्रथम वर्ष में 70 प्रतिशत, द्वितीय वर्ष में 80 प्रतिशत और तृतीय वर्ष में 90 प्रतिशत मानदेय देना अनिवार्य है। वर्तमान में 8280 रुपये रेट निधारित है, इसमें 15 सौ रुपये सरकार की ओर से उद्योगपति को वापस मिल जाते हैं। इस योजना के तहत रोजगार का विस्तार कर युवाओं को सक्षम बनाया जा सकता है।
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ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में टॉप पर पहुंचने के बाद जिला प्रशासन की ओर से नए उद्योगों को लगाने का निमंत्रण
उद्योगपतियों के साथ ही प्रशासन ने की मीटिंग, उद्यमियों को इंसेंटिव और सुविधाओं के बारे कराया अवगत
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
देश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग के पहले पायदान पर काबिज हरियाणा में जिला स्तर पर नए उद्योगों को आमंत्रित करने का काम शुरू कर दिया गया है। मकसद है कि आने वाले वर्षों में यह रैंकिंग कायम रहे और ज्यादा से ज्यादा रोजगार उपलब्ध हों। इसी दिशा में सोमवार को उपायुक्त रोहतक ने लघु सचिवालय में उद्योगपतियों के साथ एक मीटिंग की, जिसमें उन्हें नए उद्योग लगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। उपायुक्त ने उद्यमियों को बताया कि सरकार की नई उद्योग नीति बहुत कारगर है, जिसके तहत जिला प्रशासन उद्योगपतियों को हर संभव मदद मुहैया कराएगा।
उपायुक्त डॉ. यश गर्ग ने बताया कि इस्टेट इंटरप्राइजिज पॉलिसी के तहत एक एकड़ भूखंड पर 10 करोड़ रुपये तक के निवेश पर जिला स्तर पर गठित कमेटी ही विचार करती है, जबकि इससे बड़े प्रोजेक्ट राज्य स्तरीय कमेेटी में स्वीकार किए जाते हैं। उद्योगपति नए उद्योगों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, इसके साथ ही एक सर्विस फार्म भी उपलब्ध होता है। इस तरह से उद्योगपति को नया उद्योग लगाने में परेशान नहीं होता है और उसे 70 विभागों की सेवाएं ऑनलाइन मुहैया कराई जा रही हैं। सरकार की नई पालिसी के तहत 27 प्रकार के इंसेंटिव दिए जाते हैं, जिससे उद्योगों को लगाने में मदद होती है। इनमें क्वालिटी सर्टिफिकेशन स्कीम, क्रेडिट लिंक सब्सिडी स्कीम आदि है। इसके साथ एनर्जी वाटर सेफ्टी आडिट पर उद्योगों को खर्च नहीं करना होता है। कैफ में रजिस्ट्रेशन कराकर 45 दिनों के अंदर उद्योगपतियों की समस्या का निवारण किया जाता है। इस दौरान अधिकारियों को उद्यमियों की समस्याओं का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर करने का निर्देश दिया गया। उद्योगपतियों ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में ईएसआई डिस्पेंसरी, फायर स्टेशन, वाटर एंड सीवरेज लाइन, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, बस स्टॉप, ग्रीनरी, टॉयलेट की सुविधाएं देने की मांग की, इसके साथ ही रोड सेफ्टी में उद्योगों को शामिल करने मांग रखी गई। उद्योगपतियों ने हर माह प्रशासन के साथ बैठक कराए जाने की मांग भी रखी। क्षेत्रीय निदेशक डीआईसी को उपायुक्त ने इस संदर्भ में निर्देश दिए। इस मौके पर नगराधीश महेंद्रपाल, संयुक्त निदेशक उद्योग केंद्र राजेश खेड़ा, डीएफएससी सुरेंद्र सैनी, कार्यकारी अभियंता जनस्वास्थ्य वीपी शर्मा, उप पुलिस अधीक्षक रवींद्र, उद्योगपति राजेश जैन, जयदीप, बिट्टू मल्होत्रा, राजेंद्र बंसल, एसके गोयल सहित कई उद्योगपति मौजूद रहे।
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उद्योगों में 93 सक्षम युवाओं को मिला रोजगार
सक्षम योजना के तहत अब तक जिला में अधिकांश उद्योगों में 363 पद सृजित किए गए हैं, इनमें से 93 पदों को भरा भी जा चुका है। इस योजना के तहत उद्योगों को भी लाभ मिलता है। अप्रेंटेसशिप के तहत डीसी रेट का प्रथम वर्ष में 70 प्रतिशत, द्वितीय वर्ष में 80 प्रतिशत और तृतीय वर्ष में 90 प्रतिशत मानदेय देना अनिवार्य है। वर्तमान में 8280 रुपये रेट निधारित है, इसमें 15 सौ रुपये सरकार की ओर से उद्योगपति को वापस मिल जाते हैं। इस योजना के तहत रोजगार का विस्तार कर युवाओं को सक्षम बनाया जा सकता है।
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