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सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं खाता सामाजिक ढांचे से मेल
Updated Sun, 01 Apr 2018 03:24 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं खाता सामाजिक ढांचे से मेल : हुड्डा खाप
: एक गौत्र, गांव व गुहांड में शादी के सामाजिक, नैतिक व वैज्ञानिक दुष्प्रभाव
: मेरी मातृभूमि मेरा गांव पोलंगी, पुस्तक का किया गया विमोचन
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। सुप्रीम कोर्ट के दो बालिगों की शादी को लेकर दिए गए फैसले पर सर्व हुड्डा खाप की तरफ से मंथन किया गया। खाप के प्रवक्ता कृष्णलाल हुड्डा का कहना है कि शीर्ष अदालत का फैसला सामाजिक ढांचे के साथ मेल नहीं खा रहा है। एक ही गांव, गुहांड व गौत्र में दो बालिगों की शादी से नकारात्मक सामाजिक, नैतिक व वैज्ञानिक प्रभाव पड़ते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि खाप पंचायतों ने अब तक समाज के लिए सकारात्मक भूमिका अदा की है। बड़े-बड़े फैसले लेकर भाईचारे को बढ़ावा दिया है। इस मौके पर मेरा गांव-मेरी मातृ भूमि पोलंगी पुस्तक का विमोचन भी किया गया, जिसे कृष्णलाल हुड्डा द्वारा लिखा गया है। पुस्तक में हुड्डा ने गांव की पंचायतों की कार्यप्रणाली से लेकर स्वतंत्रता सेनानियों व सेना, पुलिस व प्रशासन में रहे अधिकारियों की गांव के विकास में भूमिका का वर्णन किया है।
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: एक गौत्र, गांव व गुहांड में शादी के सामाजिक, नैतिक व वैज्ञानिक दुष्प्रभाव
: मेरी मातृभूमि मेरा गांव पोलंगी, पुस्तक का किया गया विमोचन
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। सुप्रीम कोर्ट के दो बालिगों की शादी को लेकर दिए गए फैसले पर सर्व हुड्डा खाप की तरफ से मंथन किया गया। खाप के प्रवक्ता कृष्णलाल हुड्डा का कहना है कि शीर्ष अदालत का फैसला सामाजिक ढांचे के साथ मेल नहीं खा रहा है। एक ही गांव, गुहांड व गौत्र में दो बालिगों की शादी से नकारात्मक सामाजिक, नैतिक व वैज्ञानिक प्रभाव पड़ते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि खाप पंचायतों ने अब तक समाज के लिए सकारात्मक भूमिका अदा की है। बड़े-बड़े फैसले लेकर भाईचारे को बढ़ावा दिया है। इस मौके पर मेरा गांव-मेरी मातृ भूमि पोलंगी पुस्तक का विमोचन भी किया गया, जिसे कृष्णलाल हुड्डा द्वारा लिखा गया है। पुस्तक में हुड्डा ने गांव की पंचायतों की कार्यप्रणाली से लेकर स्वतंत्रता सेनानियों व सेना, पुलिस व प्रशासन में रहे अधिकारियों की गांव के विकास में भूमिका का वर्णन किया है।