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Updated Sun, 18 Jun 2017 12:05 AM IST
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नहर से नहीं बुझ रही जिले के लोगों की प्यास
अमित विश्वकर्मा
रेवाड़ी।
एसवाईएल पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय हरियाणा के पक्ष में आने के बाद दक्षिण हरियाणा खासकर रेवाड़ी के लोगों को इस पानी का बेसब्री से इंतजार है। अभी तक रेवाड़ी में जो पानी खुबड़ू हेड से पहुंच रहा है वह धरती की प्यास बुझाना तो दूर रेवाड़ी के लोगों की कंठ तक को पूरी तरह से तर नहीं कर पा रहा है। पानी मिलने की उम्मीद के बीच बीते दिनों मुख्य सचिव डीएस ढेसी ने जिले के अधिकारियों के साथ बैठक कर पानी मिलने की स्थिति में आधार भूूत ढांचे के समीक्षा की।
जवाहर लाल नेहरू कैनाल को 927 क्यूसेक प्रति सेकेंड के लिए डिजाइन किया गया है। मिलता महज 527 क्यूसेक पानी है। अधिकारियों के अनुसार यदि एसवाईएल का पानी मिलने पर रेवाड़ी की कैनालों का आधारभूत ढांचा पूरी तरह तैयार है। 144 किमी. की दूरी तय कर रेवाड़ी पहुंचने वाले पानी को 44 बार लिफ्ट किया जाता है। लिफ्ट इर्रीगेशन सिस्टम को सुधारने के लिए मुख्यमंत्री पहले ही करोड़ों रुपये की घोषणा कर चुके हैं।
इस तरह से समझिए रेवाड़ी कैनाल के आधारभूत ढांचे को
झज्जर के आकेडी स्थित जेएफ-1 पर नहरी पानी प्राकृतिक बहाव के साथ पहुंचता है। यहां पर महेंद्रगढ़ एवं रेवाड़ी के लिए अलग कैनाल बनी हुई है। यहां से साल्हावास स्थित जेएफ-2 से करीब 28 फीट लिफ्ट कर नहरी पानी को रेवाड़ी की तरफ भेजा जाता है। यहां पर भी अलग-अलग 44 स्थानों पर पानी को लिफ्ट कर जिले में टेल तक पानी पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। महेंद्रगढ़ के लिए 1690 और रेवाड़ी के लिए 927 क्यूसेक प्रति सेकेंड नहरी पानी देने का प्रावधान है।
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सिंचाई के लिए बूंद भी नहीं उपलब्ध
पंजाब से हरियाणा को एसवाईएल के माध्यम से अपने हिस्से का 34 मिलियन एकड़ फुट पानी मिलना है। इसके मद्देनजर ही 1974 में दक्षिण हरियाणा में नहरी जाल बिछाया गया था। पंजाब से महज 18 मिलियन एकड़ फुट पानी मिलने के कारण दक्षिण हरियाणा को उसके हिस्से का पानी नहीं मिल पा रहा है। आलम यह है कि रेवाड़ी को मिलने वाला पानी से प्यासी धरती को एक भी बूंद नसीब नहीं हो पाती है। बता दें कि जिले की पेयजल व्यवस्था पूरी तरह से नहरी पानी पर आधारित है। महीने में महज 15 दिन मिलने वाले पानी से 55 वॉटर वर्क्स एवं 166 जोहड़ों को भरा जाता है। नियमानुसार वॉटर वर्क्स के लिए 147 क्यूसेक पानी ही दिया जाना होता है। वास्तविकता यह है कि जिले में सिंचाई के लिए किसानों को एक बूंद भी उपलब्ध नहीं हो पाती है।
बीते दिनों रेवाड़ी में आए मुख्य सचिव डीएस ढेसी ने एसवाईएल पानी मिलने की स्थिति में रेवाड़ी की नहरों की स्थिति का जायजा लिया था। हमारी नहरें 927 क्यूसेक पानी के लिए डिजाइन है, जबकि मिल रहा महज 527 क्यूसेक है। जो दिक्कतें हैं उन्हें सुधारा जा रहा है। बाकी आधारभूत ढांचा पूरी तरह से तैयार है। - प्रवीण कुमार दहिया, एसई, सिंचाई विभाग, रेवाड़ी सर्कल
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अमित विश्वकर्मा
रेवाड़ी।
एसवाईएल पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय हरियाणा के पक्ष में आने के बाद दक्षिण हरियाणा खासकर रेवाड़ी के लोगों को इस पानी का बेसब्री से इंतजार है। अभी तक रेवाड़ी में जो पानी खुबड़ू हेड से पहुंच रहा है वह धरती की प्यास बुझाना तो दूर रेवाड़ी के लोगों की कंठ तक को पूरी तरह से तर नहीं कर पा रहा है। पानी मिलने की उम्मीद के बीच बीते दिनों मुख्य सचिव डीएस ढेसी ने जिले के अधिकारियों के साथ बैठक कर पानी मिलने की स्थिति में आधार भूूत ढांचे के समीक्षा की।
जवाहर लाल नेहरू कैनाल को 927 क्यूसेक प्रति सेकेंड के लिए डिजाइन किया गया है। मिलता महज 527 क्यूसेक पानी है। अधिकारियों के अनुसार यदि एसवाईएल का पानी मिलने पर रेवाड़ी की कैनालों का आधारभूत ढांचा पूरी तरह तैयार है। 144 किमी. की दूरी तय कर रेवाड़ी पहुंचने वाले पानी को 44 बार लिफ्ट किया जाता है। लिफ्ट इर्रीगेशन सिस्टम को सुधारने के लिए मुख्यमंत्री पहले ही करोड़ों रुपये की घोषणा कर चुके हैं।
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इस तरह से समझिए रेवाड़ी कैनाल के आधारभूत ढांचे को
झज्जर के आकेडी स्थित जेएफ-1 पर नहरी पानी प्राकृतिक बहाव के साथ पहुंचता है। यहां पर महेंद्रगढ़ एवं रेवाड़ी के लिए अलग कैनाल बनी हुई है। यहां से साल्हावास स्थित जेएफ-2 से करीब 28 फीट लिफ्ट कर नहरी पानी को रेवाड़ी की तरफ भेजा जाता है। यहां पर भी अलग-अलग 44 स्थानों पर पानी को लिफ्ट कर जिले में टेल तक पानी पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। महेंद्रगढ़ के लिए 1690 और रेवाड़ी के लिए 927 क्यूसेक प्रति सेकेंड नहरी पानी देने का प्रावधान है।
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सिंचाई के लिए बूंद भी नहीं उपलब्ध
पंजाब से हरियाणा को एसवाईएल के माध्यम से अपने हिस्से का 34 मिलियन एकड़ फुट पानी मिलना है। इसके मद्देनजर ही 1974 में दक्षिण हरियाणा में नहरी जाल बिछाया गया था। पंजाब से महज 18 मिलियन एकड़ फुट पानी मिलने के कारण दक्षिण हरियाणा को उसके हिस्से का पानी नहीं मिल पा रहा है। आलम यह है कि रेवाड़ी को मिलने वाला पानी से प्यासी धरती को एक भी बूंद नसीब नहीं हो पाती है। बता दें कि जिले की पेयजल व्यवस्था पूरी तरह से नहरी पानी पर आधारित है। महीने में महज 15 दिन मिलने वाले पानी से 55 वॉटर वर्क्स एवं 166 जोहड़ों को भरा जाता है। नियमानुसार वॉटर वर्क्स के लिए 147 क्यूसेक पानी ही दिया जाना होता है। वास्तविकता यह है कि जिले में सिंचाई के लिए किसानों को एक बूंद भी उपलब्ध नहीं हो पाती है।
बीते दिनों रेवाड़ी में आए मुख्य सचिव डीएस ढेसी ने एसवाईएल पानी मिलने की स्थिति में रेवाड़ी की नहरों की स्थिति का जायजा लिया था। हमारी नहरें 927 क्यूसेक पानी के लिए डिजाइन है, जबकि मिल रहा महज 527 क्यूसेक है। जो दिक्कतें हैं उन्हें सुधारा जा रहा है। बाकी आधारभूत ढांचा पूरी तरह से तैयार है। - प्रवीण कुमार दहिया, एसई, सिंचाई विभाग, रेवाड़ी सर्कल