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रोहतक की बेटियों ने उदयपुर शिल्पग्राम मेले में दिखाया हरियाणवी घूमर

Thu, 27 Dec 2018 02:31 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 27 Dec 2018 02:31 AM IST
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रोहतक की बेटियों ने उदयपुर शिल्पग्राम मेले में दिखाया हरियाणवी घूमर
रोहतक। अपनी प्रतिभा निखारने के साथ-साथ कला को प्रोत्साहन देना अपने आपमें गर्व की बात है। कला के विस्तृत क्षेत्र में सांस्कृतिक धरोहर सहेजने वाले कम ही मिलते हैं। इसमें से तनिष्क आर्ट्स एडं कल्चर सोसायटी भी एक है। यहां हरियाणवी फोक डांस की ट्रेनिंग लेने वाले युवा हरियाणवी कल्चर को विभिन्न राज्यों में रिप्रेजेंट करते हैं। उदयपुर में आयोजित हो रहे शिल्पग्राम उत्सव में रोहतक की बेटियों ने भी घूमर नृत्य से हरियाणवी संस्कृति को प्रस्तुत किया। रोहतक की तनिष्क आर्ट्स एडं कल्चर सोसायटी के नरेश कुमार के नेतृत्व में 15 सदस्यों के दल ने शिल्पग्राम मेले में अपनी कला का प्रदर्शन किया। इसमें छह युवतियां, 4 संगीतकार और 5 युवतियां शामिल रहे।
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हरियाणवी लोकगीत से दर्शायी यहां की संस्कृति
युवाओं ने हरियाणवी लोकगीत मेरा दामण सिमा दे ओ ओ नणदी के बीरा... लोकगीत के माध्यम से हरियाणवी संस्कृति को दर्शाया। गीत में दर्शाया गया की कैसे ग्रामीण परिवेश में रहने वाली महिलाएं फसल कटने के बाद अपनी पति के सामने डिमांड रखती हैं। जिसमें वह फसल बेचकर आने वाले रुपये से दामण, चुदंड़ और नौलखा मंगवाने की मांग रखती है। इसमें उनका प्यार, मनुहार और तकरार सब दिखाई देती है। टीम में मुस्कान, अन्नु अहलावत, अन्नु, डिपंल, सिमरन, कविता, संदीप, अमित, नरेंद्र, अभिषेक, मोहित, नरेश कुमार मौजूद रहे। वहीं, वाद्ययंत्र में अमित, राहुल, मायना और विशाल रहे।
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मेले का अनुभव रहा खास
शिल्पग्राम उत्सव को देखने का अनुभव खास रहा। वहां अलग-अलग राज्यों के और अलग संस्कृतियों के लोगों से मिलने व नई चीजें सीखने का मौका मिला। अभिभावक खुश होते हैं जब हम अपने राज्य की संस्कृति को दूसरे प्रदेशों में दिखाते हैं। मेले में शिल्पकला को करीब से देखने का मौका मिला। कई ऐसी चीजें भी दिखाई दीं, जिनका वजूद ही खत्म हो चुका है।
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-अन्नु अहलावत
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राजस्थान की संस्कृति को करीब से देखा
शिल्पग्राम मेले में राजस्थान की संस्कृति को करीब से देखने का मौका मिला। हमारे यहां स्टेज को लोहे, पाइप और लकड़ी से ही तैयार करते हैं, लेकिन वहां मुख्य स्टेज को गोबर और मिट्टी से लीपकर बनाया गया था। दूसरे प्रदेशों से आए कारीगरों ने वहां अपनी शिल्पकारी की प्रदर्शनी लगाई थी। लकड़ी के सोफे और लकड़ी के रथ सबसे शानदार लगे।
-मुस्कान
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