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नगर निगम की वार्डबंदी को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई आज
Updated Fri, 25 May 2018 02:44 AM IST
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नगर निगम की वार्डबंदी को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई आज
: कांग्रेसी पार्षदों की याचिका पर अदालत ले सकती है निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। नगर निगम की नई वार्डबंदी को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई होगी। दो सदस्यीय बेंच कांग्रेसी पार्षदों द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करने या न करने, सरकार, शहरी निकाय व नगर निगम रोहतक को नोटिस भेजकर प्रक्रिया पर रोक लगाने का फैसला ले सकती है। चुनाव की तैयारी कर रहे दावेदारों की हाईकोर्ट की प्रक्रिया पर पैनी नजर है। क्योंकि अगर अदालत से स्टे हुआ तो चुनाव दो-तीन माह और लटक सकते हैं।
बता दें कि प्रदेश सरकार ने शहर की जनसंख्या बढ़ने का हवाला देकर निगम की नए सिरे से वार्डबंदी की है। 20 से 22 वार्ड बनाते समय पुराने वार्डों की सीमाओं को बदल दिया है। कांग्रेसी पार्षद राजबीर सैनी, संजय सैनी, अनीता मिगलानी व गुलशन ईशपुनियानी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी कि वार्डबंदी राजनीतिक दबाव में की गई है। साथ ही नियमों के तहत वार्डबंदी के दौरान मांगी गई आपत्तियों की सुनवाई का अधिकारी शहरी निकाय विभाग के मुुख्य सचिव या प्रदेश सरकार द्वारा चंडीगढ़ से भेजे गए किसी अधिकारी को होना चाहिए था। जबकि रोहतक निगम आयुक्त प्रदीप कुमार ने अपने कार्यालय में बैठकर आपत्तियां निपटाई हैं। अदालत ने 21 मई को याचिका पर सुनवाई शुरू की थी, जो 25 मई को भी जारी रहेगी।
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: कांग्रेसी पार्षदों की याचिका पर अदालत ले सकती है निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। नगर निगम की नई वार्डबंदी को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई होगी। दो सदस्यीय बेंच कांग्रेसी पार्षदों द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करने या न करने, सरकार, शहरी निकाय व नगर निगम रोहतक को नोटिस भेजकर प्रक्रिया पर रोक लगाने का फैसला ले सकती है। चुनाव की तैयारी कर रहे दावेदारों की हाईकोर्ट की प्रक्रिया पर पैनी नजर है। क्योंकि अगर अदालत से स्टे हुआ तो चुनाव दो-तीन माह और लटक सकते हैं।
बता दें कि प्रदेश सरकार ने शहर की जनसंख्या बढ़ने का हवाला देकर निगम की नए सिरे से वार्डबंदी की है। 20 से 22 वार्ड बनाते समय पुराने वार्डों की सीमाओं को बदल दिया है। कांग्रेसी पार्षद राजबीर सैनी, संजय सैनी, अनीता मिगलानी व गुलशन ईशपुनियानी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी कि वार्डबंदी राजनीतिक दबाव में की गई है। साथ ही नियमों के तहत वार्डबंदी के दौरान मांगी गई आपत्तियों की सुनवाई का अधिकारी शहरी निकाय विभाग के मुुख्य सचिव या प्रदेश सरकार द्वारा चंडीगढ़ से भेजे गए किसी अधिकारी को होना चाहिए था। जबकि रोहतक निगम आयुक्त प्रदीप कुमार ने अपने कार्यालय में बैठकर आपत्तियां निपटाई हैं। अदालत ने 21 मई को याचिका पर सुनवाई शुरू की थी, जो 25 मई को भी जारी रहेगी।
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