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Rewari News: सड़क हादसे में स्कूल बस चालक की पहचान नहीं बता पाए गवाह, आरोपी बरी

Sun, 10 Aug 2025 11:45 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Sun, 10 Aug 2025 11:45 PM IST
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Witnesses could not identify the school bus driver in a road accident, accused acquitted
संवाद न्यूज एजेंसी
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बावल। सब डिवीजनल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट बावल आलोक आनंद की अदालत ने पांच साल पुराने सड़क हादसे के मामले में स्कूल बस चालक अलवर निवासी करन सिंह को बरी कर दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि घटना और शिकायत दर्ज करने में 26 दिन का अंतर है। इसका कोई संतोषजनक कारण शिकायतकर्ता नहीं बता पाया।
गवाह अनिल, कुलदीप और सुभे सिंह की मौजूदगी साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया जा सका। कई गवाहों ने माना कि उन्हें बस चालक का नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर किसी अज्ञात व्यक्ति ने बताया था, जिसका नाम तक सामने नहीं आया।
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पीड़ित संजय ने बयान में माना कि उसने आरोपी को घटना के समय नहीं पहचाना और न ही वाहन का नंबर देखा था। अदालत ने यह भी कहा कि शिकायत के मुताबिक बस के पीछे का हिस्सा मोड़ते मोटरसाइकिल से टकराया। सीधे टक्कर का मामला नहीं है।
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ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि चालक ने लापरवाही से वाहन चलाया। धारा 338 के तहत गंभीर चोट साबित करने के लिए भी कोई ठोस चिकित्सीय साक्ष्य पेश नहीं किया गया। ऐसे में अदालत ने करन सिंह को बरी करते हुए जमानत व श्योरिटी बॉन्ड खत्म करने के आदेश दिए।

22 दिसंबर 2018 का है मामला

हादसे का यह मामला 22 दिसंबर 2018 का है। रामसरन ने शिकायत दी थी कि वह अपने बहनोई संजय के साथ मोटरसाइकिल से गुगलकोटा जा रहे थे। तभी पीछे से एक स्कूल बस तेज रफ्तार व लापरवाही से आते हुए मोटरसाइकिल के साइड में टकरा गई। टक्कर से दोनों गिर गए और संजय गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना को सुभे सिंह, अनिल और कुलदीप ने होते देखा। शुरू में स्कूल प्रबंधन ने इलाज का खर्च वहन करने की बात कही लेकिन बाद में इंकार कर दिया।


17 जनवरी 2019 को दर्ज की गई थी शिकायत

शिकायतकर्ता ने 17 जनवरी 2019 को पुलिस को लिखित शिकायत दी जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने जांच के बाद करन सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 279 (तेज व लापरवाह वाहन चलाना), 337 (साधारण चोट) और 338 (गंभीर चोट) के तहत चालान पेश किया। अदालत में अभियोजन ने कुल नौ गवाह पेश किए, जिनमें कथित प्रत्यक्षदर्शी, पीड़ित, पुलिस अधिकारी और डॉक्टर शामिल थे।
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