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दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर से निवेश बढ़ने के साथ रोजगार के मिलेंगे अवसर

Sun, 04 Jul 2021 11:24 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 04 Jul 2021 11:24 PM IST
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With the increase in investment from the Delhi-Mumbai Industrial Western Freight Corridor, employment will get wings
रेवाड़ी। पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के 306 किलोमीटर लंबे रेवाड़ी-मदार रेल खंड के सात जनवरी को प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन के बाद अब इस रेल मार्ग पर डबल डेकर मालगाड़ियों की सीटी बजनी शुरू हो गई है। इस कॉरिडोर के निर्माण से दिल्ली- मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जुड़े राज्यों में प्रस्तावित निवेश क्षेत्रों का विकास तेज होगा और रोजगार के अवसर बढ़ने से लोगों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।
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पहली डबल स्टैक लांग कंटेनर डेढ़ किमी लंबी ट्रेन न्यू रेवाड़ी-न्यू किशनगढ़-न्यू मदार के बीच दौड़ने लगी है। इससे माल ढुलाई सस्ती होगी। डीजल के स्थान पर माल ढुलाई का कार्य इलेक्ट्रिक रेलगाड़ियों से होने के चलते पर्यावरण संरक्षण के साथ ही दूसरे देशों से कच्चे तेल की खपत पर भी निर्भरता कम होगी। यूूपी के दादरी से लेकर गुजरात के वलसाड स्थित जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह तक निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अब उत्तर भारत सीधे पश्चिम के बंदरगाहों से जुड़ जाएगा। वलसाड तक के इस रेल खंड का निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य जून 2022 तक रखा गया है। वहीं रेवाड़ी से लेकर यूपी के दादरी तक 141 किमी लंबे रेल खंड का कार्य चल रहा है। इसे दिसंबर 2021 तक पूरा किया जाना है। दादरी से आगे यह इस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ जाएगा।
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विदेशों की तर्ज पर होगी माल ढुलाई
पहले के मुकाबले अब मालगाड़ियों की औसत स्पीड तीन गुना बढ़ी है। यह परियोजना गेम चेंजर है। पहली डबल स्टैक कंटेंनर ट्रेन बड़ी उपलब्धि है। भारत इस क्षमता वाले गिने-चुने देशों में शामिल हो गया है। एनसीआर के साथ-साथ हरियाणा व राजस्थान के किसानों के लिए ऐतिहासिक है।
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कम हो जाएगा मौजूदा ट्रैक पर भार
डेडिकेटेड वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर(डीएफसी) बनने से पूरे दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात व महाराष्ट्र में माल की आवाजाही सुगम व सस्ती हो जाएगी। इससे मौजूदा रेलवे ट्रैक पर संचालन भार कम होगा, जिससे यात्री गाड़ियों की स्पीड बढ़ाना भी संभव हो सकेगा। वेस्टर्न डीएफसी राजधानी दिल्ली को आर्थिक राजधानी मुंबई से जोड़ेगा। यह डबल लाइन गलियारा पूरी तरह विद्युतीकृत होगा। इससे खाद, खाद्यान्न, नमक, कोयला, लोहा, स्टील व सीमेंट जैसी जरूरी वस्तुएं कम समय में गंतव्य तक पहुंचेंगी। इस कॉरिडोर की ट्रैक सामान्य से अधिक क्षमता की रहेगी। एक अनुमान के अनुसार वर्तमान में रेलवे द्वारा ढोया जा रहा 70 फीसद सामान इन दोनों गलियारों पर शिफ्ट हो जाएगा।
वेस्टर्न कॉरिडोर : किस राज्य में कितनी दूरी
हरियाणा-177 किमी
राजस्थान-567 किमी
गुजरात-565 किमी
महाराष्ट्र-177 किमी
उत्तर प्रदेश -18 किमी
कुल दूरी -1504
इन स्टेशनों पर होगी इंटरचेंज की सुविधा
न्यू रेवाड़ी-न्यू मदार सेक्शन का हिस्सा हरियाणा और राजस्थान दोनों में आता है। इस मार्ग पर न्यू रेवाड़ी, न्यू अटेली और न्यू फूलेरा जैसे तीन जंक्शन सहित नौ स्टेशन बनाए गए हैं। स्टेशनों में न्यू डाबला, न्यू भगेगा, न्यू श्री माधोपुर, न्यू पछार मालिकपुर, न्यू सकूल और न्यू किशनगढ़ शामिल हैं। इन स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा भी मौजूद रहेगी।
मानेसर व रेवाड़ी के उद्योगों को सीधा लाभ
इस नए मालवाहन गलियारे के खुल जाने से राजस्थान और हरियाणा के रेवाड़ी-मानेसर, नारनौल, फूलेरा और किशनगढ़ में मौजूद विभिन्न औद्योगिक इकाइयों को फायदा पहुंचेगा। इसके अलावा काठूवास स्थित कॉनकोर के कन्टेनर डिपो का भी बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा।

मालवहन गलियारा गुजरात में स्थित कान्डला, पीपावाव, मुंद्रा और दाहेज बंदरगाहों से सामान की ढुलाई को भी आसान बना देगा। इस रेल खंड के शुरू हो जाने से देश का पश्चिमी और पूर्वी मालवाहन गलियारा एक दूसरे से जुड़ जाएंगे।
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