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पिछड़े वर्ग की आय में वेतन और कृषि आय जोड़ने का किया स्वागत
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रेवाड़ी। पिछड़े वर्ग के क्रीमी लेयर मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सामाजिक न्याय मंच ने स्वागत किया है। इसे सामाजिक न्याय के क्षेत्र में बड़ा कदम बताया है।
मंच के संयोजक एवं हसला के पूर्व राज्य प्रधान अनिल यादव ने बताया कि हरियाणा में प्रदेश सरकार ने मनमानी करते हुए पिछड़े वर्ग की आय में वेतन व कृषि आय जोड़ने का फरमान 28 अगस्त 2018 जारी कर दिया था। यह केंद्र की ओबीसी नियमावली के विरुद्ध था। इसमें वेतन तथा कृषि आय को वार्षिक आय का हिस्सा नहीं माना जाता है। प्रदेश सरकार के उक्त फरमान के विरोध में पिछड़ा वर्ग कल्याण संघ हरियाणा के अध्यक्ष प्रोफेसर लिंबा राम और यादव कल्याण सभा रेवाड़ी की ओर से प्रधान अनिल यादव ने संयुक्त तत्वाधान में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया। कई दौर की बहस और अपने तथ्यों को रखने के बाद माननीय उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इसमें प्रदेश सरकार की 17 अगस्त 2016 और 28 अगस्त 2018 के संबंधित निर्देशों को आगामी 3 माह में वापस लेने के आदेश दिए हैं। वर्ष 2018 में मेडिकल कॉलेजों में और अन्य स्थानों पर हुए दाखिले में पुरानी नियमावली को ही उचित ठहराया गया है। यादव ने बताया कि वेतन तथा कृषि आय को पिछड़े वर्ग के लिए वार्षिक आय का हिस्सा मानने से हरियाणा में पिछड़े वर्ग के कर्मचारियों तथा किसानों का आरक्षण लगभग खत्म हो गया था। इतना ही नहीं विभिन्न संस्थानों में ओबीसी वर्ग के प्रतिभाशाली छात्र छात्राओं को सामान्य वर्ग में आवेदन करने पर विवश होना पड़ता था। किंतु अब इस ऐतिहासिक फैसले से केंद्र की ओबीसी तथा हरियाणा की बीसी नियमावली फिर एक जैसी हो गई है। जिससे पिछड़े वर्ग को उनके आरक्षण का पूरा लाभ संबंधित लाभ पात्रों को मिलेगा। यादव ने आरक्षण में लागू की गए इन तकनीकी षड्यंत्रों को दूर करवाने के लिए न्यायालय में लड़ी गई लड़ाई में पिछड़ा वर्ग कल्याण संघ हरियाणा तथा यादव कल्याण सभा रेवाड़ी का साथ देने वाले विभिन्न संगठनों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं का आभार ज्ञापित किया है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय मंच भविष्य में भी पिछड़ों के साथ विभिन्न मामलों में बढ़ते जा रहे भेदभाव, सभी वर्गों की नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने, जातीय जनगणना करवाने जैसे मुद्दों पर अपना संघर्ष जारी रखेगा। इस संदर्भ में निकट भविष्य में आंदोलन का प्रारूप तैयार करके एक विशेष बैठक बुलाई जाएगी।
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मंच के संयोजक एवं हसला के पूर्व राज्य प्रधान अनिल यादव ने बताया कि हरियाणा में प्रदेश सरकार ने मनमानी करते हुए पिछड़े वर्ग की आय में वेतन व कृषि आय जोड़ने का फरमान 28 अगस्त 2018 जारी कर दिया था। यह केंद्र की ओबीसी नियमावली के विरुद्ध था। इसमें वेतन तथा कृषि आय को वार्षिक आय का हिस्सा नहीं माना जाता है। प्रदेश सरकार के उक्त फरमान के विरोध में पिछड़ा वर्ग कल्याण संघ हरियाणा के अध्यक्ष प्रोफेसर लिंबा राम और यादव कल्याण सभा रेवाड़ी की ओर से प्रधान अनिल यादव ने संयुक्त तत्वाधान में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया। कई दौर की बहस और अपने तथ्यों को रखने के बाद माननीय उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इसमें प्रदेश सरकार की 17 अगस्त 2016 और 28 अगस्त 2018 के संबंधित निर्देशों को आगामी 3 माह में वापस लेने के आदेश दिए हैं। वर्ष 2018 में मेडिकल कॉलेजों में और अन्य स्थानों पर हुए दाखिले में पुरानी नियमावली को ही उचित ठहराया गया है। यादव ने बताया कि वेतन तथा कृषि आय को पिछड़े वर्ग के लिए वार्षिक आय का हिस्सा मानने से हरियाणा में पिछड़े वर्ग के कर्मचारियों तथा किसानों का आरक्षण लगभग खत्म हो गया था। इतना ही नहीं विभिन्न संस्थानों में ओबीसी वर्ग के प्रतिभाशाली छात्र छात्राओं को सामान्य वर्ग में आवेदन करने पर विवश होना पड़ता था। किंतु अब इस ऐतिहासिक फैसले से केंद्र की ओबीसी तथा हरियाणा की बीसी नियमावली फिर एक जैसी हो गई है। जिससे पिछड़े वर्ग को उनके आरक्षण का पूरा लाभ संबंधित लाभ पात्रों को मिलेगा। यादव ने आरक्षण में लागू की गए इन तकनीकी षड्यंत्रों को दूर करवाने के लिए न्यायालय में लड़ी गई लड़ाई में पिछड़ा वर्ग कल्याण संघ हरियाणा तथा यादव कल्याण सभा रेवाड़ी का साथ देने वाले विभिन्न संगठनों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं का आभार ज्ञापित किया है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय मंच भविष्य में भी पिछड़ों के साथ विभिन्न मामलों में बढ़ते जा रहे भेदभाव, सभी वर्गों की नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने, जातीय जनगणना करवाने जैसे मुद्दों पर अपना संघर्ष जारी रखेगा। इस संदर्भ में निकट भविष्य में आंदोलन का प्रारूप तैयार करके एक विशेष बैठक बुलाई जाएगी।
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