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मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए दिया जा रहा प्रशिक्षण : डॉ. नरेंद्र
Wed, 28 Jan 2026 11:43 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 28 Jan 2026 11:43 PM IST
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कृषि विज्ञान केंद्र बावल में मशरूम उत्पादन तकनीक विषय पर प्रशिक्षण हासिल करते किसान। स्रोत : ग्
- फोटो : टूंडला तहसील में एसआईआर का कार्य करते पशु चिकित्सक व अन्य संवाद
बावल। फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र बावल में मशरूम (खुम्ब) उत्पादन तकनीक विषय पर प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. रमेश कुमार यादव के मार्गदर्शन में हुआ। 30 युवाओं व किसानों ने भाग लिया।
केंद्र के वरिष्ठ संयोजक डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र में समय-समय पर बेरोजगार युवाओं एवं युवतियों के लिए स्वरोजगार से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि मशरूम उत्पादन ऐसा व्यवसाय है, जिसे भूमिहीन युवा भी आसानी से कर सकते हैं, क्योंकि इसके लिए कृषि भूमि की आवश्यकता नहीं होती।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के संयोजक डॉ. नरेंद्र कुमार यादव ने मशरूम उत्पादन तकनीक पर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि जिले में मशरूम की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है और इसके लिए बाजार की भी अच्छी उपलब्धता है। मशरूम में उच्च गुणवत्ता का प्रोटीन पाया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। उन्होंने कंपोस्ट बनाने की विधि, केसिंग मिश्रण, जैविक एवं अजैविक प्रकारों की जानकारी भी दी। डॉ. नरेश कुमार यादव ने बीज मिलाने की विधि के साथ-साथ मशरूम में लगने वाली बीमारियों और कीटों के नियंत्रण व उपचार के बारे में विस्तार से बताया। वहीं, डॉ. प्रीति ने आयस्टर (ढीगरी) मशरूम और दूधिया मशरूम की उत्पादन तकनीक पर प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों का शैक्षणिक भ्रमण क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र बावल की जीवाणु तथा मिट्टी-पानी जांच प्रयोगशाला में भी कराया गया, जहां उन्हें आधुनिक परीक्षण विधियों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए इसे स्वरोजगार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया
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केंद्र के वरिष्ठ संयोजक डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र में समय-समय पर बेरोजगार युवाओं एवं युवतियों के लिए स्वरोजगार से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि मशरूम उत्पादन ऐसा व्यवसाय है, जिसे भूमिहीन युवा भी आसानी से कर सकते हैं, क्योंकि इसके लिए कृषि भूमि की आवश्यकता नहीं होती।
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प्रशिक्षण कार्यक्रम के संयोजक डॉ. नरेंद्र कुमार यादव ने मशरूम उत्पादन तकनीक पर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि जिले में मशरूम की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है और इसके लिए बाजार की भी अच्छी उपलब्धता है। मशरूम में उच्च गुणवत्ता का प्रोटीन पाया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। उन्होंने कंपोस्ट बनाने की विधि, केसिंग मिश्रण, जैविक एवं अजैविक प्रकारों की जानकारी भी दी। डॉ. नरेश कुमार यादव ने बीज मिलाने की विधि के साथ-साथ मशरूम में लगने वाली बीमारियों और कीटों के नियंत्रण व उपचार के बारे में विस्तार से बताया। वहीं, डॉ. प्रीति ने आयस्टर (ढीगरी) मशरूम और दूधिया मशरूम की उत्पादन तकनीक पर प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों का शैक्षणिक भ्रमण क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र बावल की जीवाणु तथा मिट्टी-पानी जांच प्रयोगशाला में भी कराया गया, जहां उन्हें आधुनिक परीक्षण विधियों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए इसे स्वरोजगार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया
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