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आज निजी अस्पतालों में सुबह 8 से दोपहर दो बजे तक ओपीडी रहेगी बंद
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रेवाड़ी। आधुनिक चिकित्सक पद्धति के खिलाफ बयानबाजी व चिकित्सकों पर हो रहे हमले के विरोध में पहले से प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को आईएमए से जुड़े सभी अस्पतालों में सुबह आठ से लेकर दोपहर दो बजे तक ओपीडी सेवाएं बंद रहेंगी। हालांकि कोविड मरीज व आपात सेवाएं पहले की तरह ही सुचारू रहेंगी।
आईएमए के प्रधान डॉ. पवन गोयल ने बताया कि कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए चिकित्सक सुबह 10 बजे मॉडल टाऊन स्थित गांधी चौक पर एकत्रित होकर अपना विरोध जताते हुए डीसी को मांग पत्र सौंपेंगे। उन्होंने कहा कि कोरोनाकाल में आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के डॉक्टरों द्वारा देश एवं समाज की सेवा में अभूतपूर्व योगदान रहा है और इस दौरान 1500 से ज्यादा डॉक्टरों ने मरीजों की सेवा में अपने प्राणों का त्याग भी किया है। डॉक्टरों पर होने वाले हमले ना केवल डॉक्टरों के मनोबल पर विपरीत प्रभाव डालते हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों को चिकित्सा व्यवसाय चुनने पर एक नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। यदि डॉक्टरों पर इसी प्रकार हमले होते रहे तो हमारी आने वाली पीढ़ियां कदापि इस व्यवसाय को नहीं अपनाएंगे और चिकित्सा कर्मी भी गंभीर मरीजों का इलाज करने में अपने आप को मानसिक रूप से तैयार नहीं कर पाएंगे। 15 जून 2021 को भी सभी डॉक्टरों ने अस्पतालों में भय रहित वातावरण एवं सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक प्रबंध करने तथा अस्पतालों में हिंसा के विरुद्ध केंद्रीय कानून की अपनी मांगों को जनता व सरकार के सामने रखा था। बाबा रामदेव द्वारा डॉक्टरों के विरुद्ध जो आपत्तिजनक व असंवेदनशील बयान दिये गए। यह कोरोना मरीजों की सेवा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले चिकित्सकों की शहादत का अपमान है बल्कि सरकार की कोरोना वायरस के विरुद्ध तमाम कोशिशों को भी हानि पहुंचाने की साजिश है।
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आईएमए के प्रधान डॉ. पवन गोयल ने बताया कि कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए चिकित्सक सुबह 10 बजे मॉडल टाऊन स्थित गांधी चौक पर एकत्रित होकर अपना विरोध जताते हुए डीसी को मांग पत्र सौंपेंगे। उन्होंने कहा कि कोरोनाकाल में आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के डॉक्टरों द्वारा देश एवं समाज की सेवा में अभूतपूर्व योगदान रहा है और इस दौरान 1500 से ज्यादा डॉक्टरों ने मरीजों की सेवा में अपने प्राणों का त्याग भी किया है। डॉक्टरों पर होने वाले हमले ना केवल डॉक्टरों के मनोबल पर विपरीत प्रभाव डालते हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों को चिकित्सा व्यवसाय चुनने पर एक नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। यदि डॉक्टरों पर इसी प्रकार हमले होते रहे तो हमारी आने वाली पीढ़ियां कदापि इस व्यवसाय को नहीं अपनाएंगे और चिकित्सा कर्मी भी गंभीर मरीजों का इलाज करने में अपने आप को मानसिक रूप से तैयार नहीं कर पाएंगे। 15 जून 2021 को भी सभी डॉक्टरों ने अस्पतालों में भय रहित वातावरण एवं सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक प्रबंध करने तथा अस्पतालों में हिंसा के विरुद्ध केंद्रीय कानून की अपनी मांगों को जनता व सरकार के सामने रखा था। बाबा रामदेव द्वारा डॉक्टरों के विरुद्ध जो आपत्तिजनक व असंवेदनशील बयान दिये गए। यह कोरोना मरीजों की सेवा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले चिकित्सकों की शहादत का अपमान है बल्कि सरकार की कोरोना वायरस के विरुद्ध तमाम कोशिशों को भी हानि पहुंचाने की साजिश है।
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