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Rewari News: इस बार 40 हजार हेक्टेयर रखा गेहूं की बिजाई का लक्ष्य
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फसल पर दवा का छिड़काव करता किसान। संवाद
रेवाड़ी। सरसों की बिजाई के बाद अब जिले में गेहूं की बिजाई शुरू है। अगेती बिजाई के लिए किसानों ने खेत तैयार कर बुवाई कर दी है।
15 नवंबर तक अगेती बिजाई और उसके बाद 25 नवंबर तक समय की बिजाई है। अगर इस अवधि में भी किसान गेहूं की बिजाई नहीं करते हैं तो फिर उनको पछेती किस्मों की बुवाई करनी पड़ेगी।
जिले में इस बार कृषि विभाग की तरफ से 40 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बिजाई का लक्ष्य रखा है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि इस बार गेहूं का रकबा कम और सरसों का रकबा बढ़ा है।
इसका कारण सितंबर के आखिर में हुई बारिश है क्योंकि किसानों को सरसों की बिजाई के लिए पलेवा की जरूरत नहीं पड़ी है। खेत में नमी के सूखते ही किसानों ने सरसों की बिजाई कर दी। इस बार लगभग 80 हजार हेक्टेयर में सरसों बोई गई है।
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जिले में वर्ष 2024 में गेहूं का 37 हजार 500 हेक्टेयर में बिजाई का लक्ष्य था। इस बार 40 हजार हेक्टेयर रखा गया है। विशेषज्ञ ये भी मानते हैं कि इस बार रकबा कम रह सकता है क्योंकि सितंबर में बरसात से सरसों का रकबा बढ़ा है।
किसानों को सरसों की बिजाई के लिए पलेवा की आवश्यकता नहीं रही। इस बार सरसों का रकबा 80 हजार हेक्टेयर तक पहुंच गया है। किसानों का कहना है कि वे इस बार भी गेहूं की पैदावार बढ़ाने को लेकर उत्साहित हैं, लेकिन मौसम के मिजाज पर नजर बनाए हुए हैं। अगर नवंबर के दूसरे पखवाड़े में ठंड बढ़ी तो फसल को फायदा होगा, वहीं अधिक तापमान रहने पर उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
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बावल एग्री रिसर्च सेंटर से ले सकते हैं जैविक टीका
एग्री रिसर्च सेंटर बावल में गेहूं के लिए जैविक टीके (जीवाणु खाद) उपलब्ध हैं जो नाइट्रोजन की पूर्ति करते हैं। यह जीवाणु खाद गेहूं की पैदावार बढ़ाने और खेती की लागत कम करने में मदद करती है। टीके को केंद्र की जीवाणु खाद प्रयोगशाला (बायो फर्टिलाइजर लैब) में तैयार किया जाता है। एक टीके की कीमत 20 रुपये है। किसान केंद्र से टीका ले सकते हैं।
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गेहूं की बिजाई निर्धारित समय सीमा के भीतर करें
कृषि विभाग अधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने किसानों को सलाह दी है कि वे गेहूं की बिजाई निर्धारित समय सीमा के भीतर करें। अगेती बिजाई से जहां फसल की उत्पादकता बढ़ती है, वहीं पछेती बिजाई में तापमान के बढ़ने से उत्पादन घटने की संभावना रहती है।
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15 नवंबर तक अगेती बिजाई और उसके बाद 25 नवंबर तक समय की बिजाई है। अगर इस अवधि में भी किसान गेहूं की बिजाई नहीं करते हैं तो फिर उनको पछेती किस्मों की बुवाई करनी पड़ेगी।
जिले में इस बार कृषि विभाग की तरफ से 40 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बिजाई का लक्ष्य रखा है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि इस बार गेहूं का रकबा कम और सरसों का रकबा बढ़ा है।
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इसका कारण सितंबर के आखिर में हुई बारिश है क्योंकि किसानों को सरसों की बिजाई के लिए पलेवा की जरूरत नहीं पड़ी है। खेत में नमी के सूखते ही किसानों ने सरसों की बिजाई कर दी। इस बार लगभग 80 हजार हेक्टेयर में सरसों बोई गई है।
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जिले में वर्ष 2024 में गेहूं का 37 हजार 500 हेक्टेयर में बिजाई का लक्ष्य था। इस बार 40 हजार हेक्टेयर रखा गया है। विशेषज्ञ ये भी मानते हैं कि इस बार रकबा कम रह सकता है क्योंकि सितंबर में बरसात से सरसों का रकबा बढ़ा है।
किसानों को सरसों की बिजाई के लिए पलेवा की आवश्यकता नहीं रही। इस बार सरसों का रकबा 80 हजार हेक्टेयर तक पहुंच गया है। किसानों का कहना है कि वे इस बार भी गेहूं की पैदावार बढ़ाने को लेकर उत्साहित हैं, लेकिन मौसम के मिजाज पर नजर बनाए हुए हैं। अगर नवंबर के दूसरे पखवाड़े में ठंड बढ़ी तो फसल को फायदा होगा, वहीं अधिक तापमान रहने पर उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
बावल एग्री रिसर्च सेंटर से ले सकते हैं जैविक टीका
एग्री रिसर्च सेंटर बावल में गेहूं के लिए जैविक टीके (जीवाणु खाद) उपलब्ध हैं जो नाइट्रोजन की पूर्ति करते हैं। यह जीवाणु खाद गेहूं की पैदावार बढ़ाने और खेती की लागत कम करने में मदद करती है। टीके को केंद्र की जीवाणु खाद प्रयोगशाला (बायो फर्टिलाइजर लैब) में तैयार किया जाता है। एक टीके की कीमत 20 रुपये है। किसान केंद्र से टीका ले सकते हैं।
गेहूं की बिजाई निर्धारित समय सीमा के भीतर करें
कृषि विभाग अधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने किसानों को सलाह दी है कि वे गेहूं की बिजाई निर्धारित समय सीमा के भीतर करें। अगेती बिजाई से जहां फसल की उत्पादकता बढ़ती है, वहीं पछेती बिजाई में तापमान के बढ़ने से उत्पादन घटने की संभावना रहती है।