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पंद्रह बार टेंडर, लेकिन सीवर सफाई मशीन नहीं खरीद सका जन स्वास्थ्य विभाग

Fri, 04 Jun 2021 10:37 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 04 Jun 2021 10:37 PM IST
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Tender fifteen times, Public Health Department could not buy sewer cleaning machine
सीवर की सफाई करते कर्मी। - फोटो : Rewari
रेवाड़ी। मानसून के दौरान शहर में जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए जन स्वास्थ्य विभाग के संसाधनों से लेकर योजना तक का अभाव भी दिखाई दे रहा है। विभाग शहर की 255 किमी छोटी सीवर लाइन की सफाई के लिए दो साल में 4.43 करोड़ की लागत वाली मशीन तक नहीं खरीद पाया है। जबकि इसके लिए दो साल में 15 बाद टेंडर किए जा चुके हैं। एक बार फिर से वीरवार को विभाग की ओर से टेंडर लगाया गया है।
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ऐसे में अब समय पर मशीन नहीं खरीदने व कर्मचारियों के अभाव में बारिश के दौरान शहर में जलभराव की आशंका बढ़ गई है। बता दें कि शहर में कुल 497 किमी लंबी सीवर लाइन है। इसकी सफाई बड़ी मशीन से हो जाती है, लेकिन छोटी गलियों के लिए दूसरी मशीन की जरूरत है।
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सात साल के लिए दिया जाना है ठेका
पुराने शहर में छोटी गलियां होने के चलते जन स्वास्थ्य विभाग की मात्र एक बड़ी मशीन इन गलियों में नहीं जा पाती है। इसके चलते ही पुराने शहर में सीवर ओवरफ्लो की समस्या सबसे ज्यादा रहती है। इसके लिए विभाग की ओर से सात साल के लिए करीब साढ़े चार करोड़ रुपये का ठेका दिया जाना है। ठेकेदार मशीन खरीदने से लेकर सफाई खुद कराएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया है।
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नियमों की भी अनदेखी
सीवर में घुसकर सफाई करने के दौरान सफाईकर्मियों होने की मौत के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सीवर में घुसकर सफाई करने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। इस काम के लिए निगम ने 31 वार्ड की करीब दो लाख की आबादी के सीवर की सफाई के लिए अनुबंध आधार पर करीब 41 कर्मचारी रखे हुए हैं। कर्मचारियों की कमी भी सीवर सफाई व शहर में ओवरफ्लो की समस्या का बड़ा कारण है। वहीं कर्मचारियों के सीवर में उतारकर सफाई करवाकर भी विभाग नियमों की अवहेलना कर रहा है।
एक दिन में 22-25 सीवर ओवरफ्लो की समस्या
जन स्वास्थ्य विभाग के पास एक दिन में कम से कम 22-25 सीवर ओवरफ्लो की समस्या आना आम हो चुका है। लेकिन संसाधनों के अभाव में शिकायतों का निदान भी एक चुनौती से कम नहीं है। शहर में सीवर सफाई का मुद्दा नगर परिषद की पहली बैठक से लेकर सीएम तक पहुंच चुका है। भाजपा जिला उपाध्यक्ष वार्ड-23 के पार्षद भूपेंद्र गुप्ता खुद इसकी शिकायत कर चुके हैं।
33 करोड़ रुपये से भी नहीं हो सका समाधान
शासन कोई भी अधिकारियों का तरीका नहीं बदलता है। इसके चलते ही लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अम्रुत योजना के तहत 33 करोड़ मिलने के दो साल बाद भी सीवर समस्या होना बेहद चिंता जनक है, क्योंकि इस राशि से शहर की सीवर व्यवस्था ठीक किया जाना था। अधिकारी 40 फीसदी राशि से भी काम नहीं करा पाए हैं, जबकि योजना की समय सीमा बीत चुकी है।
दबाव बढ़ा तो शुरू किया काम
बारिश से पहले सीवर की छंटाई नहीं होने का मुद्दा उठता देख जन स्वास्थ्य विभाग ने कुछ स्थानों पर सफाई का कार्य शुरू कर दिया है। लेकिन सवाल है कि इतनी गर्मी व बारिश के दौरान क्या पूरी तरह से शहर के सीवर साफ हो पाएंगे। वहीं अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में है, जबकि दो दिन पहले ही डीसी यशेंद्र सिंह ने बाढ़ से बचाव को लेकर धारूहेड़ा का निरीक्षण किया है।

जन स्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन अशोक कुमार ने बताया कि सीवर सफाई का काम शुरू कर दिया गया है। छोटी गलियों के लिए मशीन व सफाई का टेंडर देने के बाद भी एजेंसी नहीं मिल पाई है। वीरवार को एक बार फिर से टेंडर कर दिया गया है। जल्द ही सफाई पूरी कराई जाएगी।
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