फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rewari News ›   seven, years, 250, house, electricity, suply, cut

सात सालों से 250 किसानों के घरों में अंधेरा

Sat, 06 May 2017 12:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 06 May 2017 12:11 AM IST
विज्ञापन
गांव डहीना के खेतों में रहकर खेती करने वाले करीब 250 किसानों के घरों में सात सालों से अंधेरा छाया हुआ है। अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक गुहार लगाने के बाद भी अभी तक इनके घरों में उजाला नहीं हुआ है। उल्लेखनीय है कि किसानों को ढाणी में घरेलू बिजली मुहैया कराने एवं समस्या के समाधान के लिए प्रदेश सरकार की ओर से 13/2017 लेटर जारी करने के बावजूद समस्या जस की तस है।
विज्ञापन

निगम के नियमानुसार खेतों में दिए गए कनेक्शन एपी अर्थात एग्रीकल्चर कनेक्शन कहलाते हैं। इस पर यूनिट की दर बेहद सस्ती होती है। इसलिए यहां की बिजली घरेलू उपयोग में नहीं लाई जा सकती है। डहीना में इन किसानों ने सात साल पूर्व खेेतों में मकान बनाकर रहना शुरू करा दिया था। धीरे-धीरे यहां पर घरों की संख्या बढ़ने लगी लेकिन बिजली कनेक्शन नहीं मिले। कांग्रेस की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में भी इसका समाधान खोजने की कोशिश की गई थी। इसके तहत 50:50 शेयर पर एस्टीमेट बनाकर घरेलू कनेक्शन दिए गए। इसमें घरेलू लाइन खींचने के लिए 50 फीसदी निगम, 22.50 एमपी लैड, 22.50 सरकार को वहन करना था। खर्चे का पांच फीसदी उपभोक्ता को वहन करना था। इसकी तर्ज पर ढाणियों में कनेक्शन दिए गए। यह स्कीम लेटर संख्या 64/2013 के बाद शुरू की गई थी। लेकिन डहीणा की ढाणी को इस स्कीम से भी लाभ नहीं मिल सका।
विज्ञापन

----------------------      
गुजरात की तर्ज पर पैट ट्रांसफार्मर लगाकर किया जाना था समाधान      
प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद खर्च से बचने एवं समाधान के लिए गुजरात पैटर्न का सहारा लिया गया है। वर्ष 2017 में निगम की ओर से जारी 13/2017 के लेटर के अनुसार कृषि लाइन पर ही एक पैट ट्रांसफार्मर लगाया जाना है। इसके माध्यम से उसी लाइन पर खेतों में रहने वाले घरों में घरेलू बिजली देना है। नियम तो बना दिया गया लेकिन डहीना के धरती पुत्रों को इस योजना से भी नहीं जोड़ा जा सका। और आज तक उनकी समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

----------------------      
यह है असली समस्या
जरूरत के हिसाब से खेत एवं गांव में बिजली देने का समय अलग-अलग रखा जाता है। घरेलू बिजली उपभोक्ताओं की जरूरतें भी अलग होती है। इसलिए शेड्यूल भी अलग ही रखा जाता है। गांव ढाणी में अलग से लाइन नहीं होने के कारण यहां रहने वाले लोगों को समय पर बिजली मिल नहीं पाती है। ऐसे में उनको अपने जरूरी काम निपटाने के लिए आसपास के क्षेत्र में जाना पड़ रहा है। यदि कृषि लाइन पर ही पैट ट्रांसफार्मर लगा दिया जाता तो समस्या से निजात मिल सकती थी। लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।      
-------------------      
वर्जन-      
हमारी ढाणी ही नहीं यहां पर कई ढाणियों में बिजली नहीं आ रही है। इसके चलते जरूरी कामों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बिजली अधिकारियों को हमने कुछ दिन पहले ही 70 बिजली बिल जमा करवाकर आए थे। लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।      
-गिरवर यादव, किसान      
---------------      
बिजली नहीं आने से हमारे बच्चे इस चिलचिलाती गर्मी में बीमार पड़ रहे हैं। हमारी समस्या की सुनवाई के लिए किसी के पास समय नहीं है। अधिकारियों से लेकर नेताओं तक गुहार लगा चुके हैं। बावजूद इसके ढाक के तीन पात हैं। किसी ने बताया था कि ग्रीवेंट कमेटी में समाधान हो जाएगा। लेकिन यहां पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई। सालों से हमें कोई देखने वाला नहीं है।      
-जगदीश, ढाणी निवासी      
--------------      
कई सालों से अधिकारियों के चक्कर काट-काट कर थक चुके हैं। एक ओर सरकार हर घर तक बिजली पहुंचाने का दावा कर रही है। दूसरी ओर हमारे घरों में बल्ब तक नहीं जल पा रहा है। हमारे बच्चे अपने स्कूल का काम तक पूरा नहीं कर पाते हैं। निगम के अधिकारी से मिले थे। उन्होंने दस दिन में समाधान करने का आश्वासन दिया था। लेकिन कुछ नहीं हुआ।      
मुरली, डहीना की ढाणी निवासी      
---      
लाइनमैन से लेकर अधीक्षण अभियंता से गुहार लगाने के बाद कुछ दिन पहले ही ग्रीवेंस कमेटी में संसदीय सचिव श्याम सिंह राणा के सामने समस्या रखी थी। समाधान किया जाएगा यह कहकर आवेदन रख लिया गया था। आज तक उस पर कोई सुनवाई नहीं हुई। हम सात सालों से बिजली के लिए धक्के खा रहे हैं। कोई हमारी नहीं सुन रहा है।      

 बुधराम यादव, शिकायत कर्ता      
------------      
यदि पचास से ज्यादा घर हैं तो एग्रीकल्चर लाइन पर पैट ट्रांसफार्मर लगाकर ढाणियों में बिजली देने का प्रावधान है। सोमवार को ग्रामीणों को बुलाया है। जल्द ही एस्टीमेट बनाकर उच्चाधिकारियों के पास भेजा जाएगा। उम्मीद है कि जल्द ही समाधान होगा।      
श्रीनिवास, एसडीओ, बुडोली बिजली निगम
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed