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Rewari News: कम बारिश से नर्सरी कारोबार पर पड़ा असर
Wed, 16 Sep 2026 11:12 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 16 Sep 2026 11:12 PM IST
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कोर्ट रोड स्थित नर्सरी में पौधे खरीदने पहुंचे ग्राहक। संवाद
रेवाड़ी। मानसून सीजन में इस बार औसत से कम बारिश होने का असर नर्सरी के कारोबार पर पड़ा है। जुलाई से सितंबर तक का समय पौधरोपण के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। हर साल इस दौरान नर्सरियों में पौधों की अधिक मांग रहती है, लेकिन इस बार बारिश कम होने के कारण लोगों ने पौधों की कम मांग रही। इससे नर्सरी संचालकों को नुकसान उठाना पड़ा है।
नर्सरी संचालकों के अनुसार मानसून शुरू होने से पहले ही बड़ी संख्या में विभिन्न प्रजातियों के पौधे तैयार कर लिए गए थे। इनमें फलदार, छायादार, सजावटी और औषधीय पौधे शामिल थे। उम्मीद थी कि जुलाई से सितंबर तक इनकी बिक्री बढ़ेगी और अधिकांश स्टॉक निकल जाएगा।
मानसून में पर्याप्त बारिश नहीं होने से पौधरोपण का काम प्रभावित रहा। लोगों ने पौधों की कम खरीदारी की। नर्सरी संचालकों का कहना है कि पौधरोपण के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी होना जरूरी है। बारिश कम होने की स्थिति में पौधे लगाने के बाद उनकी नियमित सिंचाई करनी पड़ती है।
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ऐसे में कई लोग पौधे लगाने का काम टाल देते हैं। इसका सीधा असर नर्सरियों में पौधों की मांग पर पड़ा है। 1 जून से अब तक 372 एमएम बारिश हुई है, जबकि औसत 405 एमएम बारिश होनी चाहिए थी।
स्टॉक नहीं निकलने से बढ़ी चिंता
अनाज मंडी के समीप स्थित नर्सरी के संचालक वीनू ने बताया कि मानसून सीजन को ध्यान में रखते हुए पहले ही बड़ी संख्या में पौधों का स्टॉक तैयार कर लिया गया था। इस बार मांग कम रहने के कारण काफी संख्या में पौधे नर्सरियों में ही रह गए हैं। बिक्री प्रभावित होने के साथ पौधों की देखभाल पर अतिरिक्त खर्च भी बढ़ रहा है। वहीं, कोर्ट रोड स्थित नर्सरी संचालक कमल ने बताया कि इस बार मानसून सीजन में कारोबार उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। आमतौर पर जुलाई से सितंबर के बीच पौधों की बिक्री बढ़ जाती है, लेकिन इस बार कम बारिश के कारण मांग प्रभावित हुई। उन्होंने बताया कि नर्सरी संचालकों को अब आगामी मौसम में पौधों की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।
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नर्सरी संचालकों के अनुसार मानसून शुरू होने से पहले ही बड़ी संख्या में विभिन्न प्रजातियों के पौधे तैयार कर लिए गए थे। इनमें फलदार, छायादार, सजावटी और औषधीय पौधे शामिल थे। उम्मीद थी कि जुलाई से सितंबर तक इनकी बिक्री बढ़ेगी और अधिकांश स्टॉक निकल जाएगा।
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मानसून में पर्याप्त बारिश नहीं होने से पौधरोपण का काम प्रभावित रहा। लोगों ने पौधों की कम खरीदारी की। नर्सरी संचालकों का कहना है कि पौधरोपण के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी होना जरूरी है। बारिश कम होने की स्थिति में पौधे लगाने के बाद उनकी नियमित सिंचाई करनी पड़ती है।
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ऐसे में कई लोग पौधे लगाने का काम टाल देते हैं। इसका सीधा असर नर्सरियों में पौधों की मांग पर पड़ा है। 1 जून से अब तक 372 एमएम बारिश हुई है, जबकि औसत 405 एमएम बारिश होनी चाहिए थी।
स्टॉक नहीं निकलने से बढ़ी चिंता
अनाज मंडी के समीप स्थित नर्सरी के संचालक वीनू ने बताया कि मानसून सीजन को ध्यान में रखते हुए पहले ही बड़ी संख्या में पौधों का स्टॉक तैयार कर लिया गया था। इस बार मांग कम रहने के कारण काफी संख्या में पौधे नर्सरियों में ही रह गए हैं। बिक्री प्रभावित होने के साथ पौधों की देखभाल पर अतिरिक्त खर्च भी बढ़ रहा है। वहीं, कोर्ट रोड स्थित नर्सरी संचालक कमल ने बताया कि इस बार मानसून सीजन में कारोबार उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। आमतौर पर जुलाई से सितंबर के बीच पौधों की बिक्री बढ़ जाती है, लेकिन इस बार कम बारिश के कारण मांग प्रभावित हुई। उन्होंने बताया कि नर्सरी संचालकों को अब आगामी मौसम में पौधों की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।