{"_id":"5828c1184f1c1b4709b384a5","slug":"rewari-news-holiday-tension-rupees-atm-bank-housfull","type":"story","status":"publish","title_hn":"छुट्टी को रुपये की टेंशन: एटीएम फ्लाप, बैंक हाउस फुल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छुट्टी को रुपये की टेंशन: एटीएम फ्लाप, बैंक हाउस फुल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 14 Nov 2016 01:08 AM IST
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रेवाड़ी में लोगों का संडे यानी फन-डे भी पांच और एक हजार की करेंसी की भेंट चढ़ गया। शहर के 32 बैंकों की 186 शाखाओं में दिनभर नकदी जमा कराने और निकालने वाले लोगों की भीड़ लगी रही। सरकारी कार्यालयों में पुरानी करेंसी से बिल अदा करने वालों की भी भीड़ रही। बैंकों के पास में ही बने एटीएम बूथ भी कैश के अभाव में खाली रहे। लोगों का संडे बैंकों के आगे लाइन में ही निकल गया। बैंक के सूत्रों के अनुसार रविवार को भी 350 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम विभिन्न बैंकों में जमा होने का अनुमान है।
एसबीआई और पीएनबी में सबसे ज्यादा भीड़
जिले में एसबीआई और पीएनबी में सबसे ज्यादा बैंक खाताधारकों की भीड़ दिखाई दी। इसके पीछे कारण के तौर पर इन दोनों बैंकों में खाताधारकों की ज्यादा संख्या बताई जा रही है। सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक में भी बड़ी संख्या में लोग नजर आए। पीएनबी के जिले में सबसे ज्यादा खाताधारक हैं। इस बैंक में रात आठ बजे तक कामकाज होता है। वहीं सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक की 46 और एसबीएआई की 12 शाखाएं हैं।
एक दिन में पौने छह लाख की रिकवरी
रेवाड़ी। करेंसी चेंज करने के बाद केवल सरकारी महकमों के जरिए ही स्वीकार किए जाने के पीएम मोदी के फरमान के चलते सरकारी महकमों की पौ बारह हो गई है। जिन महकमों में लोग या तो रेंट देते ही नहीं थे और यदि देते भी थे तो नाममात्र का, उन विभागों मेें लाखों रुपये रेंट या विभिन्न शुल्क के तौर पर जमा हो रहे हैं। खास तौर पर पुरानी करेंसी दोबारा लेने के लिए शुरू होने के बाद कुछ विभागों की महीने भर में होने वाली इनकम से ज्यादा शुल्क एक ही दिन में जमा हो गया है। नगर परिषद में तो करीब पौने छह करोड़ रुपये दुकानों के रेंट के तौर पर एक ही दिन में जमा हुए। आमतौर पर महीने भर में लोग चार लाख रुपये तक ही किराया परिषद में जमा कराते हैं।
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एटीएम न होते बीमार तो लोग न होते लाचार
वित्त मंत्री ने भले ही खराब एटीएम के जल्द ही ठीक होने का आश्वासन दिया है लेकिन जिले में 32 बैंकों की 186 शाखाओं की 800 से भी ज्यादा एटीएम होने के बावजूद लोगों को कैश नहीं मिल रहा है। लोग एटीएम पर टैंपरेरी आउट ऑफ सर्विस लगे बोर्ड देखने को मजबूर हैं। औसत आठ एटीएम बूथ में से एक एटीएम बूथ किसी न किसी कारण काम नहीं कर रहा है। ऐसे में शेष बचे एटीएम बूथ पर लोड तो बढ़ता ही है। साथ में जिन 100 एटीएम बूथ पर करेंसी पड़ती है वह भी बिना पड़े ही वापस चली जाती है। अमर उजाला ने सामान्य हालातों में भी एटीएम के काम न करने पर होने वाली परेशानी को 29 और 30 अगस्त को प्रमुखता से उठाया था, बावजूद इसके कई बैंकों के अधिकारियों ने संज्ञान नहीं लिया। जिसका खामियाजा आज शहर की जनता उठा रही है।
...तो नहीं काम आते 8.80 करोड़ रुपये
फर्ज करें जिले में चल रहे एटीएम बूथ में से 100 बूथ किन्हीं कारणों से काम नहीं कर रहे हों तो ऐसे में स्थानीय जनता सीधे तौर पर प्रभावित होती है। इस कंडीशन में 8.80 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन नहीं हो पाता है। मशीन खराब होने की स्थिति में रुपये नहीं डाले जाते और अगर मशीन खराब है और सर्वर ठीक तो भी इतनी रकम नहीं निकल पाती है। दो हजार रुपये अधिकतम निकाली जाने वाली राशि के हिसाब से ही सोचें तो 44 हजार लोग रुपये नहीं निकाल पाते हैं।
एसबीआई और पीएनबी में सबसे ज्यादा भीड़
जिले में एसबीआई और पीएनबी में सबसे ज्यादा बैंक खाताधारकों की भीड़ दिखाई दी। इसके पीछे कारण के तौर पर इन दोनों बैंकों में खाताधारकों की ज्यादा संख्या बताई जा रही है। सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक में भी बड़ी संख्या में लोग नजर आए। पीएनबी के जिले में सबसे ज्यादा खाताधारक हैं। इस बैंक में रात आठ बजे तक कामकाज होता है। वहीं सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक की 46 और एसबीएआई की 12 शाखाएं हैं।
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एक दिन में पौने छह लाख की रिकवरी
रेवाड़ी। करेंसी चेंज करने के बाद केवल सरकारी महकमों के जरिए ही स्वीकार किए जाने के पीएम मोदी के फरमान के चलते सरकारी महकमों की पौ बारह हो गई है। जिन महकमों में लोग या तो रेंट देते ही नहीं थे और यदि देते भी थे तो नाममात्र का, उन विभागों मेें लाखों रुपये रेंट या विभिन्न शुल्क के तौर पर जमा हो रहे हैं। खास तौर पर पुरानी करेंसी दोबारा लेने के लिए शुरू होने के बाद कुछ विभागों की महीने भर में होने वाली इनकम से ज्यादा शुल्क एक ही दिन में जमा हो गया है। नगर परिषद में तो करीब पौने छह करोड़ रुपये दुकानों के रेंट के तौर पर एक ही दिन में जमा हुए। आमतौर पर महीने भर में लोग चार लाख रुपये तक ही किराया परिषद में जमा कराते हैं।
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एटीएम न होते बीमार तो लोग न होते लाचार
वित्त मंत्री ने भले ही खराब एटीएम के जल्द ही ठीक होने का आश्वासन दिया है लेकिन जिले में 32 बैंकों की 186 शाखाओं की 800 से भी ज्यादा एटीएम होने के बावजूद लोगों को कैश नहीं मिल रहा है। लोग एटीएम पर टैंपरेरी आउट ऑफ सर्विस लगे बोर्ड देखने को मजबूर हैं। औसत आठ एटीएम बूथ में से एक एटीएम बूथ किसी न किसी कारण काम नहीं कर रहा है। ऐसे में शेष बचे एटीएम बूथ पर लोड तो बढ़ता ही है। साथ में जिन 100 एटीएम बूथ पर करेंसी पड़ती है वह भी बिना पड़े ही वापस चली जाती है। अमर उजाला ने सामान्य हालातों में भी एटीएम के काम न करने पर होने वाली परेशानी को 29 और 30 अगस्त को प्रमुखता से उठाया था, बावजूद इसके कई बैंकों के अधिकारियों ने संज्ञान नहीं लिया। जिसका खामियाजा आज शहर की जनता उठा रही है।
...तो नहीं काम आते 8.80 करोड़ रुपये
फर्ज करें जिले में चल रहे एटीएम बूथ में से 100 बूथ किन्हीं कारणों से काम नहीं कर रहे हों तो ऐसे में स्थानीय जनता सीधे तौर पर प्रभावित होती है। इस कंडीशन में 8.80 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन नहीं हो पाता है। मशीन खराब होने की स्थिति में रुपये नहीं डाले जाते और अगर मशीन खराब है और सर्वर ठीक तो भी इतनी रकम नहीं निकल पाती है। दो हजार रुपये अधिकतम निकाली जाने वाली राशि के हिसाब से ही सोचें तो 44 हजार लोग रुपये नहीं निकाल पाते हैं।