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हरियाणवी सिनेमा को प्रोत्साहन दे सरकार : भाटोटिया
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 06 Jul 2016 12:44 AM IST
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सिनेमा
- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणवी सिनेमा की संरक्षण एवं संर्वधनन के लिए प्रदेश सरकार को अपनी बेरुखी तोड़नी होगी। सरकारी प्रोत्साहन के साथ हरियाणवी सिनेमा के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजा जा सकता है। यह बात अभिनेता एवं वरिष्ठ रंगकर्मी विजय भाटोटिया ने मंगलवार संस्था परिवर्तन की तरफ से आयोजित विचार गोष्ठी में बतौर मुख्यवक्ता बोल रहे थे।
गोष्ठी में गत चार दशकों के दौरान बनी करीब पांच दर्जन हरियाणवी फिल्मों के बहुआयामी पक्षों पर विस्तृत चर्चा की गई। हरियाणवी सिनेमा : दशा एवं दिशा नामक विषय पर आयोजित इस गोष्ठी में बोलते हुए विजय भाटोटिया ने एक ओर जहां प्रदेश सरकारों द्वारा हरियाणवी सिनेमा की उपेक्षा को रेखांकित किया वहीं सिनेमा से जुड़े विभिन्न पक्षों कहानी, पटकथा, गीत, संगीत, वेशभूषा एवं निर्देशन पक्ष पर भी प्रकाश डाला। बलदेव राजपूत ने कहा कि सिनेमा समाज का आईना होता है तथा हरियाणवी सिनेमा अभी मरा नहीं है, तड़प रहा है, जिसे कला संस्कृति एवं सरकार को बचाना होगा। डा. सुरेंद्र आर्य ने हरियाणवी सिनेमा की वर्तमान दशा एवं दिशा से जुड़े कारणों पर प्रकाश डाला तथा उनके निवारण के लिए प्रेरक सुझाव दिए। रणजीत सिंह यादव ने कहा कि प्रदेश की माटी की सोंधी महक पटकथा, गीत-संगीत, अभिनय तथा निर्देशन में नजर आने पर हरियाणवी सिनेमा के दिन बहुरेंगे। इस मौके पर सत्यवीर नाहड़िया, प्रो. रमेश चंद शर्मा, विपिन सुनेजा, ऋषि सिंहल, गोपाल वशिष्ठ, खूबराम सैनी, श्रीपति सिंह, गीता शर्मा आदि ने भी अपने सुझाव रखे।
गोष्ठी में गत चार दशकों के दौरान बनी करीब पांच दर्जन हरियाणवी फिल्मों के बहुआयामी पक्षों पर विस्तृत चर्चा की गई। हरियाणवी सिनेमा : दशा एवं दिशा नामक विषय पर आयोजित इस गोष्ठी में बोलते हुए विजय भाटोटिया ने एक ओर जहां प्रदेश सरकारों द्वारा हरियाणवी सिनेमा की उपेक्षा को रेखांकित किया वहीं सिनेमा से जुड़े विभिन्न पक्षों कहानी, पटकथा, गीत, संगीत, वेशभूषा एवं निर्देशन पक्ष पर भी प्रकाश डाला। बलदेव राजपूत ने कहा कि सिनेमा समाज का आईना होता है तथा हरियाणवी सिनेमा अभी मरा नहीं है, तड़प रहा है, जिसे कला संस्कृति एवं सरकार को बचाना होगा। डा. सुरेंद्र आर्य ने हरियाणवी सिनेमा की वर्तमान दशा एवं दिशा से जुड़े कारणों पर प्रकाश डाला तथा उनके निवारण के लिए प्रेरक सुझाव दिए। रणजीत सिंह यादव ने कहा कि प्रदेश की माटी की सोंधी महक पटकथा, गीत-संगीत, अभिनय तथा निर्देशन में नजर आने पर हरियाणवी सिनेमा के दिन बहुरेंगे। इस मौके पर सत्यवीर नाहड़िया, प्रो. रमेश चंद शर्मा, विपिन सुनेजा, ऋषि सिंहल, गोपाल वशिष्ठ, खूबराम सैनी, श्रीपति सिंह, गीता शर्मा आदि ने भी अपने सुझाव रखे।
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