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Rewari News: मुनाफा देने की जगह किसानों के लिए मुसीबत बने पोली हाउस
Tue, 09 Apr 2024 01:42 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 09 Apr 2024 01:42 AM IST
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रेवाड़ी। कोसली क्षेत्र में बनाया गया पोली हाउस। संवाद
जगदीश यादव
कोसली। क्षेत्र में किसानों को सब्सिडी देकर बनवाए गए पोली हाउस से आम किसानों का मोह भंग हो गया। किसानों का मानना है कि लाखों रुपये लगाकर तैयार करवाए गए पोली हाउस उनके लिए घाटे का सौदा रहा। शुरुआती दौर में क्षेत्र के किसानों को सब्सिडी देकर पोली हाउस तैयार करवाए गए थे। मगर पोली हाउस की बजाय अपनी पारंपरिक तरीके की खेती पर ही आ गए हैं।
कोसली क्षेत्र के गांव झोलरी के किसान श्याम सुंदर ने बताया कि क्षेत्र में किसानों को होर्टिकल्चर विभाग ने अच्छा लाभ देने का लालच देकर 60 से 90 प्रतिशत सब्सिडी पर किसानों के खेतों में पोली हाउस बनवा दिए। किसानों को शुरुआती दौर में पोली हाउस में तैयार सब्जी के उच्च भाव के साथ मात्र कुछ लाख में पाली हाउस लगवाए गए।
विभाग ने न केवल किसानों को सब्सिडी का लालच दिया बल्कि उन्हें कहा कि चंद सालों में पोली हाउस में सब्जी उगाकर मालामाल हो जाएंगे। पोली हाउस में तैयार सब्जी के न केवल ऊंचे भाव मिलेंगे बल्कि सब्जी की गुणवत्ता भी अच्छी होगी। किसानों ने अपनी जेब से लाखों रुपये खर्च करके पोली हाउस तैयार करवाया। जब सब्जी तैयार करके बाजार में पहुंचे तो उन्हें लागत मूल्य पर भी खरीदने वाला नहीं मिला, जिसके कारण किसान न केवल आर्थिक रूप से कमजोर हो गए बल्कि घाटे से उभरने के लिए उन्हें कोई साधन दिखाई नहीं दे रहा।
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एक एकड़ पाेली हाउस पर लाखों रुपये खर्च
किसान श्याम सुंदर ने बताया कि एक एकड़ में पोली हाउस को तैयार करने पर लगभग 10 लाख रुपए खर्च आता है जिसमें से किसान को 3 लाख के लगभग अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है। किसान द्वारा खर्च किया पैसा भी उसे वापस मिलता नहीं दिखाई दे रहा है, जिसके चलते पाेली हाउस लगाने वाले क्षेत्र के किसान आर्थिक रूप से कंगाली के कगार पर पहुंच गया।
5 साल नहीं उखाड़ सकते पाेली हाउस
क्षेत्र के उन किसानों के लिए पोली हाउस मुसीबत बना हुआ है जिन किसानों के पास एक या दो एकड़ जमीन थी। ऐसे अधिकतर किसानों ने पोली हाउस तैयार करवा दिया। अब विभाग ना तो उसको हटाने दे रहा है और न ही उसमें कोई अन्य खेती कर पा रहे हैं, जिसके कारण किसान घाटे के साथ-साथ खाने का अनाज भी नहीं उगा पा रहा है। जो किसान पाेली हाउस को 5 साल से पहले उखाड़ता है तो उसके लिए समस्या हो जाती है।
बंद हो गए सभी पाेली हाउस
क्षेत्र के गांव मंदोला लोहाना, रवाना, कोसली, सहादत्तनगर, झोलरी आदि गांव में लगाए गए पोली हाउस एक-एक कर किसानों ने बंद कर दिए। किसानों का मानना है कि महंगे बीज, महंगी दवाइयां व महंगा जैविक खाद डालने के बाद किसानों को लाभ तो दूर लागत मूल्य भी लेने के लिए पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। अड़चन के चलते पाेली हाउस उखाड़ नहीं सकते लेकिन उन्हें बंद कर देना ही उचित समझा।
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किसान मेहनत करें तो पोली हाउस में उगाई सब्जी से खासा लाभ मिल सकता है। ज्यादातर किसानों का एक ही मकसद होता है कि किसी भी तरह से सरकार द्वारा दी गई सब्सिडी का गलत तरीके से इस्तेमाल कर लिया जाए। पोली हाउस में उगाई सब्जी स्वादिष्ट होती है।
-डॉक्टर प्रविन्द्र कुमार, बागवानी विभाग
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कोसली। क्षेत्र में किसानों को सब्सिडी देकर बनवाए गए पोली हाउस से आम किसानों का मोह भंग हो गया। किसानों का मानना है कि लाखों रुपये लगाकर तैयार करवाए गए पोली हाउस उनके लिए घाटे का सौदा रहा। शुरुआती दौर में क्षेत्र के किसानों को सब्सिडी देकर पोली हाउस तैयार करवाए गए थे। मगर पोली हाउस की बजाय अपनी पारंपरिक तरीके की खेती पर ही आ गए हैं।
कोसली क्षेत्र के गांव झोलरी के किसान श्याम सुंदर ने बताया कि क्षेत्र में किसानों को होर्टिकल्चर विभाग ने अच्छा लाभ देने का लालच देकर 60 से 90 प्रतिशत सब्सिडी पर किसानों के खेतों में पोली हाउस बनवा दिए। किसानों को शुरुआती दौर में पोली हाउस में तैयार सब्जी के उच्च भाव के साथ मात्र कुछ लाख में पाली हाउस लगवाए गए।
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विभाग ने न केवल किसानों को सब्सिडी का लालच दिया बल्कि उन्हें कहा कि चंद सालों में पोली हाउस में सब्जी उगाकर मालामाल हो जाएंगे। पोली हाउस में तैयार सब्जी के न केवल ऊंचे भाव मिलेंगे बल्कि सब्जी की गुणवत्ता भी अच्छी होगी। किसानों ने अपनी जेब से लाखों रुपये खर्च करके पोली हाउस तैयार करवाया। जब सब्जी तैयार करके बाजार में पहुंचे तो उन्हें लागत मूल्य पर भी खरीदने वाला नहीं मिला, जिसके कारण किसान न केवल आर्थिक रूप से कमजोर हो गए बल्कि घाटे से उभरने के लिए उन्हें कोई साधन दिखाई नहीं दे रहा।
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एक एकड़ पाेली हाउस पर लाखों रुपये खर्च
किसान श्याम सुंदर ने बताया कि एक एकड़ में पोली हाउस को तैयार करने पर लगभग 10 लाख रुपए खर्च आता है जिसमें से किसान को 3 लाख के लगभग अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है। किसान द्वारा खर्च किया पैसा भी उसे वापस मिलता नहीं दिखाई दे रहा है, जिसके चलते पाेली हाउस लगाने वाले क्षेत्र के किसान आर्थिक रूप से कंगाली के कगार पर पहुंच गया।
5 साल नहीं उखाड़ सकते पाेली हाउस
क्षेत्र के उन किसानों के लिए पोली हाउस मुसीबत बना हुआ है जिन किसानों के पास एक या दो एकड़ जमीन थी। ऐसे अधिकतर किसानों ने पोली हाउस तैयार करवा दिया। अब विभाग ना तो उसको हटाने दे रहा है और न ही उसमें कोई अन्य खेती कर पा रहे हैं, जिसके कारण किसान घाटे के साथ-साथ खाने का अनाज भी नहीं उगा पा रहा है। जो किसान पाेली हाउस को 5 साल से पहले उखाड़ता है तो उसके लिए समस्या हो जाती है।
बंद हो गए सभी पाेली हाउस
क्षेत्र के गांव मंदोला लोहाना, रवाना, कोसली, सहादत्तनगर, झोलरी आदि गांव में लगाए गए पोली हाउस एक-एक कर किसानों ने बंद कर दिए। किसानों का मानना है कि महंगे बीज, महंगी दवाइयां व महंगा जैविक खाद डालने के बाद किसानों को लाभ तो दूर लागत मूल्य भी लेने के लिए पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। अड़चन के चलते पाेली हाउस उखाड़ नहीं सकते लेकिन उन्हें बंद कर देना ही उचित समझा।
किसान मेहनत करें तो पोली हाउस में उगाई सब्जी से खासा लाभ मिल सकता है। ज्यादातर किसानों का एक ही मकसद होता है कि किसी भी तरह से सरकार द्वारा दी गई सब्सिडी का गलत तरीके से इस्तेमाल कर लिया जाए। पोली हाउस में उगाई सब्जी स्वादिष्ट होती है।
-डॉक्टर प्रविन्द्र कुमार, बागवानी विभाग