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पब्लिक यूटिलिटी कोर्ट में सुनवाई आज, राहत की उम्मीद
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रेवाड़ी। दशकों से यह शहर समस्याओं से जूझ रहा है। मार्च 2019 में इन समस्याओं को हल करने की गुहार पब्लिक यूटीलिटी कोर्ट में पहुंची। उसके बाद आधा दर्जन वाद इस कोर्ट के विचाराधीन हैं। कोर्ट के सामने अधिकारियों ने सच कबूला, मगर जमीन पर काम करने में विभागों की लापरवाही दिखाने के बाद आज आलम यह है कि समस्याएं जस की तस हैं। करीब आधा दर्जन वादों को लेकर उक्त कोर्ट में अगली सुनवाई 8 अगस्त को होने जा रही है।
इसमें बंदरों को पकड़ने का मामला, ट्रैफिक लाइट, सेक्टर 4 की सड़क, हाउसिंग बोर्ड के पार्क के रखरखाव, शहर में अतिक्रमण, वाहन पार्किंग का मामला आदि शामिल हैं। इन वादों की पैरवी से जुड़े सुनील भार्गव एडवोकेट का कहना है कि ये सभी जनहित से जुड़े मुद्दे हैं, जिन पर सुनवाई अदालत में चल रही है। ट्रैफिक लाइटों के मामले में कोर्ट में डीएमसी को नोटिस जारी करके तलब किए जाने के बाद यह मामला गंभीर हो गया। 12 अप्रैल 2019 को मामले में डीएमसी को नोटिस जारी हुए। बीच में कोरोना काल आने की वजह से यह मामला भी सिरे तक नहीं पहुंच सका। मामले में नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी की मौजूदगी में नप के एक कनिष्ठ अभियंता ने अपना पक्ष रखा। डीएसपी हंसराज की मौजूदगी में शहर यातायात प्रभारी बहादुर सिंह ने कोर्ट में जल्द ट्रैफिक लाइटों को पुलिस विभाग के सुपुर्द करने बारे लिखित नोट दिया। उधर नप के कनिष्ठ अभियंता ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग की ओर से इन ट्रैफिक लाइटों को सुचारू हालत में पुलिस महकमे के सुपुर्द कर दिए जाने का बयान दिया। मगर अब कोर्ट पुन: 8 अगस्त को इस मामले में अगली सुनवाई करेगी।
बजाजा बाजार के प्रधान दीपेश भार्गव, पार्षद भूपेंद्र गुप्ता एडवोकेट, सुनील भार्गव एडवोकेट, नीरज ने कहा कि अधिकारियों को संवेदनशील होकर ट्रैफिक लाइटें सही करवानी चाहिए। साथ ही बेसहारा पशुओं, बंदरों, यातायात जाम और अतिक्रमण की समस्या का जल्द समाधान कराने चाहिए। जनसमस्याओं को लेकर आवाज उठाई जा रही है। पब्लिक यूटीलिटी कोर्ट में वाद दायर करने का मकसद भी नगर परिषद के अधिकारियों की इन समस्याओं के समाधान के प्रति जिम्मेदारी तय करना है। सभी मामले में कोर्ट से हल मिलने पर जनता को राहत जरूर मिलेगी।
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कोट
- सभी पार्कों का टेंडर दे दिया है। एक्शन के लिए आदेश दे दिया गया कि प्रत्येक पार्क के हिसाब से कर्मचारी लोगों से मिलकर काम करें। चेक करें और अपनी रिपोर्ट दें। लाइटों, पशु पकड़ने का टेंडर दिया हुआ है। अधिकारियों को जनता की सुविधा के अनुसार सही से काम करना चाहिए।
- पूनम यादव, चेयरपर्सन नप रेवाड़ी।
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इसमें बंदरों को पकड़ने का मामला, ट्रैफिक लाइट, सेक्टर 4 की सड़क, हाउसिंग बोर्ड के पार्क के रखरखाव, शहर में अतिक्रमण, वाहन पार्किंग का मामला आदि शामिल हैं। इन वादों की पैरवी से जुड़े सुनील भार्गव एडवोकेट का कहना है कि ये सभी जनहित से जुड़े मुद्दे हैं, जिन पर सुनवाई अदालत में चल रही है। ट्रैफिक लाइटों के मामले में कोर्ट में डीएमसी को नोटिस जारी करके तलब किए जाने के बाद यह मामला गंभीर हो गया। 12 अप्रैल 2019 को मामले में डीएमसी को नोटिस जारी हुए। बीच में कोरोना काल आने की वजह से यह मामला भी सिरे तक नहीं पहुंच सका। मामले में नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी की मौजूदगी में नप के एक कनिष्ठ अभियंता ने अपना पक्ष रखा। डीएसपी हंसराज की मौजूदगी में शहर यातायात प्रभारी बहादुर सिंह ने कोर्ट में जल्द ट्रैफिक लाइटों को पुलिस विभाग के सुपुर्द करने बारे लिखित नोट दिया। उधर नप के कनिष्ठ अभियंता ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग की ओर से इन ट्रैफिक लाइटों को सुचारू हालत में पुलिस महकमे के सुपुर्द कर दिए जाने का बयान दिया। मगर अब कोर्ट पुन: 8 अगस्त को इस मामले में अगली सुनवाई करेगी।
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बजाजा बाजार के प्रधान दीपेश भार्गव, पार्षद भूपेंद्र गुप्ता एडवोकेट, सुनील भार्गव एडवोकेट, नीरज ने कहा कि अधिकारियों को संवेदनशील होकर ट्रैफिक लाइटें सही करवानी चाहिए। साथ ही बेसहारा पशुओं, बंदरों, यातायात जाम और अतिक्रमण की समस्या का जल्द समाधान कराने चाहिए। जनसमस्याओं को लेकर आवाज उठाई जा रही है। पब्लिक यूटीलिटी कोर्ट में वाद दायर करने का मकसद भी नगर परिषद के अधिकारियों की इन समस्याओं के समाधान के प्रति जिम्मेदारी तय करना है। सभी मामले में कोर्ट से हल मिलने पर जनता को राहत जरूर मिलेगी।
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कोट
- सभी पार्कों का टेंडर दे दिया है। एक्शन के लिए आदेश दे दिया गया कि प्रत्येक पार्क के हिसाब से कर्मचारी लोगों से मिलकर काम करें। चेक करें और अपनी रिपोर्ट दें। लाइटों, पशु पकड़ने का टेंडर दिया हुआ है। अधिकारियों को जनता की सुविधा के अनुसार सही से काम करना चाहिए।
- पूनम यादव, चेयरपर्सन नप रेवाड़ी।