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9.70 लाख की लूट थी ड्रामा, पुलिस को किया गुमराह
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Sat, 30 Apr 2016 12:53 AM IST
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राजीव चौक के पास बीती बुधवार की शाम बताई गई 9.70 रुपये की लूट की वारदात वाकई में हुई ही नहीं थी। कार सवार युवकों ने मारपीट की वारदात को लाखों रुपये की लूट की झूठी कहानी का रूप दिया और थाने में मुकदमा भी दर्ज करा दिया। डीएसपी संजीव बल्हारा ने मामले का खुलासा करते हुए साफ किया कि वाकई में ऐसा कुछ था ही नहीं।
पुलिस कंट्रोल रूम पर दी गई सूचना में महज मारपीट बताई गई, जबकि ट्रामा सेंटर में लूट की वारदात को जोड़ दिया गया। पुलिस झूठी शिकायत कर पुलिस को गुमराह करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में जुटी है। बता दें कि अलवर के गांव करीरीवास निवासी योगेश ने राजीव चौक के पास 27 अप्रैल की शाम टेंपो सवार बदमाशों द्वारा ईंट मारकर उसे व दोस्त रविंद्र को घायल करने व कार में रखे 9.70 लाख रुपये लूटने का मुकदमा मॉडल टाउन थाने में दर्ज कराया था। पुलिस से पूछताछ में योगेश ने नकदी कार से बरामद होने की बात स्वीकार भी की है।
एक ऑटो राजस्थान, दूसरा भिवानी में पड़ा था खराब
डीएसपी क्राइम संजीव बल्हारा ने बताया कि जांच में ही पता चला कि शिकायत में जिन ऑटों नंबर को दर्शाया गया था उनमें से एक ऑटों लोडिंग है और राजस्थान में है तथा दूसरा भिवानी में खराब हालत में खड़ा हुआ है। पुलिस द्वारा की गई गहन जांच को देखते हुए घटना के अगले ही दिन शिकायतकर्ता योगेश ने पुलिस को लिखित में बयान दर्ज कराते हुए बताया कि हमारे पैसे गाड़ी की सीट के नीचे से ही मिल गए हैं। फिर भी पुलिस ने इस मामले में मारपीट करने वाले बिठवाना निवासी प्रीतम उर्फ शुशा व विवेक उर्फ विक्की दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
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बावल में 94 हजार रुपये लूट की कहानी भी थी फर्जी
सिर्फ राजीव चौक की ही नहीं बल्कि राजीव नगर में 15 अप्रैल को 94 हजार रुपये लूटने का बावल थाने में दर्ज मुकदमा भी झूठा मिला है। डीएसपी क्राइम ने बताया कि बावल थाना क्षेत्र के गांव खेड़ी डालू निवासी एसबीआई के कमीशन एजेंट संजय सिंह के कर्मी प्रवीन ने 15 अप्रैल को बैंक में जमा कराने के लिए दी गई 94 हजार रुपये छीने जाने का मुकदमा बावल थाने में दर्ज कराया था।
प्रवीन ने बयान में बताया था कि चांदूवास के नजदीक सर्विस रोड पर बाइक सवार तीन युवकों ने लात मारकर उसकी बाइक गिरा मारपीट करते हुए 94 हजार रुपये छीन लिये। पुलिस द्वारा घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेजों की जांच की तो मामला संदिग्ध दिखा। मामले में बाद में शिकायतकर्ता ने लिखित में बयान दिया कि पुलिस को गुमराह करते हुए झूठी शिकायत दर्ज कराई गई थी। वहीं संजय ने भी जो नोट दिये थे वही वापस मिलने की बात कही है।
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पुलिस कंट्रोल रूम पर दी गई सूचना में महज मारपीट बताई गई, जबकि ट्रामा सेंटर में लूट की वारदात को जोड़ दिया गया। पुलिस झूठी शिकायत कर पुलिस को गुमराह करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में जुटी है। बता दें कि अलवर के गांव करीरीवास निवासी योगेश ने राजीव चौक के पास 27 अप्रैल की शाम टेंपो सवार बदमाशों द्वारा ईंट मारकर उसे व दोस्त रविंद्र को घायल करने व कार में रखे 9.70 लाख रुपये लूटने का मुकदमा मॉडल टाउन थाने में दर्ज कराया था। पुलिस से पूछताछ में योगेश ने नकदी कार से बरामद होने की बात स्वीकार भी की है।
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एक ऑटो राजस्थान, दूसरा भिवानी में पड़ा था खराब
डीएसपी क्राइम संजीव बल्हारा ने बताया कि जांच में ही पता चला कि शिकायत में जिन ऑटों नंबर को दर्शाया गया था उनमें से एक ऑटों लोडिंग है और राजस्थान में है तथा दूसरा भिवानी में खराब हालत में खड़ा हुआ है। पुलिस द्वारा की गई गहन जांच को देखते हुए घटना के अगले ही दिन शिकायतकर्ता योगेश ने पुलिस को लिखित में बयान दर्ज कराते हुए बताया कि हमारे पैसे गाड़ी की सीट के नीचे से ही मिल गए हैं। फिर भी पुलिस ने इस मामले में मारपीट करने वाले बिठवाना निवासी प्रीतम उर्फ शुशा व विवेक उर्फ विक्की दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
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बावल में 94 हजार रुपये लूट की कहानी भी थी फर्जी
सिर्फ राजीव चौक की ही नहीं बल्कि राजीव नगर में 15 अप्रैल को 94 हजार रुपये लूटने का बावल थाने में दर्ज मुकदमा भी झूठा मिला है। डीएसपी क्राइम ने बताया कि बावल थाना क्षेत्र के गांव खेड़ी डालू निवासी एसबीआई के कमीशन एजेंट संजय सिंह के कर्मी प्रवीन ने 15 अप्रैल को बैंक में जमा कराने के लिए दी गई 94 हजार रुपये छीने जाने का मुकदमा बावल थाने में दर्ज कराया था।
प्रवीन ने बयान में बताया था कि चांदूवास के नजदीक सर्विस रोड पर बाइक सवार तीन युवकों ने लात मारकर उसकी बाइक गिरा मारपीट करते हुए 94 हजार रुपये छीन लिये। पुलिस द्वारा घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेजों की जांच की तो मामला संदिग्ध दिखा। मामले में बाद में शिकायतकर्ता ने लिखित में बयान दिया कि पुलिस को गुमराह करते हुए झूठी शिकायत दर्ज कराई गई थी। वहीं संजय ने भी जो नोट दिये थे वही वापस मिलने की बात कही है।