फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rewari News ›   जल्दी के चक्कर में सुबह कंपनी

जल्दी के चक्कर में सुबह कंपनी

Fri, 29 Sep 2017 12:04 AM IST
Updated Fri, 29 Sep 2017 12:04 AM IST
विज्ञापन
जल्दी के चक्कर में सुबह कंपनी
बिना ब्रेकर के दस स्कूलों के आगे मौत बनकर दौड़ रहीं कंपनियों की 30 बसें
विज्ञापन

अमित विश्वकर्मा
रेवाड़ी। शहर के सर्कुलर रोड स्थित करीब दस स्कूलों के हजारों बच्चों पर निजी कंपनियों की बसें मौत बनकर दौड़ रही हैं। तेज गति से दौड़ रही इन बसों पर लगाम कसने में पुलिस-प्रशासन नाकाम है। हाल यह है सर्कुलर रोड पर दस के करीब स्कूल हैं, जिनमें पांच हजार से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं, लेकिन सड़क पर एक भी स्पीड़ ब्रेकर नहीं है। वहीं तेज गति से दौड़ने वाली बसों को रोकने वाला भी कोई नहीं है। नतीजतन सर्कुलर रोड पर 10 कंपनियों की तीस से अधिक बसें बेधड़क दौड़ती है। दरअसल कर्मचारियों को पिक और ड्रॉप करने के लिए कंपनी की बसें इस रोड से निकलती है। हालांकि करीब एक साल पहले कंपनियों की बसों को शहर के अंदर घुसने पर रोक लगा दी गई थी। कंपनी की बसें बाईपास पर ही सवारियों को छोड़ती थी। वहीं से कर्मचारियों को कंपनी लेकर जाती थी। इससे शहर में होने वाली दुर्घटनाओं एवं जाम पर भी काफी हद तक अंकुश लग गया था। बाद में आरसीसीआई के विरोध के बाद प्रशासन ने इस रोक को हटा दिया था।
.............
तो बच जाती मासूम की जान
यदि समय रहते पुलिस ने शहर के अंदर दौड़ती इन बसों पर लगाम लगाई होती तो एक मां का लाल उसकी गोद में खेल रहा होता। लेकिन सिस्टम की खामी के चलते एक मासूम की दर्दनाक मौत हो गई।
विज्ञापन


----------------
सड़क हुई चकाचक, बढ़ गई मुसीबत
शहर के सर्कुलर रोड की बदहाल हालत के बाद पिछले दिनों करीब साढ़े 10 करोड़ रुपये की लागत से इस पर विभिन्न मदों में कार्य कराया गया। इससे रोड की सूरत तो ठीक हो गई। लेकिन लोगों की मुसीबत बढ़ गई। दरअसल शहर के सर्कुलर रोड पर छोटे से लेकर बड़े दस से अधिक स्कूल हैं। लेकिन कहीं पर भी नप की ओर से ब्रेकर नहीं बनाए गए हैं। सर्कुलर रोड से बेलगाम दौड़ती कंपनी बसें एवं डंपर स्कूलों की छुट्टी के समय भी गुजरते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

---------------
वर्जन-
मेरे कार्यभार संभालने से पहले शहर में कंपनी बसों की एंट्री पर रोक थी। लेकिन बाद में इस तरह को कोई निर्देश नहीं आया।
- हरिसिंह, प्रभारी यातायात, शहर

बॉर्नविटा पिए बिना नहीं जाऊंगा चाचू
शुक्रवार सुबह स्कूल ड्रेस पहनने के बाद यश पड़ोस में अपने चाचा पवन के पास गया। उसका कहना था कि आज वह बॉर्नविटा पिए बिना स्कूल नहीं जाएगा। मां ने बड़े लाड़ के साथ लाल को पिता सुनील की बाइक पर बैठाया। चार मिनट बाद ही दुर्घटना की सूचना से मां बेहोश होकर गिर पड़ी। करीब आधा घंटे बाद मां को होश आया। तब तक घर में मातम छा चुका था। पिता सुनील मोर्चरी कक्ष के बाहर बैठकर यश को वापस लाने का विलाप कर रहे थे। सभी भाई विलाप कर आपस में एक दूसरे को ढांढस बंधा रहे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed