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चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजनों ने किया हंगामा
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रेवाड़ी। सरकुलर रोड स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में मंगलवार को इलाज के दौरान रेलवे सुरक्षा बल के सेवानिवृत्त दरोगा श्रद्धानंद की मौत हो गई। परिजनों ने चिकित्सक पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल जमकर हंगामा किया। यही नहीं शव लेने से इनकार करते हुए परिजन अस्पताल गेट पर धरने पर बैठ गए। पुलिस ने उनको समझाकर मामला शांत करा दिया।
शहर के मोहल्ला अजय नगर श्रद्धानंद रेलवे सुरक्षा बल के सेवानिवृत्त दरोगा थे। पत्नी शर्मिला ने बताया कि बीमार श्रद्धानंद को उन्होंने इलाज के लिए सोमवार रात करीब दस बजे शहर के सरकुलर रोड स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। महिला ने आरोप लगाया है कि उसके पति की रात को ही मौत हो चुकी थी। चिकित्सक ने रुपये ऐंठने के लिए परिजनों को उन्हें दिखाया नहीं। मंगलवार सुबह करीब 9 बजे तक नहीं बताया कि मरीज की मौत हो चुकी है। जब परिजनों को शक हुआ तो आईसीयू में पहुंचे। अंदर जाकर देखा तो श्रद्घानंद की मौत हो चुकी थी। मौत की सूचना के बाद परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा कर दिया। परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया। विरोध जताते हुए अस्पताल के गेट पर धरना देकर बैठ गए। श्रद्घानंद मूल रूप से महेंद्रगढ़ जिले के गांव भालोठ की ढाणी के रहने वाले थे। आरपीएफ दरोगा से रिटायरमेंट के बाद वह निजामुदीन में आर्मी कैंटीन सीनियर मैनेजर बने। कुछ समय पहले वहां से भी सेवा समाप्त हो गई। श्रद्घानंद की इकलौती बेटी नीलम बीए प्रथम की छात्रा है। हंगामे की सूचना मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। करीब दो घंटे के हंगामे के बाद पुलिस ने परिजनों को समझा-बुझा कर शांत कराया। पुलिस कर्मियों की मध्यस्थता के बाद मामला शांत हुआ तथा परिजन शव लेने को राजी हुई।
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शहर के मोहल्ला अजय नगर श्रद्धानंद रेलवे सुरक्षा बल के सेवानिवृत्त दरोगा थे। पत्नी शर्मिला ने बताया कि बीमार श्रद्धानंद को उन्होंने इलाज के लिए सोमवार रात करीब दस बजे शहर के सरकुलर रोड स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। महिला ने आरोप लगाया है कि उसके पति की रात को ही मौत हो चुकी थी। चिकित्सक ने रुपये ऐंठने के लिए परिजनों को उन्हें दिखाया नहीं। मंगलवार सुबह करीब 9 बजे तक नहीं बताया कि मरीज की मौत हो चुकी है। जब परिजनों को शक हुआ तो आईसीयू में पहुंचे। अंदर जाकर देखा तो श्रद्घानंद की मौत हो चुकी थी। मौत की सूचना के बाद परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा कर दिया। परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया। विरोध जताते हुए अस्पताल के गेट पर धरना देकर बैठ गए। श्रद्घानंद मूल रूप से महेंद्रगढ़ जिले के गांव भालोठ की ढाणी के रहने वाले थे। आरपीएफ दरोगा से रिटायरमेंट के बाद वह निजामुदीन में आर्मी कैंटीन सीनियर मैनेजर बने। कुछ समय पहले वहां से भी सेवा समाप्त हो गई। श्रद्घानंद की इकलौती बेटी नीलम बीए प्रथम की छात्रा है। हंगामे की सूचना मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। करीब दो घंटे के हंगामे के बाद पुलिस ने परिजनों को समझा-बुझा कर शांत कराया। पुलिस कर्मियों की मध्यस्थता के बाद मामला शांत हुआ तथा परिजन शव लेने को राजी हुई।
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