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चेन स्नैचिंग : न रिकवरी न ही आरोपियों का पता
Updated Thu, 30 Aug 2018 01:16 AM IST
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रेवाड़ी। बस में उनके साथ चेन स्नैचिंग की घटना हुई थी। यात्रियों के सहयोग से दो महिलाओं को पकड़ भी लिया था। महिला को लेकर स्वयं ही चौकी और थाने के चक्कर काटती रही। चौकी वालों ने थाने तो थाने वालों ने चौकी का रास्ता दिखा दिया। आखिरकार मौका देखकर चेन स्नेचर महिला भाग गई। जब स्नैचिंग के मामलों में ऐसा रवैया रहेगा तो कौन पुलिस पर विश्वास करेगा। यह कहना है गांव गुडियानी निवासी रितु का। ग्रामीण परिवेश की महिला रितु का कहना है कि उस दिन पुलिस की कार्यशैली पर उनको बहुत अफसोस हुआ। आरोपियों को लेकर एक महिला चौकी और थाने के चक्कर काट रही थी जबकि पुलिस कोई कार्रवाई करने से बच रही थी। महिलाओं को विश्वास में लेने के लिए जिला पुलिस ने दुर्गा शक्ति की तैनाती की है। दुर्गा शक्ति की सार्थकता तभी है जब इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगे और संशोधित कानून के तहत आरोपियों को सजा मिले। आज भी ऐसी महिलाओं की संख्या सैकड़ों में है जिनके साथ चेन स्नैचिंग और छीना झपटी की वारदात हुई हैं। उनकी आज तक रिकवरी भी नहीं हुई है। पुलिस पहले आरोपियों को पकड़ती नहीं है। जब पकड़ में आ भी जाते हैं तो उसी वारदात की बरामदगी दिखाकर इतिश्री कर लेती है। इस तरह के लोगों का शहर में रैकेट काम कर रहा है। जब सख्ती से इनसे पूछताछ की जाएगी तो सारा खुलासा हो जाएगा। इस तरह के लोग चेन और अन्य वस्तुओं को कहां बेचते हैं। इसका भी पता लगाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि उनके साथ हुई स्नैचिंग के दौरान आधी चेन तो रितु के पास रह गई थी जबकि आधी आरोपी महिलाओं के हाथ लग गई तो जिसे बाद में बरामद कर लिया गया।
इसी तरह 19 मई को बोलनी गांव के राजकीय स्कूल की अध्यापिका अंजू स्कूल से अपने घर लौट रही थी। इसी दौरान गांव बखापुर के समीप बाइकर्स ने अध्यापिका की स्कूटी के पास बाइक सटाकर उसके गले से सोने की चेन झटक ली। अध्यापिका ने शोर मचाया, लेकिन बदमाश वहां से भाग गए। कसौला पुलिस ने मामला दर्ज किया लेकिन तीन माह बाद भी बदमाशों का सुराग नहीं लग पाया है। अंजू का कहना है कि शहर में चेन स्नेचर महिलाएं और बाइकर्स का खौफ बना हुआ है। गहने पहनकर घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। हालांकि पुलिस दुर्गा शक्ति के नाम पर महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने का आश्वासन दे रही है लेकिन आज भी हालात ज्यों के त्यों बने हैं। आए दिन स्नैचिंग की वारदात हो रही है। पुलिस क्या कर रही है कुछ समझ में नहीं आता है।
स्नैचिंग के मामलों से परेशान शहर के लोगों का कहना है कि पुलिस को इस मामले में सख्ती से पेश आना चाहिए। कानून में संशोधन तो कर लिया है लेकिन उसे अमल में लाने का काम पुलिस का है। पुलिस चेन स्नेचरों के प्रति नरम रवैया क्यों अख्तियार कर रही है यह समझ से बाहर है। लोगों का कहना है कि इस तरह की वारदात में पकड़ जाने वाले लोगों से सख्ती से पूछताछ की जानी चाहिए। बुजुर्ग और कामकाजी महिलाओं को घरों से बाहर निकलने में दहशत होने लगी है।
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शहर हो ग्रामीण क्षेत्र चेन स्नेचरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। रोजाना चेन तोड़ने की घटनाएं हो रही हैं। महिलाओं का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। चेन स्नेचरों गिरोह में पुलिस का खौफ खत्म हो गया है। इस कारण दिन दहाड़े गिरोह की महिलाएं ऑटो या बसों में महिला यात्रियों के गले से चेन तोड़ रही हैं, इससे महिलाओं में डर बना हुआ है। - प्रो. अनिरुद्घ यादव
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पुलिस तैनाती के बावजूद चेन स्नेचर गिरोह लोगों के लिए खौफ का कारण बन रहे हैं। महिलाओं का घर से बाहर गहने पहनकर निकलना मुश्किल हो गया है। आए दिन चेन तोड़ने की वारदातों में बढ़ोतरी हो रही है। पुलिस द्वारा आरोपी महिलाओं को गिरफ्तार भी किया यगा है, लेकिन उनका रिमांड लिए बिना जेल भेज दिया जाता है। अगर पुलिस उनका रिमांड लेकर पूछताछ करे तो संभवतया उनके गिरोह के बारे में पुलिस को जानकारी मिल सकती है, जिससे गिरोह पर शिकंजा कसा जा सके। - रामकुमार डहीना
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इसी तरह 19 मई को बोलनी गांव के राजकीय स्कूल की अध्यापिका अंजू स्कूल से अपने घर लौट रही थी। इसी दौरान गांव बखापुर के समीप बाइकर्स ने अध्यापिका की स्कूटी के पास बाइक सटाकर उसके गले से सोने की चेन झटक ली। अध्यापिका ने शोर मचाया, लेकिन बदमाश वहां से भाग गए। कसौला पुलिस ने मामला दर्ज किया लेकिन तीन माह बाद भी बदमाशों का सुराग नहीं लग पाया है। अंजू का कहना है कि शहर में चेन स्नेचर महिलाएं और बाइकर्स का खौफ बना हुआ है। गहने पहनकर घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। हालांकि पुलिस दुर्गा शक्ति के नाम पर महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने का आश्वासन दे रही है लेकिन आज भी हालात ज्यों के त्यों बने हैं। आए दिन स्नैचिंग की वारदात हो रही है। पुलिस क्या कर रही है कुछ समझ में नहीं आता है।
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स्नैचिंग के मामलों से परेशान शहर के लोगों का कहना है कि पुलिस को इस मामले में सख्ती से पेश आना चाहिए। कानून में संशोधन तो कर लिया है लेकिन उसे अमल में लाने का काम पुलिस का है। पुलिस चेन स्नेचरों के प्रति नरम रवैया क्यों अख्तियार कर रही है यह समझ से बाहर है। लोगों का कहना है कि इस तरह की वारदात में पकड़ जाने वाले लोगों से सख्ती से पूछताछ की जानी चाहिए। बुजुर्ग और कामकाजी महिलाओं को घरों से बाहर निकलने में दहशत होने लगी है।
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शहर हो ग्रामीण क्षेत्र चेन स्नेचरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। रोजाना चेन तोड़ने की घटनाएं हो रही हैं। महिलाओं का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। चेन स्नेचरों गिरोह में पुलिस का खौफ खत्म हो गया है। इस कारण दिन दहाड़े गिरोह की महिलाएं ऑटो या बसों में महिला यात्रियों के गले से चेन तोड़ रही हैं, इससे महिलाओं में डर बना हुआ है। - प्रो. अनिरुद्घ यादव
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पुलिस तैनाती के बावजूद चेन स्नेचर गिरोह लोगों के लिए खौफ का कारण बन रहे हैं। महिलाओं का घर से बाहर गहने पहनकर निकलना मुश्किल हो गया है। आए दिन चेन तोड़ने की वारदातों में बढ़ोतरी हो रही है। पुलिस द्वारा आरोपी महिलाओं को गिरफ्तार भी किया यगा है, लेकिन उनका रिमांड लिए बिना जेल भेज दिया जाता है। अगर पुलिस उनका रिमांड लेकर पूछताछ करे तो संभवतया उनके गिरोह के बारे में पुलिस को जानकारी मिल सकती है, जिससे गिरोह पर शिकंजा कसा जा सके। - रामकुमार डहीना