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Rewari News: रेवाड़ी-फुलेरा रूट पर ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली से बढ़ेगी ट्रेनों की रफ्तार
Wed, 04 Sep 2024 12:57 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 04 Sep 2024 12:57 AM IST
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फोटो: 10रेवाड़ी। रेवाड़ी-जयपुर रेल मार्ग। संवाद
संवाद न्यूज एजेेंसी
रेवाड़ी। रेवाड़ी-नारनौल-फुलेरा सेक्शन को ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली से लैस किया जाएगा। यह रेलवे ट्रैक 216 किलोमीटर का है। ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली शुरू होने से इस ट्रैक पर एक से अधिक ट्रेनों का संचालन हो सकेगा और ट्रेनों की गति बढ़ेगी।
वर्तमान में एक्सप्रेस ट्रेनों को रेवाड़ी से फुलेरा तक पहुंचने में चार से साढ़े चार या कभी-कभी 5 घंटे लग जाते हैं। ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली शुरू होने से ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी जिससे यात्रा का समय कम हो जाएगा। हाल ही में रेवाड़ी-जयपुर सेक्शन को ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली से लैस करने की स्वीकृति मिली है। इसके अलावा पालनपुर-अजमेर-जयपुर- रेवाड़ी रेलमार्ग के शेष रेल खंडों पर आटोमेटिक सिग्नलिंग प्रणाली का कार्य अंतिम चरण में है। अभी तक जयपुर मंडल में 90 किलोमीटर सेक्शन को ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली से लैस किया जा चुका है।
ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नल सिस्टम से होगा ये लाभ : ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नल प्रणाली लागू होने से एक ही रूट पर एक किमी के अंतर पर एक के पीछे एक ट्रेनें चल सकेंगी। इससे ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी। वहीं, कहीं भी खड़ी ट्रेन को निकलने के लिए आगे चल रही ट्रेन के अगले स्टेशन तक पहुंचने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। स्टेशन यार्ड से ट्रेन के आगे बढ़ते ही ग्रीन सिग्नल मिल जाएगा। एक ब्लॉक सेक्शन में एक के पीछे दूसरी ट्रेन आसानी से चल सकेंगी। इसके साथ ही ट्रेनों के लोकेशन की जानकारी मिलती रहेगी।
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उत्तर पश्चिम रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी कैप्टन शशि किरण ने बताया कि अत्याधुनिक आटोमेटिक सिग्नलिंग प्रणाली का तेज गति से हो रहा है। उत्तर पश्चिम रेलवे में 450 किलोमीटर रेलमार्ग में लगभग 900 करोड़ रुपये की लागत के साथ आटोमेटिक सिग्नलिंग प्रणाली लगाने का कार्य स्वीकृत किया गया है। इसमें से 90 किलोमीटर रेलमार्ग पर आटोमेटिक सिग्नलिंग प्रणाली का कार्य पूरा किया जा चुका है। पालनपुर-अजमेर-जयपुर- रेवाड़ी रेलमार्ग के शेष रेल खंडों पर आटोमेटिक सिग्नलिंग प्रणाली के कार्य अंतिम चरण में है।
रेवाड़ी-नारनौल सेक्शन का होगा दोहरीकरण
रेलवे की तरफ से इस प्रणाली का उपयोग रेवाड़ी-नारनौल सेक्शन पर भी किया जा रहा है। इस सेक्शन का दोहरीकरण की प्रक्रिया 650 करोड़ रुपये की लागत से चल रही है। यह कार्य पूरा होने के बाद इस सेक्शन पर भी ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली का उपयोग किया जाएगा। इससे यह लाभ होगा कि इसका दोहरीकरण का कार्य पूरा होने के पश्चात यहां पर अधिक संख्या में ट्रेनों का संचालन बढ़ने के साथ यहां से गुजरने वाली ट्रेनों की भी गति बढ़ेगी।
अभी ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 110 किलोमीटर प्रति घंटा
रेवाड़ी-अलवर-जयपुर-अजमेर-पालनपुर-अहमदाबाद रेल मार्ग पर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने की अनुमति पिछले वर्ष ही मिली थी। उत्तर पश्चिम रेलवे में 450 से अधिक ट्रेनें संचालित होती हैं। अभी ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 110 किलोमीटर प्रति घंटा है। वंदे भारत एक्सप्रेस, डबल डेकर सुपरफास्ट, शताब्दी एक्सप्रेस, राजधानी एक्सप्रेस सहित सभी ट्रेनें 110-130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती हैं। लंबे समय से 350 किलोमीटर लंबे इस रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों का ट्रायल चल रहा था। ट्रायल सफल होने के बाद रेलवे सीआरएस की तरफ से अनुमति दी गई है।
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रेवाड़ी। रेवाड़ी-नारनौल-फुलेरा सेक्शन को ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली से लैस किया जाएगा। यह रेलवे ट्रैक 216 किलोमीटर का है। ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली शुरू होने से इस ट्रैक पर एक से अधिक ट्रेनों का संचालन हो सकेगा और ट्रेनों की गति बढ़ेगी।
वर्तमान में एक्सप्रेस ट्रेनों को रेवाड़ी से फुलेरा तक पहुंचने में चार से साढ़े चार या कभी-कभी 5 घंटे लग जाते हैं। ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली शुरू होने से ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी जिससे यात्रा का समय कम हो जाएगा। हाल ही में रेवाड़ी-जयपुर सेक्शन को ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली से लैस करने की स्वीकृति मिली है। इसके अलावा पालनपुर-अजमेर-जयपुर- रेवाड़ी रेलमार्ग के शेष रेल खंडों पर आटोमेटिक सिग्नलिंग प्रणाली का कार्य अंतिम चरण में है। अभी तक जयपुर मंडल में 90 किलोमीटर सेक्शन को ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली से लैस किया जा चुका है।
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ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नल सिस्टम से होगा ये लाभ : ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नल प्रणाली लागू होने से एक ही रूट पर एक किमी के अंतर पर एक के पीछे एक ट्रेनें चल सकेंगी। इससे ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी। वहीं, कहीं भी खड़ी ट्रेन को निकलने के लिए आगे चल रही ट्रेन के अगले स्टेशन तक पहुंचने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। स्टेशन यार्ड से ट्रेन के आगे बढ़ते ही ग्रीन सिग्नल मिल जाएगा। एक ब्लॉक सेक्शन में एक के पीछे दूसरी ट्रेन आसानी से चल सकेंगी। इसके साथ ही ट्रेनों के लोकेशन की जानकारी मिलती रहेगी।
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उत्तर पश्चिम रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी कैप्टन शशि किरण ने बताया कि अत्याधुनिक आटोमेटिक सिग्नलिंग प्रणाली का तेज गति से हो रहा है। उत्तर पश्चिम रेलवे में 450 किलोमीटर रेलमार्ग में लगभग 900 करोड़ रुपये की लागत के साथ आटोमेटिक सिग्नलिंग प्रणाली लगाने का कार्य स्वीकृत किया गया है। इसमें से 90 किलोमीटर रेलमार्ग पर आटोमेटिक सिग्नलिंग प्रणाली का कार्य पूरा किया जा चुका है। पालनपुर-अजमेर-जयपुर- रेवाड़ी रेलमार्ग के शेष रेल खंडों पर आटोमेटिक सिग्नलिंग प्रणाली के कार्य अंतिम चरण में है।
रेवाड़ी-नारनौल सेक्शन का होगा दोहरीकरण
रेलवे की तरफ से इस प्रणाली का उपयोग रेवाड़ी-नारनौल सेक्शन पर भी किया जा रहा है। इस सेक्शन का दोहरीकरण की प्रक्रिया 650 करोड़ रुपये की लागत से चल रही है। यह कार्य पूरा होने के बाद इस सेक्शन पर भी ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली का उपयोग किया जाएगा। इससे यह लाभ होगा कि इसका दोहरीकरण का कार्य पूरा होने के पश्चात यहां पर अधिक संख्या में ट्रेनों का संचालन बढ़ने के साथ यहां से गुजरने वाली ट्रेनों की भी गति बढ़ेगी।
अभी ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 110 किलोमीटर प्रति घंटा
रेवाड़ी-अलवर-जयपुर-अजमेर-पालनपुर-अहमदाबाद रेल मार्ग पर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने की अनुमति पिछले वर्ष ही मिली थी। उत्तर पश्चिम रेलवे में 450 से अधिक ट्रेनें संचालित होती हैं। अभी ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 110 किलोमीटर प्रति घंटा है। वंदे भारत एक्सप्रेस, डबल डेकर सुपरफास्ट, शताब्दी एक्सप्रेस, राजधानी एक्सप्रेस सहित सभी ट्रेनें 110-130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती हैं। लंबे समय से 350 किलोमीटर लंबे इस रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों का ट्रायल चल रहा था। ट्रायल सफल होने के बाद रेलवे सीआरएस की तरफ से अनुमति दी गई है।