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अस्पताल में मरीज का बंधक बनाने का आरोप, डीसी दरबार पहुंचा मामला, आधे घंटे में मरीज को घर भेजने के आदेश

Mon, 26 Sep 2022 10:36 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 26 Sep 2022 10:36 PM IST
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Accused of taking the patient hostage in the hospital, the matter reached the DC court, orders to send the patient home in half an hour
शहर के एक प्राइवेट अस्पताल पर कंपनी कर्मचारी को छह दिनों तक बंधक बनाए रखने का आरोप लगा है। कर्मचारी का इलाज 20 सितंबर को पूरा हो गया था लेकिन अस्पताल प्रबंधन की तरफ से उसके हाथ में करीब 80 हजार रुपये का बिल थमा दिया गया और उसे राशि जमा करवाने से पहले अस्पताल से न जाने को कहा गया। मामला सोमवार को डीसी दरबार में पहुंचा। डीसी को श्रमिक की पत्नी ने बताया कि उसके पति को कंपनी के कर्मचारी अस्पताल लेकर आए थे और वे अस्पताल में छोड़ कर भाग गए। डीसी अशोक गर्ग ने अस्पताल प्रबंधन से बात कर मरीज को आधे घंटे में डिस्चार्ज करने के लिए कहा। वहीं सिविल सर्जन को पूरे मामले की जांच के आदेश भी दिए।
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चंद्रहा गांव जिला हरदौई, उत्तर प्रदेश निवासी हॉल रेवाड़ी जिले के गांव आसलवास निवासी महेंद्र की पत्नी पिंकी ने आरोप लगाया कि उसका पति रेवाड़ी के औद्योगिक कस्बा बावल स्थित एक कंपनी में करीब 5 वर्षों से कार्यरत है। 14 सितंबर को कंपनी में ड्यूटी के दौरान महेंद्र बीमार हो गया। महेंद्र को कंपनी ने रेवाड़ी के सरकुलर रोड स्थित निजी अस्पताल में दाखिल करवा दिया। दाखिल करवाने के बाद कंपनी से उसे फोन आया कि आपके पति बीमार हो गए थे उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया है। उसकी पत्नी के अस्पताल पहुंचने के बाद कंपनी कर्मचारी ने कहा कि बीमारी का सारा खर्च कंपनी वहन करेगी और वे उनके पास रहें। इसके बाद कंपनी के कर्मचारी वहां से चले गए।
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उसकी पिंकी देवी ने बताया कि उनके पति 20 सितंबर को बिल्कुल स्वस्थ हो गए। अस्पताल ने भी उनकी छुट्टी करने की बात की लेकिन जब वह उन्हें घर लेकर जाने लगी तो अस्पताल ने ये कहते हुए छुट्टी देने से मना कर दिया कि बीमारी के इलाज का 80 हजार रुपये जमा कराओ उसके बाद ही घर जाने देंगे। पिंकी का आरोप है कि अस्पताल ने 6 दिन तक उनके पति को बंधक बनाए रखा।
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लगाती रही अधिकारियों के चक्कर, डीसी दर
पिंकी अपने पति को अस्पताल मुक्त करवाने के लिए कई अधिकारियों के चक्कर लगाए लेकिन कहीं से भी मदद नहीं मिली। वह लेबर इंस्पेक्टर, पुलिस थाने में भी गई थी लेकिन किसी ने भी उसकी सहायता नहीं की। अंत में उसने एडवोकेट कैलाश चंद से संपर्क किया। अधिवक्ता कैलाश चंद ने बताया कि उन्होंने पीड़िता की शिकायत मुख्यमंत्री, स्वास्थ मंत्री, डीसी, एसपी सहित अन्य अधिकारियों को लिखी और अधिवक्ता किरण पोशवाल, अधिवक्ता सीमा सैनी सहित पीड़िता को लेकर डीसी अशोक कुमार गर्ग के कैंप ऑफिस पर जाकर मुलाकात करके सारी जानकारी दी। डीसी अशोक कुमार ने सिविल सर्जन डॉ. सुदर्शन पंवार व निजी अस्पताल को फोन करके पीड़ित श्रमिक को बंधक मुक्त करने के आदेश दिए।
14 सितंबर को मरीज को उनके अस्पताल में भर्ती था। 20 सितंबर को जब मरीज के परिजनों ने बिल लिया तब 80 हजार रुपये था। पांच दिन से उसकी पत्नी अस्पताल में मिलने तक नहीं आई। मरीज का इलाज चल रहा था। अस्पताल के चिकित्सकों ने मरीज का अच्छे से इलाज किया है। अस्पताल को तो बे वजह घसीटा जा रहा है। अस्पताल की और से मरीज को डिस्चार्ज कर दिया है।

- डॉ. विराटवीर, प्रबंधक अस्पताल।
एक महिला उनसे मिली थी और सारी जानकारी दी। निजी अस्पताल में मरीज 20 सितंबर को बिल्कुल ठीक हो गया। साथ ही बताया कि ईएसआई कार्ड किसी कारणवश नहीं चल रहा, जिसकी वजह से उनकी पेमेंट नहीं हुई। कंपनी के लोग उनका फोन नहीं उठा रहे। मैंने तुरंत अस्पताल से बात कर उन्हें कहा कि मरीज को जबरन बंधक नहीं बना सकते। मरीज को तुरंत रिलीज करे और कंपनी को क्लेम करें। इसकी कॉपी मुझे भी मेल कर दें। बाकी पूरे मामले की जांच सिविल सर्जन को करने के आदेश दिए हैं।
- अशोक गर्ग, डीसी, रेवाड़ी।
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