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पांच दिनों की बरसात ने लिख दी किसानों की बर्बादी की कहानी, कृषि विभाग में आ चके हैं शिकायत लेकर 400 से ज्यादा किसान
Updated Fri, 07 Sep 2018 01:03 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। सितंबर माह में हुई पांच दिन की बारिश ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। सरकार ने बाजरा का एमएसपी भले ही 1950 रुपये प्रति क्विंटल तय कर दिया हो लेकिन बारिश ने सबसे अधिक नुकसान ही बाजरा की फसल में पहुंचाया है जिससे उत्पादन कम होने की संभावना है। वहीं फसलों को हुए नुकसान पर कृषि विभाग में 400 से अधिक किसानों मुआवजा देने की मांग की हैं।
जिला में इस साल खरीफ सीजन में करीब 61 हजार हेक्टेयर बाजरा है और 16.5 हजार हेक्टेयर कपास की बुवाई की गई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत इस बार स्वेच्छा से फसलों का बीमा करने वाले किसानों की संख्या भी सिर्फ 200 है। वहीं जिन किसानों ने ऋण लिया है उनकी संख्या 30 हजार के करीब है। ऐसे में फसलों में हुए नुकसान की केवल बीमा योजना में शामिल ही किसानों का मुआवजा मिलने की उम्मीद है क्योंकि बगैर बीमा वाले किसानों के लिए सरकार की तरफ से अभी कोई घोषणा नहीं की गई है। बारिश से खराब हुई फसलों का मुआवजा देने की मांग पर कृषि विभाग के पास जिले के करीब चार सौ किसानों के प्रार्थना पत्र आएं हैं, जिसमें उन्होंने लिखा है कि उनकी बाजरे व कपास की फसल बर्बाद हो चुकी है, इसलिए गिरदावरी कराकर उन्हें मुआवजा दिलवाया जाए। पत्र आने का सिलसिला अभी लगातार जारी है। गौरतलब है कि सितंबर माह में शनिवार से बरसात शुरू हुई थी, जो रूक-रूक कर गत दिवस अर्थात बुधवार तक होती रही। इन पांच दिनों में करीब 200 एमएम रिकार्ड की गई। कृषि विभाग के पास आए प्रार्थना पत्रों में जाटूसाना क्षेत्र के किसानों के ज्यादा हैं।
खेतों में तैयार है फसल, नहीं हो पा रही कटाई
किसानों ने बताया कि लगातार बारिश की वजह से अभी भी खेतों में पानी जमा है और बाजरा की अगेती फसल पूरी तरह से पककर तैयार हो गई है। यदि बारिश नहीं होती तो अब कटाई शुरू हो जाती। खेतों में पानी होने के कारण फसल गिर रही है और इससे पककर तैयार फसल भी खराब हो रही है।
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बरसात से फसल बर्बाद होने पर 400 से अधिक प्रार्थना पत्र आ चुके हैं। जिले में बाजरा का 61 हजार हेक्टेयर से भी अधिक रकबा है। फिलहाल सरकार की तरफ से गिरदावरी को लेकर कोई जानकारी नहीं है। फसल बीमा योजना के तहत जिन किसानों ने बीमा कराया है उनकी जानकारी अभी मांगी जा रही है।
डॉ. दीपक यादव, एसडीओ कृषि विभाग
मौसम सामान्य रहता तो 10 से 15 सितंबर के बीच फसल की कटाई शुरू हो जाती लेकिन बरसात ने पानी फेर दिया। बाजरे में अधिक बरसात से नुकसान होना निश्चित है। यदि इसी प्रकार और बारिश हुई तो पूरी फसल बर्बाद हो सकती है।
डॉ. नरेंद्र वर्मा, तकनीकी अधिकारी कृषि विभाग
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रेवाड़ी। सितंबर माह में हुई पांच दिन की बारिश ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। सरकार ने बाजरा का एमएसपी भले ही 1950 रुपये प्रति क्विंटल तय कर दिया हो लेकिन बारिश ने सबसे अधिक नुकसान ही बाजरा की फसल में पहुंचाया है जिससे उत्पादन कम होने की संभावना है। वहीं फसलों को हुए नुकसान पर कृषि विभाग में 400 से अधिक किसानों मुआवजा देने की मांग की हैं।
जिला में इस साल खरीफ सीजन में करीब 61 हजार हेक्टेयर बाजरा है और 16.5 हजार हेक्टेयर कपास की बुवाई की गई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत इस बार स्वेच्छा से फसलों का बीमा करने वाले किसानों की संख्या भी सिर्फ 200 है। वहीं जिन किसानों ने ऋण लिया है उनकी संख्या 30 हजार के करीब है। ऐसे में फसलों में हुए नुकसान की केवल बीमा योजना में शामिल ही किसानों का मुआवजा मिलने की उम्मीद है क्योंकि बगैर बीमा वाले किसानों के लिए सरकार की तरफ से अभी कोई घोषणा नहीं की गई है। बारिश से खराब हुई फसलों का मुआवजा देने की मांग पर कृषि विभाग के पास जिले के करीब चार सौ किसानों के प्रार्थना पत्र आएं हैं, जिसमें उन्होंने लिखा है कि उनकी बाजरे व कपास की फसल बर्बाद हो चुकी है, इसलिए गिरदावरी कराकर उन्हें मुआवजा दिलवाया जाए। पत्र आने का सिलसिला अभी लगातार जारी है। गौरतलब है कि सितंबर माह में शनिवार से बरसात शुरू हुई थी, जो रूक-रूक कर गत दिवस अर्थात बुधवार तक होती रही। इन पांच दिनों में करीब 200 एमएम रिकार्ड की गई। कृषि विभाग के पास आए प्रार्थना पत्रों में जाटूसाना क्षेत्र के किसानों के ज्यादा हैं।
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खेतों में तैयार है फसल, नहीं हो पा रही कटाई
किसानों ने बताया कि लगातार बारिश की वजह से अभी भी खेतों में पानी जमा है और बाजरा की अगेती फसल पूरी तरह से पककर तैयार हो गई है। यदि बारिश नहीं होती तो अब कटाई शुरू हो जाती। खेतों में पानी होने के कारण फसल गिर रही है और इससे पककर तैयार फसल भी खराब हो रही है।
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बरसात से फसल बर्बाद होने पर 400 से अधिक प्रार्थना पत्र आ चुके हैं। जिले में बाजरा का 61 हजार हेक्टेयर से भी अधिक रकबा है। फिलहाल सरकार की तरफ से गिरदावरी को लेकर कोई जानकारी नहीं है। फसल बीमा योजना के तहत जिन किसानों ने बीमा कराया है उनकी जानकारी अभी मांगी जा रही है।
डॉ. दीपक यादव, एसडीओ कृषि विभाग
मौसम सामान्य रहता तो 10 से 15 सितंबर के बीच फसल की कटाई शुरू हो जाती लेकिन बरसात ने पानी फेर दिया। बाजरे में अधिक बरसात से नुकसान होना निश्चित है। यदि इसी प्रकार और बारिश हुई तो पूरी फसल बर्बाद हो सकती है।
डॉ. नरेंद्र वर्मा, तकनीकी अधिकारी कृषि विभाग