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Rewari News: आठ वर्षों में मलेरिया के आए 58 केस, एक भी मरीज की मौत नहीं
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सिविल अस्पताल रेवाड़ी। संवाद
रेवाड़ी। जिले में मलेरिया पर नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। इसके बावजूद हर साल इसके मामले सामने आ रहे हैं। इस वर्ष में अब तक मलेरिया के तीन केस दर्ज किए जा चुके हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि पिछले आठ वर्षों में कुल 58 मामले सामने आने के बावजूद एक भी मरीज की मौत नहीं हुई है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 से मलेरिया के मामलों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वर्ष 2017 में 8, 2018 में 13, 2019 में 9, 2020 में 2, 2021 में 1, 2022 में 5, 2023 में 9, 2024 में 8 और 2025 में सबसे अधिक 25 मामले दर्ज किए गए। इस वर्ष फिलहाल तीन मामले सामने आए हैं।
मलेरिया की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से कदम उठाए जा रहे हैं। नागरिक अस्पताल में 10 आईसीयू बेड की व्यवस्था की गई है ताकि गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार मिल सके।
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ग्रामीण क्षेत्रों के तालाबों में गंबूजिया मछलियां छोड़ी गई हैं जो मच्छरों के लार्वा को खाकर उनकी संख्या को नियंत्रित करती हैं। सड़कों के किनारे, खाली प्लाट और नालियों में दवा का छिड़काव नहीं होने से लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है।
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इस तरह से होता है मलेरिया
चिकित्सकों के अनुसार मलेरिया एनाफिलीज मादा मच्छर के काटने से होता है जो विशेष रूप से बारिश के मौसम में सक्रिय होता है। यह मच्छर अधिकतर शाम और रात के समय काटता है। इसके कारण मरीज को बुखार, सिर दर्द, ठंड लगना, उल्टी, चक्कर आना और थकान जैसे लक्षण महसूस होते हैं। कई बार बुखार का स्तर कम-ज्यादा होता रहता है जो मलेरिया की पहचान मानी जाती है।
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मलेरिया से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा
डेंगू एवं मलेरिया के नोडल अधिकारी डॉ. जोगेंद्र तंवर ने बताया कि मलेरिया से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नागरिकों के सहयोग से ही इस बीमारी पर पूरी तरह नियंत्रण पाया जा सकता है और सरकार के 2030 तक मलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल किया जा सकेगा। जिन क्षेत्रों में मलेरिया के केस सामने आए हैं वहां टीमें जाकर लोगों के खून की जांच कर रही हैं। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर, गमलों और अन्य स्थानों की नियमित सफाई करें और शरीर को ढक कर रखें।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 से मलेरिया के मामलों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वर्ष 2017 में 8, 2018 में 13, 2019 में 9, 2020 में 2, 2021 में 1, 2022 में 5, 2023 में 9, 2024 में 8 और 2025 में सबसे अधिक 25 मामले दर्ज किए गए। इस वर्ष फिलहाल तीन मामले सामने आए हैं।
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मलेरिया की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से कदम उठाए जा रहे हैं। नागरिक अस्पताल में 10 आईसीयू बेड की व्यवस्था की गई है ताकि गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार मिल सके।
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ग्रामीण क्षेत्रों के तालाबों में गंबूजिया मछलियां छोड़ी गई हैं जो मच्छरों के लार्वा को खाकर उनकी संख्या को नियंत्रित करती हैं। सड़कों के किनारे, खाली प्लाट और नालियों में दवा का छिड़काव नहीं होने से लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है।
इस तरह से होता है मलेरिया
चिकित्सकों के अनुसार मलेरिया एनाफिलीज मादा मच्छर के काटने से होता है जो विशेष रूप से बारिश के मौसम में सक्रिय होता है। यह मच्छर अधिकतर शाम और रात के समय काटता है। इसके कारण मरीज को बुखार, सिर दर्द, ठंड लगना, उल्टी, चक्कर आना और थकान जैसे लक्षण महसूस होते हैं। कई बार बुखार का स्तर कम-ज्यादा होता रहता है जो मलेरिया की पहचान मानी जाती है।
मलेरिया से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा
डेंगू एवं मलेरिया के नोडल अधिकारी डॉ. जोगेंद्र तंवर ने बताया कि मलेरिया से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नागरिकों के सहयोग से ही इस बीमारी पर पूरी तरह नियंत्रण पाया जा सकता है और सरकार के 2030 तक मलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल किया जा सकेगा। जिन क्षेत्रों में मलेरिया के केस सामने आए हैं वहां टीमें जाकर लोगों के खून की जांच कर रही हैं। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर, गमलों और अन्य स्थानों की नियमित सफाई करें और शरीर को ढक कर रखें।