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ऐसे कैसे रुके पानी की बर्बादी-----
Updated Sat, 26 May 2018 01:16 AM IST
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कैसे रुकेगी पानी की बर्बादी
प्रति व्यक्ति मिल रहा 135 लीटर पानी
रेवाड़ी। जिले का तापमान लगातार बढ़ रहा है। पीने के पानी के लिए लोगों में हाहाकार मचा हुआ है। नहर विभाग की तरफ से नहरों में 24 दिन बाद पानी भी छोड़ा जा रहा है। इसके बाद भी लोगोें को निर्धारित 150 लीटर प्रति व्यक्ति नहीं मिल रहा है। वर्तमान में 135 लीटर प्रति व्यक्ति पानी मिल रहा है। विभागीय मिलीभगत से शहर में घरेलू कनेक्शन से करीब 80 वाशिंग सेंटरों पर रोजाना 70 से 80 हजार लीटर पानी की बर्बादी की जा रही है। शहर में करीब दो दर्जन वाशिंग सेंटर हैं।
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वाशिंग सेंटरों में खर्च हो रहा करीब एक लाख लीटर
शहर में करीब 100 कार वाशिंग सेंटर चलाए जा रहे हैं। इनमें से अधिकांश ने ना तो बोरिंग की अनुमति ली है और ना ही उनके पास कामर्शियल कनेक्शन हैं। हर सेंटर पर औसतन दस गाड़ियां धुलने के लिए आती हैं। यहां करीब एक लाख लीटर पानी बर्बाद होता है। वाशिंग सेंटर चलाने के लिए ट्यूबवेल के लिए बिजली वितरण निगम से कामर्शियल कनेक्शन का लिया जाना अनिवार्य होता है, लेकिन शहर में चलाए जा रहे वाशिंग सेंटरों में घरेलू कनेक्शन से ही ट्यूबवेल चलाए जा रहे हैं। वाशिंग सेंटरों को वाहनों की धुलाई के लिए प्रतिदिन करीब एक हजार लीटर पानी की आवश्यकता पड़ती है।
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एक कार की धुलाई में डेढ़ सौ लीटर तक खर्च होता है पानी
वाशिंग सेंटरों से जुड़े लोगों से मिली जानकारी के अनुसार एक कार की धुलाई के लिए लगभग एक सौ से डेढ सौ लीटर पानी की आवश्यकता पड़ती है। इसके अलावा मोटरसाइकिल आदि की धुलाई के 20 से 30 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। 15 लाख लोगों की आबादी वाले जिले में रेवाड़ी शहर की आबादी कालका वाटर टैंक की साढ़े चार हजार लाख लीटर की क्षमता है। अगर नहरी पानी का समय पर आता रहे तो पानी का स्टोरेज पर्याप्त है। फिलहाल नहरों के आने का शेड्यूल 24 दिन है। जो पानी के स्टोरेज के लिए पर्याप्त है।
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वर्जन
बिजली वितरण निगम के कार्यकारी अभियंता अविनाश यादव का कहना है कि वाशिंग सेंटर के लिए कामर्शियल कनेक्शन का होना जरूरी होता है। अगर कोई घरेलू कनेक्शन से कामर्शियल कार्य कर रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पब्लिक हेल्थ के जेई अशोक डागर का कहना है कि 150 लीटर पानी हर व्यक्ति को मिलना चाहिए। इस समय 135 लीटर पानी ही उपलब्ध हो पा रहा है। नहरें सही समय पर आ रही हैं। पानी का स्टोरेज भी पर्याप्त है। नहर समय पर आती रही तो पेयजल के लिए कोई परेशानी नहीं रहेगी।
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प्रति व्यक्ति मिल रहा 135 लीटर पानी
रेवाड़ी। जिले का तापमान लगातार बढ़ रहा है। पीने के पानी के लिए लोगों में हाहाकार मचा हुआ है। नहर विभाग की तरफ से नहरों में 24 दिन बाद पानी भी छोड़ा जा रहा है। इसके बाद भी लोगोें को निर्धारित 150 लीटर प्रति व्यक्ति नहीं मिल रहा है। वर्तमान में 135 लीटर प्रति व्यक्ति पानी मिल रहा है। विभागीय मिलीभगत से शहर में घरेलू कनेक्शन से करीब 80 वाशिंग सेंटरों पर रोजाना 70 से 80 हजार लीटर पानी की बर्बादी की जा रही है। शहर में करीब दो दर्जन वाशिंग सेंटर हैं।
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वाशिंग सेंटरों में खर्च हो रहा करीब एक लाख लीटर
शहर में करीब 100 कार वाशिंग सेंटर चलाए जा रहे हैं। इनमें से अधिकांश ने ना तो बोरिंग की अनुमति ली है और ना ही उनके पास कामर्शियल कनेक्शन हैं। हर सेंटर पर औसतन दस गाड़ियां धुलने के लिए आती हैं। यहां करीब एक लाख लीटर पानी बर्बाद होता है। वाशिंग सेंटर चलाने के लिए ट्यूबवेल के लिए बिजली वितरण निगम से कामर्शियल कनेक्शन का लिया जाना अनिवार्य होता है, लेकिन शहर में चलाए जा रहे वाशिंग सेंटरों में घरेलू कनेक्शन से ही ट्यूबवेल चलाए जा रहे हैं। वाशिंग सेंटरों को वाहनों की धुलाई के लिए प्रतिदिन करीब एक हजार लीटर पानी की आवश्यकता पड़ती है।
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एक कार की धुलाई में डेढ़ सौ लीटर तक खर्च होता है पानी
वाशिंग सेंटरों से जुड़े लोगों से मिली जानकारी के अनुसार एक कार की धुलाई के लिए लगभग एक सौ से डेढ सौ लीटर पानी की आवश्यकता पड़ती है। इसके अलावा मोटरसाइकिल आदि की धुलाई के 20 से 30 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। 15 लाख लोगों की आबादी वाले जिले में रेवाड़ी शहर की आबादी कालका वाटर टैंक की साढ़े चार हजार लाख लीटर की क्षमता है। अगर नहरी पानी का समय पर आता रहे तो पानी का स्टोरेज पर्याप्त है। फिलहाल नहरों के आने का शेड्यूल 24 दिन है। जो पानी के स्टोरेज के लिए पर्याप्त है।
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वर्जन
बिजली वितरण निगम के कार्यकारी अभियंता अविनाश यादव का कहना है कि वाशिंग सेंटर के लिए कामर्शियल कनेक्शन का होना जरूरी होता है। अगर कोई घरेलू कनेक्शन से कामर्शियल कार्य कर रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पब्लिक हेल्थ के जेई अशोक डागर का कहना है कि 150 लीटर पानी हर व्यक्ति को मिलना चाहिए। इस समय 135 लीटर पानी ही उपलब्ध हो पा रहा है। नहरें सही समय पर आ रही हैं। पानी का स्टोरेज भी पर्याप्त है। नहर समय पर आती रही तो पेयजल के लिए कोई परेशानी नहीं रहेगी।