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आन है हिंदी, शान हैं हिंदी, सच पूछो तो पहचान है हिंदी
Updated Fri, 15 Sep 2017 12:49 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
श्रीराम-सीता ट्रस्ट की संयोजक पूनम वाधवा की ओर से सेक्टर-3 स्थित आर्य समाज मंदिर में हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान कवियों ने हिंदी को प्रतिष्ठित स्थान पर बिठाने की वकालत की, वहीं समसामयिक विषयों पर करारी चोट भी की। ट्रस्ट की ओर से सभी कवियों का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम में गीत, गजल एवं कविताओं के साथ वीर हास्य एवं करुण रस की कविताओं ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। मुख्य अतिथि पूर्व जिला शिक्षाधिकारी रामानंद यादव ने कहा कि अपनी भाषा के बिना देश का उत्थान संभव नहीं है, हिंदी हमारी मां है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि महेंद्रगढ़ जयराम ग्रुप के सुरेंद्र यादव थे। कार्यक्रम में साहित्यकार सत्यवीर नाहड़िया ने कहा कि - ये आन हिंदी है, ये शान हिंदी है, सच पूछो तो पहचान हिंदी है। वहीं कवयित्री डॉ. लाज कौशल ने बेटी, बेटे और मां की पीड़ा सुनाते हुए गुड़गांव स्कूल की घटना पर चिंता जताई और कहा -उस मां का तो रब रूठ गया, जिसकी आंखों का सपना टूट गया।
कार्यक्रम में हास्य कवि हलचल हरियाणवी ने ज्वलंत मुद्दों पर कटाक्ष किया। वहीं गजलकार विपिन सुनेजा ने वर्तमान युग पर कहा कि नवीन युग, नवीन लोग, हुए बहुत प्रवीण लोग, ये भावना विहिन लोग, बने हैं सब मशीन लोग। इसके अलावा गजलकार रमेश सिद्धार्थ ने नफरत भरे माहौल पर चिंता जताई-मुल्क पहले है या धर्म पहले, हम सभी को ये तोलना होगा, इतनी कड़वाहटें कि उफ, तोबा, कुछ शहद दिल में घोलना होगा। गोपाल वशिष्ठ ने भी हिंदी और हिंदुस्तान का मिलन कराते हुए कहा कि -वतन की जान है हिंदी, वतन की शान है हिंदी। दिलों में सदा रहे जिंदी, हमारी पहचान है हिंदी। आलोक भांडोरिया ने हास्य की फुलझड़ियों से हंसाया तो मुकुट अग्रवाल ने हिंदी को देवतुल्य बताते हुए नमन किया। कार्यक्रम आयोजक पूनम वाधवा की कविता- पुष्प बनो कीकर नहीं भी सराही गई। ब्रिजेश यादव, कैलाश करनावास, अंकित शर्मा, रुचि वधवा आदि की कविताएं भी सराहनीय रहीं। इस मौके पर भाजपा नेता लक्ष्मण सिंह यादव, गोपाल शर्मा, डॉ. कंवर सिंह, ओमप्रकाश राजपाल, सनग्लो स्कूल के निदेशक वीपी यादव, दिनेश कपूर आदि मौजूद थे।
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रेवाड़ी।
श्रीराम-सीता ट्रस्ट की संयोजक पूनम वाधवा की ओर से सेक्टर-3 स्थित आर्य समाज मंदिर में हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान कवियों ने हिंदी को प्रतिष्ठित स्थान पर बिठाने की वकालत की, वहीं समसामयिक विषयों पर करारी चोट भी की। ट्रस्ट की ओर से सभी कवियों का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम में गीत, गजल एवं कविताओं के साथ वीर हास्य एवं करुण रस की कविताओं ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। मुख्य अतिथि पूर्व जिला शिक्षाधिकारी रामानंद यादव ने कहा कि अपनी भाषा के बिना देश का उत्थान संभव नहीं है, हिंदी हमारी मां है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि महेंद्रगढ़ जयराम ग्रुप के सुरेंद्र यादव थे। कार्यक्रम में साहित्यकार सत्यवीर नाहड़िया ने कहा कि - ये आन हिंदी है, ये शान हिंदी है, सच पूछो तो पहचान हिंदी है। वहीं कवयित्री डॉ. लाज कौशल ने बेटी, बेटे और मां की पीड़ा सुनाते हुए गुड़गांव स्कूल की घटना पर चिंता जताई और कहा -उस मां का तो रब रूठ गया, जिसकी आंखों का सपना टूट गया।
कार्यक्रम में हास्य कवि हलचल हरियाणवी ने ज्वलंत मुद्दों पर कटाक्ष किया। वहीं गजलकार विपिन सुनेजा ने वर्तमान युग पर कहा कि नवीन युग, नवीन लोग, हुए बहुत प्रवीण लोग, ये भावना विहिन लोग, बने हैं सब मशीन लोग। इसके अलावा गजलकार रमेश सिद्धार्थ ने नफरत भरे माहौल पर चिंता जताई-मुल्क पहले है या धर्म पहले, हम सभी को ये तोलना होगा, इतनी कड़वाहटें कि उफ, तोबा, कुछ शहद दिल में घोलना होगा। गोपाल वशिष्ठ ने भी हिंदी और हिंदुस्तान का मिलन कराते हुए कहा कि -वतन की जान है हिंदी, वतन की शान है हिंदी। दिलों में सदा रहे जिंदी, हमारी पहचान है हिंदी। आलोक भांडोरिया ने हास्य की फुलझड़ियों से हंसाया तो मुकुट अग्रवाल ने हिंदी को देवतुल्य बताते हुए नमन किया। कार्यक्रम आयोजक पूनम वाधवा की कविता- पुष्प बनो कीकर नहीं भी सराही गई। ब्रिजेश यादव, कैलाश करनावास, अंकित शर्मा, रुचि वधवा आदि की कविताएं भी सराहनीय रहीं। इस मौके पर भाजपा नेता लक्ष्मण सिंह यादव, गोपाल शर्मा, डॉ. कंवर सिंह, ओमप्रकाश राजपाल, सनग्लो स्कूल के निदेशक वीपी यादव, दिनेश कपूर आदि मौजूद थे।
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