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बिल दोगुना देना मंजूर लेकिन मीटर लगवाना नहीं
Updated Sun, 15 Apr 2018 12:37 AM IST
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बिल दोगुना देना मंजूर लेकिन मीटर लगवाना नहीं
राहुल यादव
रेवाड़ी।
एक तरफ बिजली और पानी के भारी भरकम बिलों को लेकर जहां उपभोक्ता सरकार को कोसते है वहीं रेवाड़ी शहर में स्थिति बिल्कुल अलग है। यहां पर उपभोक्ता बगैर किसी विरोध के जनस्वास्थ्य विभाग को हर वर्ष डेढ़ करोड़ रुपये से भी अधिक अतिरिक्त चुका रहे हैं। वजह सिर्फ मीटर नहीं लगवाना है। एक बार तो आपको भी विश्वास नहीं होगा कि ऐसा संभव है कि उपभोक्ता मीटर नहीं लगवाने की एवज में दोगुना बिल अदा कर दें लेकिन रेवाड़ी में पिछले दो सालों से ऐसा ही चल रहा है।
जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा दो वर्ष से नए कनेक्शनों के लिए मीटर लगाना अनिवार्य किया हुआ है। शहर में इस समय 25,600 के करीब कनेक्शन हैं। इनमें से महज 1740 उपभोक्ताओं ने ही मीटर लगवाए हैं। इनमें भी ज्यादातर वे उपभोक्ता हैं जिन्होंने नया कनेक्शन लगवाया है। शेष पुराने उपभोक्ता तो विभाग की कई बार चेतावनी के बावजूद भी मीटर लगवाने को तैयार नहीं है। जनस्वास्थ्य विभाग हर छह माह में बिल भेजता है। जिन उपभोक्ताओं ने मीटर लगवाए हैं उनको 360 रुपये का बिल भेजता है। जिन्होंने मीटर नहीं लगवाए हैं उन उपभोक्ताओं से विभाग छह माह में 720 रुपये वसूलता है। इस प्रकार विभाग इन बगैर मीटर वाले उपभोक्ताओं से हर वर्ष 1.71 करोड़ रुपये वसूलता है। बावजूद इसके बाद हालात यह है कि उपभोक्ता पानी के मीटर लगवाने को ही तैयार नहीं हो रहे हैं। इसके लिए बाकायदा जनस्वास्थ्य विभाग की तरफ से उपभोक्ताओं को कई बार प्रेरित भी किया जा रहा है लेकिन फिर भी उपभोक्ता मानने को तैयार नहीं हैं। प्रतिवर्ष करीब 23860 उपभोक्ता से दोगुना बिल वसूला जा रहा है।
मीटर लगवाने पर अतिरिक्त बिल नहीं
जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा मीटर लगवाने पर भी उपभोक्ताओं से फ्लैट बिल की तरह भी बिल वसूला जाएगा। यानी मीटर लगने के बाद ऐसा नहीं है कि पानी के उपभोग के अनुसार बिल आएगा। अधिकारियों का दावा है इससे बिल कम आने के बगैर नलों के कारण जो पानी व्यर्थ बहता है उस रोक लग जाएगी।
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नलों पर मीटर सभी उपभोक्ताओं को हर हाल में लगवाना होगा लेकिन ज्यादातर लोग इसके लिए तैयार ही नहीं हैं। बगैर मीटर वाले उपभोक्ताओं से एक साल 720 रुपये दोगुना बिल या जुर्माना राशि के तौर पर वसूला जा रहा है। हर वर्ष करीब 1.71 करोड़ की राशि आती है। - अशोक डागर, जेई जनस्वास्थ्य विभाग।
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राहुल यादव
रेवाड़ी।
एक तरफ बिजली और पानी के भारी भरकम बिलों को लेकर जहां उपभोक्ता सरकार को कोसते है वहीं रेवाड़ी शहर में स्थिति बिल्कुल अलग है। यहां पर उपभोक्ता बगैर किसी विरोध के जनस्वास्थ्य विभाग को हर वर्ष डेढ़ करोड़ रुपये से भी अधिक अतिरिक्त चुका रहे हैं। वजह सिर्फ मीटर नहीं लगवाना है। एक बार तो आपको भी विश्वास नहीं होगा कि ऐसा संभव है कि उपभोक्ता मीटर नहीं लगवाने की एवज में दोगुना बिल अदा कर दें लेकिन रेवाड़ी में पिछले दो सालों से ऐसा ही चल रहा है।
जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा दो वर्ष से नए कनेक्शनों के लिए मीटर लगाना अनिवार्य किया हुआ है। शहर में इस समय 25,600 के करीब कनेक्शन हैं। इनमें से महज 1740 उपभोक्ताओं ने ही मीटर लगवाए हैं। इनमें भी ज्यादातर वे उपभोक्ता हैं जिन्होंने नया कनेक्शन लगवाया है। शेष पुराने उपभोक्ता तो विभाग की कई बार चेतावनी के बावजूद भी मीटर लगवाने को तैयार नहीं है। जनस्वास्थ्य विभाग हर छह माह में बिल भेजता है। जिन उपभोक्ताओं ने मीटर लगवाए हैं उनको 360 रुपये का बिल भेजता है। जिन्होंने मीटर नहीं लगवाए हैं उन उपभोक्ताओं से विभाग छह माह में 720 रुपये वसूलता है। इस प्रकार विभाग इन बगैर मीटर वाले उपभोक्ताओं से हर वर्ष 1.71 करोड़ रुपये वसूलता है। बावजूद इसके बाद हालात यह है कि उपभोक्ता पानी के मीटर लगवाने को ही तैयार नहीं हो रहे हैं। इसके लिए बाकायदा जनस्वास्थ्य विभाग की तरफ से उपभोक्ताओं को कई बार प्रेरित भी किया जा रहा है लेकिन फिर भी उपभोक्ता मानने को तैयार नहीं हैं। प्रतिवर्ष करीब 23860 उपभोक्ता से दोगुना बिल वसूला जा रहा है।
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मीटर लगवाने पर अतिरिक्त बिल नहीं
जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा मीटर लगवाने पर भी उपभोक्ताओं से फ्लैट बिल की तरह भी बिल वसूला जाएगा। यानी मीटर लगने के बाद ऐसा नहीं है कि पानी के उपभोग के अनुसार बिल आएगा। अधिकारियों का दावा है इससे बिल कम आने के बगैर नलों के कारण जो पानी व्यर्थ बहता है उस रोक लग जाएगी।
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नलों पर मीटर सभी उपभोक्ताओं को हर हाल में लगवाना होगा लेकिन ज्यादातर लोग इसके लिए तैयार ही नहीं हैं। बगैर मीटर वाले उपभोक्ताओं से एक साल 720 रुपये दोगुना बिल या जुर्माना राशि के तौर पर वसूला जा रहा है। हर वर्ष करीब 1.71 करोड़ की राशि आती है। - अशोक डागर, जेई जनस्वास्थ्य विभाग।