{"_id":"5a5e3ade4f1c1b88268b4c59","slug":"11516124894-rewari-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रदर्शन------32 से 34","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रदर्शन------32 से 34
Updated Tue, 16 Jan 2018 11:18 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरकार की नीतियों के खिलाफ किया प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। लैब तकनीशियनों ने सरकार की नई नीति के खिलाफ रोष प्रकट करते हुए मंगलवार को अपनी लैब बंद रखी। जिले से काफी संख्या में पैथोलोजिस्ट प्रदेश स्तरीय प्रदर्शन में शामिल होने के लिए करनाल पहुंचे। मेडिकल लैब तकनीशियन एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित हड़ताल से सैकड़ों मरीजों को बिना जांच कराए वापस लौटना पड़ा। लैब सहायकों का कहना था कि सरकार लैब में होने वाली जांच का सत्यापन एमबीबीएस डॉक्टरों से करा रही है। इससे उनकी कार्यशैली पर सवालिया निशान उठाया जा रहा है। सरकार लैब तकनीशियन काउंसिल का गठन करे। उन्होंने सरकार को 20 जनवरी तक का समय दिया है।
रेवाड़ी मेडिकल लैब तकनीशियन एसोसिएशन के जिला प्रधान मनोज यादव, महासचिव सुभाषचंद्र सहित अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि रेवाड़ी में करीब 140 लैब और करीब 300 पैथालॉजिस्ट कार्यरत हैं। सरकार की नई योजना से रेवाड़ी के साथ प्रदेश भर के करीब 15000 लैब का कार्य प्रभावित होगा। उनका कहना है कि एमबीबीएस से लैब की जांच कराने का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि उन्हें पैथोलॉजी से संबंधी मामलों की जानकारी नहीं होती। जितने भी पैथालॉजिस्ट लैब चला रहे हैं, वे सभी प्रशिक्षित हैं। सभी योग्य व अनुभवी तकनीकी सहायक सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थाओं से डिप्लोमा या डिग्री लिए हुए हैं। सरकार इनके कार्यों को सत्यापन के नाम पर एमबीबीएस की अनिवार्यता करने जा रही है। इससे लैब सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। सेवाएं महंगी हो जाएंगी और पारदर्शिता भी नहीं रहेगी। सत्यापन एमबीबीएस करेगा और इसके लिए शुल्क लगेगा, जिससे आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ेगा। इससे लैब जांच प्रक्रिया 25 से 30 फीसदी महंगी हो जाएगी। रेवाड़ी से रवाना होने से पूर्व लैब तकनीशियनों ने नारेबाजी की। इसमें मनोज वर्मा, नागिंद्र चौहान, रामौतार, सुभाष, प्रदीप, सुनील, सोनू, सतीश, धर्मवीर, अरविंद, मनीष, पवन यादव आदि थे।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। लैब तकनीशियनों ने सरकार की नई नीति के खिलाफ रोष प्रकट करते हुए मंगलवार को अपनी लैब बंद रखी। जिले से काफी संख्या में पैथोलोजिस्ट प्रदेश स्तरीय प्रदर्शन में शामिल होने के लिए करनाल पहुंचे। मेडिकल लैब तकनीशियन एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित हड़ताल से सैकड़ों मरीजों को बिना जांच कराए वापस लौटना पड़ा। लैब सहायकों का कहना था कि सरकार लैब में होने वाली जांच का सत्यापन एमबीबीएस डॉक्टरों से करा रही है। इससे उनकी कार्यशैली पर सवालिया निशान उठाया जा रहा है। सरकार लैब तकनीशियन काउंसिल का गठन करे। उन्होंने सरकार को 20 जनवरी तक का समय दिया है।
रेवाड़ी मेडिकल लैब तकनीशियन एसोसिएशन के जिला प्रधान मनोज यादव, महासचिव सुभाषचंद्र सहित अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि रेवाड़ी में करीब 140 लैब और करीब 300 पैथालॉजिस्ट कार्यरत हैं। सरकार की नई योजना से रेवाड़ी के साथ प्रदेश भर के करीब 15000 लैब का कार्य प्रभावित होगा। उनका कहना है कि एमबीबीएस से लैब की जांच कराने का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि उन्हें पैथोलॉजी से संबंधी मामलों की जानकारी नहीं होती। जितने भी पैथालॉजिस्ट लैब चला रहे हैं, वे सभी प्रशिक्षित हैं। सभी योग्य व अनुभवी तकनीकी सहायक सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थाओं से डिप्लोमा या डिग्री लिए हुए हैं। सरकार इनके कार्यों को सत्यापन के नाम पर एमबीबीएस की अनिवार्यता करने जा रही है। इससे लैब सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। सेवाएं महंगी हो जाएंगी और पारदर्शिता भी नहीं रहेगी। सत्यापन एमबीबीएस करेगा और इसके लिए शुल्क लगेगा, जिससे आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ेगा। इससे लैब जांच प्रक्रिया 25 से 30 फीसदी महंगी हो जाएगी। रेवाड़ी से रवाना होने से पूर्व लैब तकनीशियनों ने नारेबाजी की। इसमें मनोज वर्मा, नागिंद्र चौहान, रामौतार, सुभाष, प्रदीप, सुनील, सोनू, सतीश, धर्मवीर, अरविंद, मनीष, पवन यादव आदि थे।
विज्ञापन