{"_id":"64249ec0b14d30af4c000694","slug":"the-lawyer-fought-the-case-for-free-for-five-years-the-mother-said-could-not-even-perform-the-last-rites-now-we-are-happy-panipat-news-c-18-1-76269-2023-03-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: वकील ने पांच साल निशुल्क लड़ा केस, मां बोली- अंतिम संस्कार भी नहीं कर पाए थे, अब हम खुश है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: वकील ने पांच साल निशुल्क लड़ा केस, मां बोली- अंतिम संस्कार भी नहीं कर पाए थे, अब हम खुश है
विज्ञापन
पानीपत। ज्योति ने सिमरन को ज्योति बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। उसने अपने आईडी कार्ड, राशन कार्ड, फोन आदि सिमरन के शव के पास छोड़ दिए थे। चेहरे को जला दिया था ताकि किसी को शक न हो कि यह शव सिमरन का है। हर कोई शव को ज्योति का ही समझे, लेकिन वकील मोहम्मद आजम ने पांच साल तक निशुल्क व मजबूत पैरवी की और ज्योति को उम्रकैद की सजा दिलवाई।
वकील मोहम्मद आजम ने बताया कि उनके पास वर्ष 2018 में यह मामला आया था। उन्होंने सभी तथ्य इकट्ठा किए और पैरवी शुरू की। उन पर कई बार केस छोड़कर पीछे हटने का दबाव आया, लेकिन वह नहीं डरे। उन्होंने लगातार संघर्ष जारी रखा, जिसका नतीजा बुधवार को ज्योति को अदालत ने सजा सुनाई है।
उधर सिमरन की मां ऊषा ने कहा कि छह साल पहले ज्योति की साजिश के चलते उसके परिजनों ने ज्योति का शव समझकर सिमरन का अंतिम संस्कार कर दिया था। ज्योति और कृष्ण की गिरफ्तारी के बाद पता चला कि उनकी बेटी सिमरन की हत्या हो चुकी है और शव का अंतिम संस्कार भी हो चुका है। उन्हें महज बेटी की अस्थियां मिली थीं। अब ज्योति को सजा हुई तो वह खुश हैं। वह हर बार नवरात्र में व्रत रखकर यही दुआ करती थी कि उनकी बेटी को इंसाफ मिले और ज्योति व कृष्ण को फांसी की सजा मिले। माता रानी ने उनकी दुआ कबूल कर ली है।
विज्ञापन
विज्ञापन
वकील मोहम्मद आजम ने बताया कि उनके पास वर्ष 2018 में यह मामला आया था। उन्होंने सभी तथ्य इकट्ठा किए और पैरवी शुरू की। उन पर कई बार केस छोड़कर पीछे हटने का दबाव आया, लेकिन वह नहीं डरे। उन्होंने लगातार संघर्ष जारी रखा, जिसका नतीजा बुधवार को ज्योति को अदालत ने सजा सुनाई है।
विज्ञापन
उधर सिमरन की मां ऊषा ने कहा कि छह साल पहले ज्योति की साजिश के चलते उसके परिजनों ने ज्योति का शव समझकर सिमरन का अंतिम संस्कार कर दिया था। ज्योति और कृष्ण की गिरफ्तारी के बाद पता चला कि उनकी बेटी सिमरन की हत्या हो चुकी है और शव का अंतिम संस्कार भी हो चुका है। उन्हें महज बेटी की अस्थियां मिली थीं। अब ज्योति को सजा हुई तो वह खुश हैं। वह हर बार नवरात्र में व्रत रखकर यही दुआ करती थी कि उनकी बेटी को इंसाफ मिले और ज्योति व कृष्ण को फांसी की सजा मिले। माता रानी ने उनकी दुआ कबूल कर ली है।
विज्ञापन