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Panipat News: क्लेम न देना बीमा कंपनी को पड़ा भारी 6 % ब्याज के साथ देने होंगे 75 हजार
Tue, 03 Mar 2026 02:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Tue, 03 Mar 2026 02:28 AM IST
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। बीमारियों में विसंगति बताकर क्लेम खारिज करना बीमा कंपनी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में आदेश देते हुए कंपनी को इलाज का खर्च 75 हजार 425 रुपये देने के आदेश दिए हैं, साथ ही मानसिक उत्पीड़न के लिए पांच हजार रुपये और मुकदमे खर्च के रूप में 5,500 रुपये भी देने को कहा है।
मतलौडा के बादल ने आयोग में शिकायत देकर बताया कि उसने 21 जनवरी 2020 को एचडीएफसी एग्रो जनरल बीमा कंपनी से सुरक्षा पॉलिसी (सिल्वर स्मार्ट) ली थी। जिसकी कवर राशि तीन लाख रुपये थी। पॉलिसी की अवधि 21 जनवरी 2020 से 20 जनवरी 2021 तक थी। शिकायतकर्ता के अनुसार 20 मई 2020 को उसे टायफाइड, जटिल मलेरिया और लिवर संक्रमण की शिकायत होने पर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
वह 25 मई 2020 तक अस्पताल में भर्ती रहा और उपचार पर 75,425 रुपये खर्च हुए। सभी दस्तावेज और बिल बीमा कंपनी को सौंपे गए, लेकिन, चार अगस्त 2020 को कंपनी ने क्लेम यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मामले में विसंगतियां हैं और शर्तों के तहत दावा देय नहीं है। आयोग के अध्यक्ष डॉ. आरके डोगरा एवं सदस्यों ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेज का अवलोकन करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने अस्पताल में भर्ती होने, उपचार लेने और खर्च वहन करने के पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत किए हैं।
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आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बीमा कंपनी द्वारा मात्र आशंकाओं के आधार पर क्लेम खारिज करना उचित नहीं है। इसलिए कंपनी को 75,425 रुपये की राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित, शिकायत दायर करने की तिथि से भुगतान तक देने का निर्देश दिया गया। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि 45 दिन के भीतर भुगतान नहीं करने पर उक्त राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होगा।
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पानीपत। बीमारियों में विसंगति बताकर क्लेम खारिज करना बीमा कंपनी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में आदेश देते हुए कंपनी को इलाज का खर्च 75 हजार 425 रुपये देने के आदेश दिए हैं, साथ ही मानसिक उत्पीड़न के लिए पांच हजार रुपये और मुकदमे खर्च के रूप में 5,500 रुपये भी देने को कहा है।
मतलौडा के बादल ने आयोग में शिकायत देकर बताया कि उसने 21 जनवरी 2020 को एचडीएफसी एग्रो जनरल बीमा कंपनी से सुरक्षा पॉलिसी (सिल्वर स्मार्ट) ली थी। जिसकी कवर राशि तीन लाख रुपये थी। पॉलिसी की अवधि 21 जनवरी 2020 से 20 जनवरी 2021 तक थी। शिकायतकर्ता के अनुसार 20 मई 2020 को उसे टायफाइड, जटिल मलेरिया और लिवर संक्रमण की शिकायत होने पर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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वह 25 मई 2020 तक अस्पताल में भर्ती रहा और उपचार पर 75,425 रुपये खर्च हुए। सभी दस्तावेज और बिल बीमा कंपनी को सौंपे गए, लेकिन, चार अगस्त 2020 को कंपनी ने क्लेम यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मामले में विसंगतियां हैं और शर्तों के तहत दावा देय नहीं है। आयोग के अध्यक्ष डॉ. आरके डोगरा एवं सदस्यों ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेज का अवलोकन करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने अस्पताल में भर्ती होने, उपचार लेने और खर्च वहन करने के पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत किए हैं।
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आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बीमा कंपनी द्वारा मात्र आशंकाओं के आधार पर क्लेम खारिज करना उचित नहीं है। इसलिए कंपनी को 75,425 रुपये की राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित, शिकायत दायर करने की तिथि से भुगतान तक देने का निर्देश दिया गया। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि 45 दिन के भीतर भुगतान नहीं करने पर उक्त राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होगा।