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संशोधित: आंधी से बचने के लिए फैक्टरी में घुसे किशोर की छज्जा गिरने से मौत
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पानीपत। तेज आंधी और फिर बारिश की वजह से बुधवार को एक घर का चिराग बुझ गया। कुटानी रोड पर ड्रेन के पास आंधी से बचने के लिए फैक्टरी में घुसे किशोर की दूसरी मंजिल का छज्जा गिरने से मौत हो गई। स्थानीय लोगों की सूचना पर किला थाने की पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए शवगृह में रखवा दिया है। पोस्टमार्टम बृहस्पतिवार को होगा। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
दलबीर कॉलोनी निवासी विवेक (13) पुत्र देवेंद्र आठवीं कक्षा का छात्र था। वह बुधवार को स्कूल से आने के बाद अपने चाचा राजेंद्र के साथ साइकिल पर कुटानी रोड पर ड्रेन के पास स्थित रवि रावल पावरलूम फैक्टरी गया था। राजेंद्र ने बताया कि जैसे ही वे दोनों लोग फैक्टरी के बाहर पहुंचे, अचानक तेज आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई। आंधी-बारिश से बचने के लिए विवेक फैक्टरी में जाने लगा। उसी दौरान छज्जा टूट कर उसके सिर पर गिर गया। इससे उसे गंभीर चोट आई और वह बेहोश हो गया। उसे सनौली रोड स्थित निजी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से डॉक्टरों ने सिविल अस्पताल रेफर कर दिया। सिविल अस्पताल में डॉक्टरों ने विवेक को मृत घोषित कर दिया। पिता देवेंद्र ने बताया कि उसके तीन बेटे थे। बड़ा बेटा आनंद किशोर और छोटा बेटा हरिओम हैं। पत्नी नन्हीं देवी गृहिणी हैं।
चाचा राजेंद्र ने बताया कि विवेक का उससे काफी लगाव था। स्कूल से छुट्टी के बाद विवेक अक्सर उसके साथ फैक्टरी आ जाता था। वह फैक्टरी में काम करता और विवेक खेलता रहता था।
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दलबीर कॉलोनी निवासी विवेक (13) पुत्र देवेंद्र आठवीं कक्षा का छात्र था। वह बुधवार को स्कूल से आने के बाद अपने चाचा राजेंद्र के साथ साइकिल पर कुटानी रोड पर ड्रेन के पास स्थित रवि रावल पावरलूम फैक्टरी गया था। राजेंद्र ने बताया कि जैसे ही वे दोनों लोग फैक्टरी के बाहर पहुंचे, अचानक तेज आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई। आंधी-बारिश से बचने के लिए विवेक फैक्टरी में जाने लगा। उसी दौरान छज्जा टूट कर उसके सिर पर गिर गया। इससे उसे गंभीर चोट आई और वह बेहोश हो गया। उसे सनौली रोड स्थित निजी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से डॉक्टरों ने सिविल अस्पताल रेफर कर दिया। सिविल अस्पताल में डॉक्टरों ने विवेक को मृत घोषित कर दिया। पिता देवेंद्र ने बताया कि उसके तीन बेटे थे। बड़ा बेटा आनंद किशोर और छोटा बेटा हरिओम हैं। पत्नी नन्हीं देवी गृहिणी हैं।
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चाचा राजेंद्र ने बताया कि विवेक का उससे काफी लगाव था। स्कूल से छुट्टी के बाद विवेक अक्सर उसके साथ फैक्टरी आ जाता था। वह फैक्टरी में काम करता और विवेक खेलता रहता था।
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