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फंडस कैमरे से रेटिना की जांच शुरू
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पानीपत। सिविल अस्पताल में नेत्र रोगियों के लिए राहत भरी खबर है। अब नेत्र रोगियों को रेटिना की जांच के लिए खानपुर मेडिकल कॉलेज नहीं जाना पड़ेगा। सिविल अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में फंडस कैमरा उपलब्ध कराया गया है। इस कैमरे से रेटिना की फोटो लेकर नेत्र उसकी वास्तविक स्थिति जान सकते हैं। कैमरे में आई तस्वीर के हिसाब से ही डॉक्टर उसका इलाज कर सकते हैं। हर रोज कैमरे से तीन से चार मरीजों की जांच हो रही है। एनपीसीबी की ओर से ये कैमरा उपलब्ध कराया गया है।
फंडस कैमरे से रेटिना की जांच की तकनीक जर्मनी से ली गई है। कैमरे को मरीज की आंख पर लगाकर फोटो ली जाती है। इसके बाद डायबिटीज के असर का कैलकुलेशन किया जाता है। मात्र तीन मिनट में मशीन फंडस (पर्दा) को कितना खतरा है यह बता देती है।
40 वर्ष से अधिक वालों को ज्यादा खतरा
डायबिटीज की रीडिंग लंबे समय से बढ़े रहने के कारण आंखों के पर्दे में ब्लीडिंग होने लगती है। यह धीरे होती है, इसलिए मरीज को पता नहीं चल पाता। 40 वर्ष से अधिक उम्र होने के बाद रेटिना को खतरा होने की संभावना अधिक होती है।
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सिविल अस्पताल में आई ओपीडी 200 से अधिक
सिविल अस्पताल में आई ओपीडी 200 के पार हो चुकी है। पांच साल पहले ये ओपीडी महज 60-80 के बीच होती थी। पांच साल में हालात बदले हैं। अब अस्पताल में तीन नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं। आंखों की बीमारियों की तीन प्रकार की दवाएं हैं। कैमरे से रेटिना की जांच हो रही है। कैंप लगाकर मरीजों को सिविल अस्पताल में इलाज के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
रेटिना के मरीजों को अब नहीं जाना पड़ेगा खानपुर : डॉ. वीरेंद्र
रेटिना की जांच के लिए अब अस्पताल में फंडस कैमरा उपलब्ध कराया गया है। डॉक्टर अब कैमरे से रेटिना की फोटो लेकर रेटिना की वास्तविक स्थिति जान सकते हैं। अब मरीजों को रेटिना की जांच के लिए खानपुर मेडिकल कॉलेज नहीं जाना पड़ेगा।
- डॉ. वीरेंद्र हुड्डा, डिप्टी सिविल सर्जन एवं नेत्र विभागाध्यक्ष
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फंडस कैमरे से रेटिना की जांच की तकनीक जर्मनी से ली गई है। कैमरे को मरीज की आंख पर लगाकर फोटो ली जाती है। इसके बाद डायबिटीज के असर का कैलकुलेशन किया जाता है। मात्र तीन मिनट में मशीन फंडस (पर्दा) को कितना खतरा है यह बता देती है।
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40 वर्ष से अधिक वालों को ज्यादा खतरा
डायबिटीज की रीडिंग लंबे समय से बढ़े रहने के कारण आंखों के पर्दे में ब्लीडिंग होने लगती है। यह धीरे होती है, इसलिए मरीज को पता नहीं चल पाता। 40 वर्ष से अधिक उम्र होने के बाद रेटिना को खतरा होने की संभावना अधिक होती है।
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सिविल अस्पताल में आई ओपीडी 200 से अधिक
सिविल अस्पताल में आई ओपीडी 200 के पार हो चुकी है। पांच साल पहले ये ओपीडी महज 60-80 के बीच होती थी। पांच साल में हालात बदले हैं। अब अस्पताल में तीन नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं। आंखों की बीमारियों की तीन प्रकार की दवाएं हैं। कैमरे से रेटिना की जांच हो रही है। कैंप लगाकर मरीजों को सिविल अस्पताल में इलाज के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
रेटिना के मरीजों को अब नहीं जाना पड़ेगा खानपुर : डॉ. वीरेंद्र
रेटिना की जांच के लिए अब अस्पताल में फंडस कैमरा उपलब्ध कराया गया है। डॉक्टर अब कैमरे से रेटिना की फोटो लेकर रेटिना की वास्तविक स्थिति जान सकते हैं। अब मरीजों को रेटिना की जांच के लिए खानपुर मेडिकल कॉलेज नहीं जाना पड़ेगा।
- डॉ. वीरेंद्र हुड्डा, डिप्टी सिविल सर्जन एवं नेत्र विभागाध्यक्ष