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Panipat News: कच्चे क्लर्कों के चलते संपत्ति कर के काम अटके
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पानीपत। नगर निगम की संपत्तिकर शाखा में कच्चे यानी आउटसोर्स के कर्मचारियों को वार्ड क्लर्कों की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप रखी है जबकि पक्के कर्मचारी खाली बैठे हैं। निगम के ये कच्चे कर्मचारी इतने अनट्रेंड हैं कि इनमें से कई को तो हिंदी की टाइपिंग तक नहीं आती। जिसकी वजह से लोगों के काम लंबित रहते हैं और शहर के लोग निगम कार्यालय के चक्कर काटने पर मजबूर हैं।
उल्लेखनीय है कि निगम में वार्ड क्लर्क का काम बड़ा संवेदनशील होता है। इस पद के कर्मचारी निगम में आने वाली संपत्तिकर की त्रुटियों को ठीक करने का काम करते हैं। इनके पास नाम, पता, मोबाइल नंबर, एरिया, कैटेगरी, टैक्स की त्रुटियां ठीक करने की शक्ति होती है। जबकि निगम अधिकारियों ने अपने पक्के क्लर्कों की ड्यूटी सिर्फ कैंप में लगाई थी। इन कैंप के बाद अब करीब पांच पक्के क्लर्कों के पास कोई महत्वपूर्ण काम नहीं है। जबकि आउटसोर्स के छह से सात क्लर्क संपत्ति कर की पूरी बागडोर संभाले हुए हैं। हैरानी की बात ये है कि कच्चे कर्मचारियों में से ज्यादातर इस काम के योग्य तक नहीं है। अगर किसी को हिंदी में नोटिंग बनाने का काम दिया जाए तो वह नोटिंग तक तैयार नहीं कर पाते। बावजूद इनको कई माह से वार्ड क्लर्क की पूरी जिम्मेदारी सौंप दी गई है। जब पक्के कर्मचारी हड़ताल पर गए थे तो इन आउटसोर्स कर्मचारियों को वार्ड क्लर्क बना दिया गया। इसके बाद किसी अधिकारी ने इस पर संज्ञान नहीं लिया और इनकी ये पोस्ट पक्की बन गई। जिससे शहर के लोगों की परेशानी भी बढ़ने लगी।
शायद यही वजह है कि निगम में सबसे ज्यादा शिकायतें संपत्तिकर शाखा की आती हैं। सीएम फ्लाइंग भी कई बार संपत्तिकर शाखा के बड़े प्रकरण उछाल चुकी है। फिलहाल भी कुछ बड़े मामले विचाराधीन चल रहे हैं। इस बारे में संयुक्त आयुक्त मनी त्यागी का कहना है कि जल्द ही वार्ड क्लर्क की पोस्ट में फेरबदल की जाएगी। इसके बाद योग्यता के अनुसार क्लर्कों को काम दिया जाएगा।
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उल्लेखनीय है कि निगम में वार्ड क्लर्क का काम बड़ा संवेदनशील होता है। इस पद के कर्मचारी निगम में आने वाली संपत्तिकर की त्रुटियों को ठीक करने का काम करते हैं। इनके पास नाम, पता, मोबाइल नंबर, एरिया, कैटेगरी, टैक्स की त्रुटियां ठीक करने की शक्ति होती है। जबकि निगम अधिकारियों ने अपने पक्के क्लर्कों की ड्यूटी सिर्फ कैंप में लगाई थी। इन कैंप के बाद अब करीब पांच पक्के क्लर्कों के पास कोई महत्वपूर्ण काम नहीं है। जबकि आउटसोर्स के छह से सात क्लर्क संपत्ति कर की पूरी बागडोर संभाले हुए हैं। हैरानी की बात ये है कि कच्चे कर्मचारियों में से ज्यादातर इस काम के योग्य तक नहीं है। अगर किसी को हिंदी में नोटिंग बनाने का काम दिया जाए तो वह नोटिंग तक तैयार नहीं कर पाते। बावजूद इनको कई माह से वार्ड क्लर्क की पूरी जिम्मेदारी सौंप दी गई है। जब पक्के कर्मचारी हड़ताल पर गए थे तो इन आउटसोर्स कर्मचारियों को वार्ड क्लर्क बना दिया गया। इसके बाद किसी अधिकारी ने इस पर संज्ञान नहीं लिया और इनकी ये पोस्ट पक्की बन गई। जिससे शहर के लोगों की परेशानी भी बढ़ने लगी।
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शायद यही वजह है कि निगम में सबसे ज्यादा शिकायतें संपत्तिकर शाखा की आती हैं। सीएम फ्लाइंग भी कई बार संपत्तिकर शाखा के बड़े प्रकरण उछाल चुकी है। फिलहाल भी कुछ बड़े मामले विचाराधीन चल रहे हैं। इस बारे में संयुक्त आयुक्त मनी त्यागी का कहना है कि जल्द ही वार्ड क्लर्क की पोस्ट में फेरबदल की जाएगी। इसके बाद योग्यता के अनुसार क्लर्कों को काम दिया जाएगा।
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