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हरियाली का संकल्प : पानीपत के ग्रीन कपल डॉ. राज और डॉ. हेमा का नैनो जंगल अभियान
Fri, 05 Jun 2026 12:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Fri, 05 Jun 2026 12:52 AM IST
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पौधरोपण करते डॉ. राज रमन और हेमा रमन। स्रोत : स्वयं
पानीपत। तेजी से बदलते शहरी परिदृश्य में जहां कंक्रीट के जंगल तेजी से बढ़ रहे हैं और हरियाली लगातार सिमटती जा रही है, वहीं पानीपत के ग्रीन कपल के रूप में पहचाने जाने वाले डॉ. राज और डॉ. हेमा पिछले दो दशक से नैनो जंगल अभियान चला रहे हैं। वे आज केवल पेड़ लगाने तक सीमित नहीं हैं बल्कि यह एक सामाजिक चेतना और जनभागीदारी का सशक्त आंदोलन बन चुका है।
डॉ. राज और डॉ. हेमा ने बताया कि नई राह संस्था बनाकर नैनो जंगल पर काम शुरू किया। यहां पीपल, बरगद, शीशम, टीक, गुलमोहर, अमलतास, आंवला और चांदनी जैसी कई प्रजातियों के पौधे लगाए हैं। यहां पौधे लगाने के साथ इनका संरक्षण भी किया जाता है। कई स्थानों पर आज ये पौधे घने और फलदार वृक्ष बन चुके हैं।
पेड़ नहीं बचाओगे तो ऑक्सीजन को तरस जाओगे
डॉ. राज और डॉ. हेमा ने बताया कि कोरोना काल में ऑक्सीजन की जरूरत हर किसी ने महसूस की। उन्होंने लोगों को संगठित कर पौधे लगाने शुरू किए। उनका मानना है कि पेड़ लगाना एक दिन का काम नहीं, बल्कि वर्षों तक निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है। एक छोटा सा पौधा जब पेड़ बनता है तो वह आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन का आधार बन जाता है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए वे समाज को यह संदेश देते हैं कि हर व्यक्ति अपने हिस्से का योगदान जरूर दें।
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डॉ. राज और डॉ. हेमा ने बताया कि नई राह संस्था बनाकर नैनो जंगल पर काम शुरू किया। यहां पीपल, बरगद, शीशम, टीक, गुलमोहर, अमलतास, आंवला और चांदनी जैसी कई प्रजातियों के पौधे लगाए हैं। यहां पौधे लगाने के साथ इनका संरक्षण भी किया जाता है। कई स्थानों पर आज ये पौधे घने और फलदार वृक्ष बन चुके हैं।
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पेड़ नहीं बचाओगे तो ऑक्सीजन को तरस जाओगे
डॉ. राज और डॉ. हेमा ने बताया कि कोरोना काल में ऑक्सीजन की जरूरत हर किसी ने महसूस की। उन्होंने लोगों को संगठित कर पौधे लगाने शुरू किए। उनका मानना है कि पेड़ लगाना एक दिन का काम नहीं, बल्कि वर्षों तक निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है। एक छोटा सा पौधा जब पेड़ बनता है तो वह आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन का आधार बन जाता है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए वे समाज को यह संदेश देते हैं कि हर व्यक्ति अपने हिस्से का योगदान जरूर दें।
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