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पंजाब के खिलाड़ी को चित कर नितेश ने जीता स्वर्ण
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पानीपत। विजेता नितेश साथ में अन्य।
- फोटो : Panipat
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पानीपत। बिहार में आयोजित कुश्ती प्रतियोगिता में पानीपत के खिलाड़ी ने स्वर्ण पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया है। एसडी पीजी कॉलेज के छात्र और पहलवान नितेश ने प्रतियोगिता में पंजाब के खिलाड़ी नरेंद्र को चित कर स्वर्णपदक अपने नाम किया है।
नितेश ने कुश्ती की ग्रीको रोमन श्रेणी में यह पदक हासिल किया है। वह मंगलवार को बिहार में आयोजित नेशनल रेस्लिंग (कुश्ती) चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए गए थे। 97 किलोग्राम भार वर्ग में ग्रीको रोमन के लिए अपनी दावेदारी पेश की। फाइनल में उनका सामना पंजाब के खिलाड़ी नरेंद्र से हुआ। उसे चित कर उन्होंने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया।
नितेश के पिता आनंद सिवाच ने हमेशा ही बेटे को खेलों के लिए प्रोत्साहित किया। पिता की प्रेरणा से ही नितेश कुश्ती के खेल में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। पिता का सपना है कि बेटा ओलंपिक खेले। उन्होंने बेटे के साथ ही बेटी नैंसी को भी खेल के लिए प्रेरित किया है। दोनों को 12 वर्ष की उम्र में ही प्रोफेशनल खेलों में लेकर आए, इसी का नतीजा है कि नितेश लगातार पदक जीत रहे हैं। आनंद का दूध का कारोबार है। नितेश ने बताया कि कई बार घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रही, लेकिन पिता ने कभी उसकी प्रैक्टिस बंद नहीं होने दी। उन्होंने हमेशा कहा कि तुम सिर्फ खेल पर ध्यान दो।
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नितेश ने कुश्ती की ग्रीको रोमन श्रेणी में यह पदक हासिल किया है। वह मंगलवार को बिहार में आयोजित नेशनल रेस्लिंग (कुश्ती) चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए गए थे। 97 किलोग्राम भार वर्ग में ग्रीको रोमन के लिए अपनी दावेदारी पेश की। फाइनल में उनका सामना पंजाब के खिलाड़ी नरेंद्र से हुआ। उसे चित कर उन्होंने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया।
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नितेश के पिता आनंद सिवाच ने हमेशा ही बेटे को खेलों के लिए प्रोत्साहित किया। पिता की प्रेरणा से ही नितेश कुश्ती के खेल में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। पिता का सपना है कि बेटा ओलंपिक खेले। उन्होंने बेटे के साथ ही बेटी नैंसी को भी खेल के लिए प्रेरित किया है। दोनों को 12 वर्ष की उम्र में ही प्रोफेशनल खेलों में लेकर आए, इसी का नतीजा है कि नितेश लगातार पदक जीत रहे हैं। आनंद का दूध का कारोबार है। नितेश ने बताया कि कई बार घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रही, लेकिन पिता ने कभी उसकी प्रैक्टिस बंद नहीं होने दी। उन्होंने हमेशा कहा कि तुम सिर्फ खेल पर ध्यान दो।
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