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Panipat News: आठ कक्षाओं में 406 बच्चों की पढ़ाई, डेढ़ साल से नए कमरों का इंतजार
Wed, 02 Sep 2026 06:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Wed, 02 Sep 2026 06:02 AM IST
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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय लोहारी का प्रवेश द्वार।
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। एक ओर छह जर्जर कमरों को गिराकर डेढ़ साल से नए कमरों का इंतजार हो रहा है, वहीं दूसरी ओर प्राइमरी विंग के छह और कमरे जर्जर घोषित होने के बावजूद उन्हें गिराने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। इसका खामियाजा लोहारी के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के 406 विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। स्कूल में महज आठ कमरों में कक्षाएं संचालित हो रही हैं। कमरों की कमी इतनी गंभीर है कि कई कक्षाएं बरामदों और स्कूल परिसर में बने शेड के नीचे लगाने की मजबूरी है।
विज्ञान और कंप्यूटर की अलग-अलग लैब के लिए भी स्कूल में पर्याप्त जगह नहीं है। दोनों विषयों की लैब एक ही कमरे में कंपोजिट लैब के रूप में संचालित हो रही हैं। जरूरत पड़ने पर इसी कमरे में कक्षा भी लगानी पड़ती है। ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ-साथ प्रायोगिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।
मंगलवार को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय लोहारी और राजकीय प्राथमिक पाठशाला लोहारी की पड़ताल में स्कूल की व्यवस्थाओं की यह तस्वीर सामने आई। विद्यालय में पहले कुल 23 कमरे थे। करीब डेढ़ साल पहले छह कमरों को जर्जर घोषित कर गिरा दिया गया था। इनके स्थान पर नए कमरे बनाने का प्रस्ताव भी करीब डेढ़ साल पहले भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक निर्माण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है।
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इसी बीच प्राइमरी विंग के छह और कमरों को जर्जर घोषित कर दिया गया। इन कमरों के आसपास रस्सियां बांधकर विद्यार्थियों का प्रवेश रोक दिया गया है। पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारी इन कमरों को गिराने के लिए सर्वे भी कर चुके हैं, लेकिन सर्वे के बाद भी इन्हें गिराने की कार्रवाई शुरू नहीं हुई।
इससे स्कूल के सामने दोहरी समस्या खड़ी हो गई है। एक ओर पुराने छह कमरे गिराए जाने के बाद नए कमरों का निर्माण लंबित है, वहीं दूसरी ओर छह कंडम कमरे परिसर में जगह घेर रहे हैं। सुरक्षित कमरों की संख्या कम होने से कक्षाओं के संचालन में लगातार परेशानी बढ़ रही है।
दो पालियों की व्यवस्था खत्म होने से बढ़ी परेशानी
पहले स्कूल दो पालियों में संचालित होता था। सुबह की पाली में छठी से 12वीं तक की कक्षाएं और दूसरी पाली में पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं लगती थीं। प्राथमिक विंग में विद्यार्थियों की संख्या कम होने के बाद स्कूल को एक पाली में कर दिया गया। अब प्राइमरी की कक्षाएं भी पहली पाली में ही लगती हैं।
पहले से ही कमरों की कमी से जूझ रहे स्कूल में एक पाली में सभी कक्षाएं संचालित होने के बाद समस्या और बढ़ गई है। पर्याप्त कमरे नहीं होने के कारण स्कूल प्रबंधन को बरामदे और शेड के नीचे कक्षाएं लगाने की व्यवस्था करनी पड़ रही है।
पांच विषयों के शिक्षक नहीं, स्वीपर और चौकीदार के पद भी खाली
विद्यालय के छठी से 12वीं तक 294 और प्राइमरी विंग में 112 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। स्कूल में राजनीतिक विज्ञान, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान, ड्राइंग और पीटीआई के एक-एक शिक्षक के पद खाली हैं। इसके अलावा स्वीपर और चौकीदार के पद भी रिक्त हैं। वर्तमान में स्कूल में एक माली और एक चपरासी कार्यरत हैं।
पेयजल की आपूर्ति भी बिजली पर निर्भर
विद्यालय में पेयजल की व्यवस्था भी चुनौतीपूर्ण है। गांव का पानी खराब होने के कारण स्कूल में वाटर टैंक के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जाती है। बिजली गुल होने पर पानी की सप्लाई भी प्रभावित हो जाती है। हालांकि, विद्यार्थियों के लिए लड़के और लड़कियों के अलग-अलग शौचालय उपलब्ध हैं।
विद्यालय इंचार्ज विजेंद्र सिंह ने स्कूल की व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी दी। प्रधानाचार्य के सेवानिवृत्त होने के बाद स्कूल की डीडी पावर राजकीय स्कूल सुताना की प्रधानाचार्या नीलम शर्मा के पास है। उन्होंने बताया कि स्कूल में कमरों के निर्माण का प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
स्कूल की स्थिति एक नजर में
406 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं
8 कमरों में कक्षाएं संचालित
6 कमरे डेढ़ साल पहले गिराए गए
6 प्राइमरी विंग के कमरे कंडम घोषित
5 विषयों के शिक्षक कम
1 कमरे में साइंस-कंप्यूटर कंपोजिट लैब
1 माली और 1 चपरासी कार्यरत
स्वीपर और चौकीदार के पद खाली
मंजूरी मिलते ही बनेंगे नए कमरे : डीईओ
राकेश बूरा, जिला शिक्षा अधिकारी, ने कहा कि राजकीय स्कूल लोहारी में कमरों की कमी की जानकारी है। नए कमरों का प्रस्ताव निदेशालय भेजा गया है। इसकी मंजूरी मिलते ही स्कूल में नए कमरे बनवाए जाएंगे।
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पानीपत। एक ओर छह जर्जर कमरों को गिराकर डेढ़ साल से नए कमरों का इंतजार हो रहा है, वहीं दूसरी ओर प्राइमरी विंग के छह और कमरे जर्जर घोषित होने के बावजूद उन्हें गिराने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। इसका खामियाजा लोहारी के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के 406 विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। स्कूल में महज आठ कमरों में कक्षाएं संचालित हो रही हैं। कमरों की कमी इतनी गंभीर है कि कई कक्षाएं बरामदों और स्कूल परिसर में बने शेड के नीचे लगाने की मजबूरी है।
विज्ञान और कंप्यूटर की अलग-अलग लैब के लिए भी स्कूल में पर्याप्त जगह नहीं है। दोनों विषयों की लैब एक ही कमरे में कंपोजिट लैब के रूप में संचालित हो रही हैं। जरूरत पड़ने पर इसी कमरे में कक्षा भी लगानी पड़ती है। ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ-साथ प्रायोगिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।
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मंगलवार को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय लोहारी और राजकीय प्राथमिक पाठशाला लोहारी की पड़ताल में स्कूल की व्यवस्थाओं की यह तस्वीर सामने आई। विद्यालय में पहले कुल 23 कमरे थे। करीब डेढ़ साल पहले छह कमरों को जर्जर घोषित कर गिरा दिया गया था। इनके स्थान पर नए कमरे बनाने का प्रस्ताव भी करीब डेढ़ साल पहले भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक निर्माण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है।
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इसी बीच प्राइमरी विंग के छह और कमरों को जर्जर घोषित कर दिया गया। इन कमरों के आसपास रस्सियां बांधकर विद्यार्थियों का प्रवेश रोक दिया गया है। पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारी इन कमरों को गिराने के लिए सर्वे भी कर चुके हैं, लेकिन सर्वे के बाद भी इन्हें गिराने की कार्रवाई शुरू नहीं हुई।
इससे स्कूल के सामने दोहरी समस्या खड़ी हो गई है। एक ओर पुराने छह कमरे गिराए जाने के बाद नए कमरों का निर्माण लंबित है, वहीं दूसरी ओर छह कंडम कमरे परिसर में जगह घेर रहे हैं। सुरक्षित कमरों की संख्या कम होने से कक्षाओं के संचालन में लगातार परेशानी बढ़ रही है।
दो पालियों की व्यवस्था खत्म होने से बढ़ी परेशानी
पहले स्कूल दो पालियों में संचालित होता था। सुबह की पाली में छठी से 12वीं तक की कक्षाएं और दूसरी पाली में पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं लगती थीं। प्राथमिक विंग में विद्यार्थियों की संख्या कम होने के बाद स्कूल को एक पाली में कर दिया गया। अब प्राइमरी की कक्षाएं भी पहली पाली में ही लगती हैं।
पहले से ही कमरों की कमी से जूझ रहे स्कूल में एक पाली में सभी कक्षाएं संचालित होने के बाद समस्या और बढ़ गई है। पर्याप्त कमरे नहीं होने के कारण स्कूल प्रबंधन को बरामदे और शेड के नीचे कक्षाएं लगाने की व्यवस्था करनी पड़ रही है।
पांच विषयों के शिक्षक नहीं, स्वीपर और चौकीदार के पद भी खाली
विद्यालय के छठी से 12वीं तक 294 और प्राइमरी विंग में 112 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। स्कूल में राजनीतिक विज्ञान, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान, ड्राइंग और पीटीआई के एक-एक शिक्षक के पद खाली हैं। इसके अलावा स्वीपर और चौकीदार के पद भी रिक्त हैं। वर्तमान में स्कूल में एक माली और एक चपरासी कार्यरत हैं।
पेयजल की आपूर्ति भी बिजली पर निर्भर
विद्यालय में पेयजल की व्यवस्था भी चुनौतीपूर्ण है। गांव का पानी खराब होने के कारण स्कूल में वाटर टैंक के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जाती है। बिजली गुल होने पर पानी की सप्लाई भी प्रभावित हो जाती है। हालांकि, विद्यार्थियों के लिए लड़के और लड़कियों के अलग-अलग शौचालय उपलब्ध हैं।
विद्यालय इंचार्ज विजेंद्र सिंह ने स्कूल की व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी दी। प्रधानाचार्य के सेवानिवृत्त होने के बाद स्कूल की डीडी पावर राजकीय स्कूल सुताना की प्रधानाचार्या नीलम शर्मा के पास है। उन्होंने बताया कि स्कूल में कमरों के निर्माण का प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
स्कूल की स्थिति एक नजर में
406 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं
8 कमरों में कक्षाएं संचालित
6 कमरे डेढ़ साल पहले गिराए गए
6 प्राइमरी विंग के कमरे कंडम घोषित
5 विषयों के शिक्षक कम
1 कमरे में साइंस-कंप्यूटर कंपोजिट लैब
1 माली और 1 चपरासी कार्यरत
स्वीपर और चौकीदार के पद खाली
मंजूरी मिलते ही बनेंगे नए कमरे : डीईओ
राकेश बूरा, जिला शिक्षा अधिकारी, ने कहा कि राजकीय स्कूल लोहारी में कमरों की कमी की जानकारी है। नए कमरों का प्रस्ताव निदेशालय भेजा गया है। इसकी मंजूरी मिलते ही स्कूल में नए कमरे बनवाए जाएंगे।

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय लोहारी का प्रवेश द्वार।

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय लोहारी का प्रवेश द्वार।

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय लोहारी का प्रवेश द्वार।

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय लोहारी का प्रवेश द्वार।