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Panipat News: निरंकारी संत समागम 31 अक्तूबर से, एक माह में सेवादार 600 एकड़ पंडाल को देंगे मूर्त रूप

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 29 Sep 2025 02:35 AM IST
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Nirankari Sant Samagam from October 31, volunteers will give shape to 600 acres of pandal in a month
सेवा कार्यों का शुभारंभ करते सतगुरु सुदीक्षा महाराज। संवाद
- सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने की सेवा कार्यों की शुरुआत, कहा- आत्म मंथन से मन में व्याप्त कुरीतियों को दूर करें
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संवाद न्यूज एजेंसी
समालखा। संत निरंकारी का 78वां वार्षिक निरंकारी संत समागत 31 अक्तूबर से 3 नवंबर तक भोड़वाल माजरी स्थित समागम स्थल पर होगा। इसकी तैयारियों के लिए सेवा कार्य रविवार को शुरू किए गए। सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज व राजपिता रमित ने शुरुआत की। इनके साथ सेवा दल के सदस्यों ने काम शुरू कर दिया। करीब 600 एकड़ में फैले समागम स्थल को एक महीने में मूर्त रूप दिया जाएगा। जिसमें प्रदेश व देशभर से सेवा दल के सदस्य सेवा कार्य करेंगे।
सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने कहा कि इस विविधताओं से भरे संसार में जहां मानवता अनेक रूपों, भाषाओं, संस्कृतियों, जातियों और धर्मों में विभाजित दिखाई देती हैं, वहीं एक शाश्वत सत्य है जो हम सभी को एक अटूट सूत्र में पिरोता है। हम सब एक ही परमात्मा की संतान हैं, जो हमें समय-समय पर अनके रूपों में आकर प्रेम, करुणा, समानता और मानवता का दिव्य संदेश देते है। हमारे भिन्न-भिन्न रूप और रहन-सहन होते हुए भी हमारे भीतर वही एक जैसी चेतना, जीवन-शक्ति प्रवाहित होती है, जो हमें एक-दूसरे से जोड़ती है। सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज व निरंकारी राजपिता रमित को संत निरंकारी मंडल की प्रधान राजकुमारी व सचिव जोगिंदर सुखीजा ने पुष्प गुच्छ भेंट किया।
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समागम का शीर्षक आत्म मंथन
इस बार समागत का शीर्षक आत्म मंथन है। जो हमें अपने भीतर झांकने, विचारों और कर्मों को आत्मज्ञान से शुद्ध करने की प्रेरणा देता है। यह यात्रा सतगुरु द्वारा प्रदत्त ब्रह्मज्ञान से आरंभ होती है, जो आत्मिक शांति, आनंद और मोक्ष का द्वार खोलती है। मानवता का यह दिव्य उत्सव न केवल मिशन के अनुयायियों के लिए बल्कि हर धर्म, जाति, भाषा और देश के मानव प्रेमियों के लिए है। मानवता का यह दिव्य उत्सव न केवल मिशन के अनुयायियों के लिए अपितु हर धर्म, जाति, भाषा और देश के मानव प्रेमियों के लिए है जो खुले हृदय से सभी संतों का स्वागत करता है। यह वह भूमि है जहां इंसानियत, आध्यात्मिकता और सेवा भाव का अनुपम संगम दृश्यमान होता है। एक ऐसी अलौकिक अनुभूति जो शब्दों से परे हैं।

सेवा कार्यों का शुभारंभ करते सतगुरु सुदीक्षा महाराज। संवाद

सेवा कार्यों का शुभारंभ करते सतगुरु सुदीक्षा महाराज। संवाद

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