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भ्रांतियां भारी, पिछले एक साल में महज 18 पुरुषों ने कराई नसबंदी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 06 Sep 2021 01:53 AM IST
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Misconceptions heavy, in last one year only 18 men got vasectomy
जनसंख्या नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे परिवार नियोजन कार्यक्रम का कोई खास प्रभाव नहीं पड़ रहा है। अब भी लोग सरकार के कार्यक्रम में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग को पिछले एक साल में 200 पुरुषों की नसबंदी का लक्ष्य मिला था, लेकिन विभाग महज 18 पुरुषों की ही नसबंदी कर पाया है। जबकि एक साल में 1331 महिलाओं ने नलबंदी कराई है। पिछले पांच साल में 438 पुरुषों ने ही नसबंदी कराई है, जबकि इस मामले में महिलाएं पुरुषों से काफी आगे हैं। इतने ही सालों में 8223 महिलाओं ने नलबंदी कराई है। स्वास्थ्य विभाग के 1994 के आंकड़े के अनुसार महिलाओं के मुकाबले में महज 4 फीसदी पुरुष ही नसबंदी कराते हैं। आज 27 साल बाद भी स्थिति बदली नहीं है।
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साल पुरुषों की नसबंदी महिलाओं की नलबंदी
2016 से 2017 84 1918
2017 से 2018 68 2003
2018 से 2019 65 1915
2019 से 2020 203 1056
2020 से 2021 18 1331
परिवार नियोजन के तरीके टारगेट अचीवमेंट
पुरुष नसबंदी 200 18
महिला नलबंदी 2600 1331
अंतरा इंजेक्शन 480 2045
हमारा परिवार नियोजन गोली 1200 7128
पीपीआईयूसीडी 7250 7956
आईसीयूडी 7250 4634
गर्भ निरोधक गोली 27000 35165
पुरुष नसबंदी करवाने पर 2000 रुपये प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है। विशेष शिविर के दौरान नसबंदी करवाने पर उपहार दिया जाता है। पुरुष या महिला की नसबंदी फेल होने पर 30 हजार रुपये मुआवजे की व्यवस्था है। ऑपरेशन के दौरान मौत होने पर 2 लाख रुपये देने का भी प्रावधान है।
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पति को अपनी पत्नी का ही ऑपरेशन कराने में ज्यादा विश्वास है। ग्राफ बढ़ाने के लिए हर माह पुरुष नसबंदी के लिए विभाग द्वारा जागरूक भी किया जाता है। साथ ही प्रोत्साहन राशि भी अधिक देते हैं। एक छोटे से चीरे वाली नो स्कैलपेल वेसेक्टोमी के लिए भी पुरुष तैयार नहीं होते। ये मानसिकता का मुद्दा है।
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नोडल अधिकारी डॉ. अमित ने बताया कि पुरुष नसबंदी में पिछड़ने का प्रमुख कारण कमजोरी आने, वैवाहिक जीवन प्रभावित होने जैसे मिथक और फैली भ्रांतियां हैं। स्वास्थ्य विभाग अपनी ओर से हर महीने पुरुषों और महिलाओं को परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत जागरूक कर रहा है। पुरुष नसबंदी ज्यादा सुरक्षित होने के साथ ही किसी तरह का साइड इफैक्ट नहीं होता। एनएसवी जैसी तकनीक से किसी तरह का चीरा या टांका भी नहीं लगता। जबकि महिलाओं को बड़े दर्द से गुजरना पड़ता है।
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