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दुर्घटना के पहले घंटे में मिले मदद तो बच सकती है जिंदगी
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
Updated Thu, 08 Oct 2015 11:06 PM IST
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एसडीपीजी कॉलेज में वीरवार को छात्र-छात्राओं को अचानक होने वाली दुर्घटनाओं एवं परिस्थितियों से निपटने संबंधी प्राथमिक सहायता (फर्स्ट एड) के उपायों के बारे में बताया।
एसडीपीजी कॉलेज में वीरवार को एक दिवसीय फर्स्ट एड सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में रेडक्रॉस सोसायटी में फर्स्ट एड लेक्चरर रोहिनी ने छात्र-छात्राओं दो भागों में विभाजित करके उन्हें फर्स्ट एड के बारे में जानकारी दी। इस दौरान कॉलेज के प्रधान दिनेश गोयल और प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने वक्ता का स्वागत किया। सेमिनार में विज्ञान, कला, वाणिज्य संकाय के करीब दौ सो छात्रों ने भाग लिया।
फर्स्ट एड के नियमों के बारे में बताया
कार्यक्रम के दौरान वक्ता रोहिनी ने छात्रों को प्राथमिक सहायता के सुनहरे नियमों के बारे में बताया। उन्होंने डीआरएबीसी के बारे में बच्चों को बताया। उन्होंने कहा कि डी का अर्थ डेंजर से है। मरीज को तुरंत खतरे से बाहर करना चाहिए। आर का मतलब रिस्पॉन्स हैं। मरीज को तुंरत प्रतिक्रिया देने से है। ए का मतलब एयर वे को सुचारू करना है। बी का मतलब ब्रीदिंग या सांस की प्रक्रिया को महसूस करना है। उन्होंने बताया कि गर्म सांस साबित करती हैं कि व्यक्ति में अभी जान बाकी है। दुर्घटना में पहला घंटा गोल्डन आवर माना जा सकता है यदि इस घंटे में मरीज को बचाने के लिए प्रयास किए गए हों। कार्यक्रम के दौरान प्रधान दिनेश गोयल ने कहा कि इस प्रकार के सेमिनारों की वर्तमान की भाग दौड़ की जिंदगी में अधिक आवश्यकता है। कितने ही लोग सड़कों पर सिर्फ इसलिए ही दम तोड़ देते हैं कि हमें आधारभूत प्राथमिक चिकित्सा का ही ज्ञान नहीं है। प्राचार्य अनुपम अरोड़ा ने कहा कि प्राथमिक चिकित्सा का ज्ञान किसी भी व्यक्ति की जान बचाने में सहायक है। ऐसे में इस प्रकार का प्रशिक्षण जरूरी है। इस दौरान प्रो. सरिता दलाल, प्रो, जेएस राणा, डॉ. एसके वर्मा मौजूद रहे।
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एसडीपीजी कॉलेज में वीरवार को एक दिवसीय फर्स्ट एड सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में रेडक्रॉस सोसायटी में फर्स्ट एड लेक्चरर रोहिनी ने छात्र-छात्राओं दो भागों में विभाजित करके उन्हें फर्स्ट एड के बारे में जानकारी दी। इस दौरान कॉलेज के प्रधान दिनेश गोयल और प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने वक्ता का स्वागत किया। सेमिनार में विज्ञान, कला, वाणिज्य संकाय के करीब दौ सो छात्रों ने भाग लिया।
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फर्स्ट एड के नियमों के बारे में बताया
कार्यक्रम के दौरान वक्ता रोहिनी ने छात्रों को प्राथमिक सहायता के सुनहरे नियमों के बारे में बताया। उन्होंने डीआरएबीसी के बारे में बच्चों को बताया। उन्होंने कहा कि डी का अर्थ डेंजर से है। मरीज को तुरंत खतरे से बाहर करना चाहिए। आर का मतलब रिस्पॉन्स हैं। मरीज को तुंरत प्रतिक्रिया देने से है। ए का मतलब एयर वे को सुचारू करना है। बी का मतलब ब्रीदिंग या सांस की प्रक्रिया को महसूस करना है। उन्होंने बताया कि गर्म सांस साबित करती हैं कि व्यक्ति में अभी जान बाकी है। दुर्घटना में पहला घंटा गोल्डन आवर माना जा सकता है यदि इस घंटे में मरीज को बचाने के लिए प्रयास किए गए हों। कार्यक्रम के दौरान प्रधान दिनेश गोयल ने कहा कि इस प्रकार के सेमिनारों की वर्तमान की भाग दौड़ की जिंदगी में अधिक आवश्यकता है। कितने ही लोग सड़कों पर सिर्फ इसलिए ही दम तोड़ देते हैं कि हमें आधारभूत प्राथमिक चिकित्सा का ही ज्ञान नहीं है। प्राचार्य अनुपम अरोड़ा ने कहा कि प्राथमिक चिकित्सा का ज्ञान किसी भी व्यक्ति की जान बचाने में सहायक है। ऐसे में इस प्रकार का प्रशिक्षण जरूरी है। इस दौरान प्रो. सरिता दलाल, प्रो, जेएस राणा, डॉ. एसके वर्मा मौजूद रहे।
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