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Panipat News: गांव राणा माजरा की ओर बढ़ रहा भूमि कटाव, तटबंध टूटने का भय
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सनौली। यमुना से सटे गांव राणा माजरा के किसान भूमि कटाव को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। बाढ़ के बाद गांव राणा माजरा की ओर भूमि कटाव हो रहा है। यहां तटबंध टूटने का भय बना हुआ है। ग्रामीण कटाव के आगे पेड़ काटकर डाल रहे हैं। वहीं दूसरी ओर यमुना तटबंध पर शुक्रवार को गांव राणा माजरा के ग्रामीणों की पंचायत भी हुई। ग्रामीणों ने पंचायत कर बाढ़ में बर्बाद हुई फसल की विशेष गिरदावरी करने की मांग की है।
पंचायत में सरपंच प्रतिनिधि खुर्शीद अहमद, गुल्लू चौहान, नौशाद ठेकेदार, समेदीन, बिंदा, फारुख, आलमदीन, इसराइल, मनवर व सलीम ने बताया कि यमुना में बाढ़ आने से उनकी सारी फसल बर्बाद हो गई लेकिन प्रशासन ने आज तक भी विशेष गिरदावरी नहीं कराई। यूपी की तरफ खनन करने वाले ठेकेदार ने बारिश के मौसम से पहले यमुना की जलधारा को रेत के टीले लगाकर हरियाणा की तरफ कर दिया था। इसलिए यमुना जो कि पहले गांव के तटबंध से करीब एक किमी दूर बहती थी , वह यमुना से भूमि कटाव गांव की ओर बढ़ रहा है। इससे गांव में तटबंध टूटने का भय बना हुआ है। उनकी सरकार से मांग है कि उनके गांव के पास यमुना तटबंध पर पत्थरों की ठोकरें लगाकर उसको मजबूत किया जाए।
वर्जन-
ब्योरा 164 किसानों ने कराया अपलोड
बापौली के नायब तहसीलदार कैलाश चंद्र ने बताया कि बाढ़ से बर्बाद हुई फसलों का किसानों द्वारा क्षतिपूर्ति पोर्टल पर ब्योरा दर्ज करवाने का शुक्रवार की शाम पांच बजे तक का समय था। 164 किसानों ने अभी तक 786 एकड़ बर्बाद हुई फसल का ब्योरा अपलोड किया है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने पोर्टल पर ब्योरा दर्ज करवाया है, उनका एक सप्ताह में निरीक्षण किया जाएगा। उसी के अनुसार किसानों को मुआवजा मिलेगा।
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पंचायत में सरपंच प्रतिनिधि खुर्शीद अहमद, गुल्लू चौहान, नौशाद ठेकेदार, समेदीन, बिंदा, फारुख, आलमदीन, इसराइल, मनवर व सलीम ने बताया कि यमुना में बाढ़ आने से उनकी सारी फसल बर्बाद हो गई लेकिन प्रशासन ने आज तक भी विशेष गिरदावरी नहीं कराई। यूपी की तरफ खनन करने वाले ठेकेदार ने बारिश के मौसम से पहले यमुना की जलधारा को रेत के टीले लगाकर हरियाणा की तरफ कर दिया था। इसलिए यमुना जो कि पहले गांव के तटबंध से करीब एक किमी दूर बहती थी , वह यमुना से भूमि कटाव गांव की ओर बढ़ रहा है। इससे गांव में तटबंध टूटने का भय बना हुआ है। उनकी सरकार से मांग है कि उनके गांव के पास यमुना तटबंध पर पत्थरों की ठोकरें लगाकर उसको मजबूत किया जाए।
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ब्योरा 164 किसानों ने कराया अपलोड
बापौली के नायब तहसीलदार कैलाश चंद्र ने बताया कि बाढ़ से बर्बाद हुई फसलों का किसानों द्वारा क्षतिपूर्ति पोर्टल पर ब्योरा दर्ज करवाने का शुक्रवार की शाम पांच बजे तक का समय था। 164 किसानों ने अभी तक 786 एकड़ बर्बाद हुई फसल का ब्योरा अपलोड किया है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने पोर्टल पर ब्योरा दर्ज करवाया है, उनका एक सप्ताह में निरीक्षण किया जाएगा। उसी के अनुसार किसानों को मुआवजा मिलेगा।
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