{"_id":"5fb67a508ebc3e9bef3801c4","slug":"hsvp-panipat-news-knl51275118","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुलिस ने एचएसवीपी के तत्कालीन पटवारी और उद्यमी पर केस दर्ज कर जांच की शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पुलिस ने एचएसवीपी के तत्कालीन पटवारी और उद्यमी पर केस दर्ज कर जांच की शुरू
विज्ञापन
सेक्टर-28 में दो करोड़ का 800 वर्ग मीटर का प्लॉट 52 लाख रुपये में फर्जी तरीके से अलॉट करने के मामले में सेक्टर 13-17 थाना पुलिस ने तत्कालीन पटवारी कर्मबीर और उद्यमी चंद्रभान के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। अब पुलिस इस केस में जांच कर केस से जुड़े कागजात जुटा रही है। मामले की जांच के बाद दोनों को गिरफ्तार किया जा सकता है। पटवारी ने डिप्टी सुपरिंटेंडेंट का फर्जी लेटर तैयार और फर्जी हस्ताक्षर कर प्लॉट को अलॉट किया था। फरीदाबाद प्रशासक ने मामले की जांच में दोनों को दोषी पाया है।
ऐसे पकड़ा गया था फर्जीवाड़ा
मार्च 2012 को जय गी ओवरसीज प्रा. लि. को सेक्टर-28 का प्लॉट नंबर 13 अलॉट किया गया। इसके बाद हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) पंचकूला मुख्य प्रशासक के ऑफिस के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट के लेटर के आधार पर 30 अक्टूबर को प्लॉट नंबर 13 के साथ लगती 800 वर्ग मीटर जमीन चंद्रभान के नाम अलॉट कर दी गई।
एक दिसंबर 2015 को मुख्य प्रशासक की ओर से लेटर जारी कर बताया गया कि उसके ऑफिस से इस तरह का कोई लेटर जारी नहीं किया गया। मुख्य प्रशासक ने डिप्टी सुपरिंटेंडेंट के नाम से जारी लेटर को फर्जी बताया। साथ ही कहा कि एस्टेट ऑफिसर के कार्यालय में कार्यरत कर्मचारी से मिलीभगत करके यह लेटर जारी करवाया गया। फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद जांच हुई। जांच के आधार पर पटवारी के रूप में काम करने वाले फील्ड चौकीदार कर्मबीर फर्जीवाड़ा में शामिल पाया गया। इसके बाद 9 दिसंबर 2019 रोहतक के प्रशासक ने कर्मबीर को सस्पेंड कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
ऐसे पकड़ा गया था फर्जीवाड़ा
मार्च 2012 को जय गी ओवरसीज प्रा. लि. को सेक्टर-28 का प्लॉट नंबर 13 अलॉट किया गया। इसके बाद हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) पंचकूला मुख्य प्रशासक के ऑफिस के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट के लेटर के आधार पर 30 अक्टूबर को प्लॉट नंबर 13 के साथ लगती 800 वर्ग मीटर जमीन चंद्रभान के नाम अलॉट कर दी गई।
विज्ञापन
एक दिसंबर 2015 को मुख्य प्रशासक की ओर से लेटर जारी कर बताया गया कि उसके ऑफिस से इस तरह का कोई लेटर जारी नहीं किया गया। मुख्य प्रशासक ने डिप्टी सुपरिंटेंडेंट के नाम से जारी लेटर को फर्जी बताया। साथ ही कहा कि एस्टेट ऑफिसर के कार्यालय में कार्यरत कर्मचारी से मिलीभगत करके यह लेटर जारी करवाया गया। फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद जांच हुई। जांच के आधार पर पटवारी के रूप में काम करने वाले फील्ड चौकीदार कर्मबीर फर्जीवाड़ा में शामिल पाया गया। इसके बाद 9 दिसंबर 2019 रोहतक के प्रशासक ने कर्मबीर को सस्पेंड कर दिया।
विज्ञापन