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20 करोड़ में 100 बेड की बनेगी एमसीएच विंग, जच्चा बच्चा को मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं
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सिविल अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग को गिराकर अब 100 बेड की प्रस्तावित मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ (एमसीएच) विंग बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को सिविल अस्पताल के अधिकारी चंडीगढ़ में मीटिंग कर चुके हैं। सरकार की ओर से भी इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल चुकी है। 100 बेड की एमसीएच विंग 20 करोड़ रुपये में बनकर तैयार होगी। एमसीएच विंग बनने से जच्चा बच्चा को बेहतर इलाज मिलेगा।
सिविल अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग को 50 साल से ज्यादा हो चुके है। बिल्डिंग पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। इसमें फिलहाल एनआरसी केंद्र चल रहा है। इन्हें भी जल्द ही शिफ्ट किया जा सकता हैं। पीडब्ल्यूडी इस बिल्डिंग को कई बार कंडम भी घोषित कर चुका है। प्रदेश के जिलों के डिलीवरी रिकॉर्ड के हिसाब से पानीपत जिले में सबसे ज्यादा डिलीवरी होती हैं। साल 2018 में सिविल अस्पताल में 9516 गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी हुई। वहीं जनवरी 2019 में 1 अगस्त तक जून तक 5762 महिलाओं की डिलीवरी कराई गई है। इसलिए सरकार इस प्रोजेक्ट को सबसे पहले जिले में ही पूरा करना चाहती है। नए एमसीएच विंग में गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी के लिए 10 से 15 टेबल का प्रस्ताव रखा गया है, जोकि फिलहाल 6 टेबल हैं। इसके साथ-साथ हिसार, पंचकूला में भी एमसीएच विंग बनाने का कार्य चल रहा है।
एसएनसीयू वार्ड भी होगा
नवजात बच्चों के लिए एसएनसीयू वार्ड भी इसी में बनेगा। अभी हाल ही में इस बिल्डिंग से नई बिल्डिंग में एसएनसीयू वार्ड को शिफ्ट किया गया है। वार्ड में औसतन 20 नवजात एडमिट रहते हैं। वार्ड में 14 वार्मर हैं। जनवरी 2019 से 1 अगस्त तक 120 बच्चों को रेफर किया गया और 6 बच्चों की मौत हुई है। पिछले 2 साल के मुकाबले ये रिकॉर्ड सुधरा है।
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20 करोड़ की मिल चुकी मंजूरी
स्वास्थ्य विभाग और जनप्रतिनिधियों की डिमांड पर सरकार ने फरवरी 2018 में बजट सत्र के दौरान 100 बेड की एमसीएच विंग निर्माण को मंजूरी दी थी। सीएम मनोहर लाल ने गत 30 अक्टूबर 2018 को एमसीएच विंग के लिए 20 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी। पुरानी बिल्डिंग को तोड़कर ही नई बनाई जानी है।
डिप्टी एमएस डॉ. अमित पोरिया ने बताया कि जच्चा बच्चा का स्वास्थ्य प्राथमिकता है। इसको लेकर एमसीएच विंग बनेगी। इसको सरकार की मंजूरी मिल चुकी है। जल्द इस पर कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
डॉ. अमित पोरिया, डिप्टी एमएस सिविल अस्पताल
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सिविल अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग को 50 साल से ज्यादा हो चुके है। बिल्डिंग पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। इसमें फिलहाल एनआरसी केंद्र चल रहा है। इन्हें भी जल्द ही शिफ्ट किया जा सकता हैं। पीडब्ल्यूडी इस बिल्डिंग को कई बार कंडम भी घोषित कर चुका है। प्रदेश के जिलों के डिलीवरी रिकॉर्ड के हिसाब से पानीपत जिले में सबसे ज्यादा डिलीवरी होती हैं। साल 2018 में सिविल अस्पताल में 9516 गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी हुई। वहीं जनवरी 2019 में 1 अगस्त तक जून तक 5762 महिलाओं की डिलीवरी कराई गई है। इसलिए सरकार इस प्रोजेक्ट को सबसे पहले जिले में ही पूरा करना चाहती है। नए एमसीएच विंग में गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी के लिए 10 से 15 टेबल का प्रस्ताव रखा गया है, जोकि फिलहाल 6 टेबल हैं। इसके साथ-साथ हिसार, पंचकूला में भी एमसीएच विंग बनाने का कार्य चल रहा है।
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एसएनसीयू वार्ड भी होगा
नवजात बच्चों के लिए एसएनसीयू वार्ड भी इसी में बनेगा। अभी हाल ही में इस बिल्डिंग से नई बिल्डिंग में एसएनसीयू वार्ड को शिफ्ट किया गया है। वार्ड में औसतन 20 नवजात एडमिट रहते हैं। वार्ड में 14 वार्मर हैं। जनवरी 2019 से 1 अगस्त तक 120 बच्चों को रेफर किया गया और 6 बच्चों की मौत हुई है। पिछले 2 साल के मुकाबले ये रिकॉर्ड सुधरा है।
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20 करोड़ की मिल चुकी मंजूरी
स्वास्थ्य विभाग और जनप्रतिनिधियों की डिमांड पर सरकार ने फरवरी 2018 में बजट सत्र के दौरान 100 बेड की एमसीएच विंग निर्माण को मंजूरी दी थी। सीएम मनोहर लाल ने गत 30 अक्टूबर 2018 को एमसीएच विंग के लिए 20 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी। पुरानी बिल्डिंग को तोड़कर ही नई बनाई जानी है।
डिप्टी एमएस डॉ. अमित पोरिया ने बताया कि जच्चा बच्चा का स्वास्थ्य प्राथमिकता है। इसको लेकर एमसीएच विंग बनेगी। इसको सरकार की मंजूरी मिल चुकी है। जल्द इस पर कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
डॉ. अमित पोरिया, डिप्टी एमएस सिविल अस्पताल