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मूर्ख से दोस्ती शत्रु से भी खतरनाक : उपेंद्र मुनि
Wed, 01 Oct 2025 01:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Wed, 01 Oct 2025 01:25 AM IST
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प्रवचन करते जैन मुनि उपेन्द्रमुनि । संवाद
- फोटो : 1
संवाद न्यूज एजेंसी
समालखा। उपेंद्र मुनि ने कहा कि मूर्ख व्यक्ति को दोस्त नहीं बनाना चाहिए, क्योंकि एक बुद्धिमान शत्रु की तुलना में मूर्ख मित्र से अधिक नुकसान हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मूर्ख मित्र अनजाने में भी आपको बहुत कष्ट पहुंचा सकता है। जैसा कि पंचतंत्र की एक कहानी में एक मूर्ख बंदर ने अपने राजा को मारा था।
उन्होंने ये प्रवचन मंगलवार को जैन स्थानक में कहे। उन्होंने कहा कि मूर्ख और पशु के जीवन में कोई ज्यादा अंतर नहीं होता। मनुष्य मूर्ख होना मनुष्य लक्षण के विपरीत है। कई मनुष्य ऐसे भी मिलते हैं, जिनकी बुद्धि विकसित नहीं हुई या उन्होंने अपने बुद्धि वैभव को बढ़ाने का प्रयास नहीं किया। मूर्ख व्यक्ति न सलाह लेना चाहता है और न देना चाहता है। उनके पास किसी कार्य का कोई विवेक नहीं होता है। मूर्ख व्यक्ति में अपनी आठ विशेषता होती हैं। उसको किसी प्रकार की चिंता नहीं होती, अत्यधिक बोलता है, बड़ों के बीच बोलता है, रात-दिन आलस्य से भरा रहता है। उसके कार्य या अकार्य का विवेक नहीं होता।
मूर्ख पर सम्मान और अपमान का कोई असर नहीं होता। शरीर निरोग रहता और हट्टा-कट्टा मजबूत होता है। ऐसे मूर्ख की पहचान कर उनसे हरसंभव बचे रहना चाहिए। मूर्ख व्यक्ति घमंडी प्रवृत्ति, कटुभाषी और हठाग्रही होता है। वे अपने आपको बुद्धिमान सिद्ध करने के लिए किसी के न पूछने पर भी बोलते रहते हैं। उनको कोई रोकना चाहे तो वे उससे ही लड़ पड़ते हैं।
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समालखा। उपेंद्र मुनि ने कहा कि मूर्ख व्यक्ति को दोस्त नहीं बनाना चाहिए, क्योंकि एक बुद्धिमान शत्रु की तुलना में मूर्ख मित्र से अधिक नुकसान हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मूर्ख मित्र अनजाने में भी आपको बहुत कष्ट पहुंचा सकता है। जैसा कि पंचतंत्र की एक कहानी में एक मूर्ख बंदर ने अपने राजा को मारा था।
उन्होंने ये प्रवचन मंगलवार को जैन स्थानक में कहे। उन्होंने कहा कि मूर्ख और पशु के जीवन में कोई ज्यादा अंतर नहीं होता। मनुष्य मूर्ख होना मनुष्य लक्षण के विपरीत है। कई मनुष्य ऐसे भी मिलते हैं, जिनकी बुद्धि विकसित नहीं हुई या उन्होंने अपने बुद्धि वैभव को बढ़ाने का प्रयास नहीं किया। मूर्ख व्यक्ति न सलाह लेना चाहता है और न देना चाहता है। उनके पास किसी कार्य का कोई विवेक नहीं होता है। मूर्ख व्यक्ति में अपनी आठ विशेषता होती हैं। उसको किसी प्रकार की चिंता नहीं होती, अत्यधिक बोलता है, बड़ों के बीच बोलता है, रात-दिन आलस्य से भरा रहता है। उसके कार्य या अकार्य का विवेक नहीं होता।
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मूर्ख पर सम्मान और अपमान का कोई असर नहीं होता। शरीर निरोग रहता और हट्टा-कट्टा मजबूत होता है। ऐसे मूर्ख की पहचान कर उनसे हरसंभव बचे रहना चाहिए। मूर्ख व्यक्ति घमंडी प्रवृत्ति, कटुभाषी और हठाग्रही होता है। वे अपने आपको बुद्धिमान सिद्ध करने के लिए किसी के न पूछने पर भी बोलते रहते हैं। उनको कोई रोकना चाहे तो वे उससे ही लड़ पड़ते हैं।
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प्रवचन करते जैन मुनि उपेन्द्रमुनि । संवाद- फोटो : 1