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पटाखों ने खराब की हवा, एक्यूआई पहुंचा 413
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पानीपत। दिपावली के बाद एयर क्वालिटी इंडेक्शन पहुंचा 400 के पास,सबुह 11 बजे भी कार चालक नेशनल हाइवे-44 स
- फोटो : Panipat
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पानीपत। पटाखों पर प्रतिबंध का कोई असर नजर नहीं आया। कॉलोनियों व ग्रामीण क्षेत्रों में सरेआम पटाखों की बिक्री ह़ुई। रात भर पटाखों का शोर सुनाई दिया। प्रशासन की मुस्तैदी के दावे सामने नहीं आए। दिवाली पर पटाखे जलाने के बाद शहर की वायु में प्रदूषण का जहर और ज्यादा घुल गया। दिवाली की रात वायु गुणवत्ता सूचकांक 550 और शुक्रवार को 413 दर्ज किया गया। कान फोड़ पटाखों से निकले सल्फर ऑक्साइड व नाइट्रोजन ऑक्साइड गैस से प्रदूषण का स्तर ज्यादा ही बढ़ गया।
इनवायरो कैम लैब निदेशक राजेंद्र कुमार के मुताबिक, इस बार प्रदूषण के स्तर में पांच गुणा ज्यादा बढ़ोतरी हुई है हालांकि पिछले साल के मुकाबले इस बार प्रदूषण स्तर कम था। पर्यावरण में ध्वनि प्रदूषण भी विभिन्न स्थानों पर 90 से 112 डेसीबल मिला जो अत्यधिक स्तर का माना जाता है। इससे सुबह के समय धुंध जैसी समस्या बढ़ सकती है। नवंबर माह में तापमान में गिरावट होती है तो इस समस्या के और गहराने की आशंका है। सामान्यत: हवा में जिस प्रदूषक की मात्रा 100 होती है दिवाली के दिनों में यह 550 तक पहुंच गई।
सल्फर डाइऑक्साइड
सल्फर डाइऑक्साइड (एसओएक्स)इसकी 80 माइक्रोग्राम से अधिक मात्रा स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होती है। वातावरण में इसका कोई स्रोत नहीं होता, इसलिए यह सामान्य तौर पर वाहनों से निकले धुएं के कारण यह 15 से 20 माइक्रोग्राम ही रहता है। दिवाली पर पटाखे जलाने से इस प्रदूषक की मात्रा 60 माइक्रोग्राम तक पहुंच गई।
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नाइट्रोजन ऑक्साइड
नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओएक्स)पर्यावरण मंत्रालय के निर्देशानुसार इसकी मात्रा 80 माइक्रोग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। सामान्यत: यह 20 से 30 माइक्रोग्राम दर्ज किया जाता है। दिवाली पर यह सीमा 80 से 90 माइक्रोग्राम तक पहुंच गई।
पीएम 2.5
पीएम पार्टिकुलेट मैटर 2.5पर्यावरण में यह ऐसे धूल के कण हैं, जो सांस के साथ मानव फेफड़ों में प्रवेश करते हैं। वातावरण में दृश्यता पर भी असर डालते हैं। इसकी सीमा 60 माइक्रोग्राम होती है। सामान्य दिनों में यह 45 से 50 तक होती है जो दिवाली के बाद 130 से 140 दर्ज की गई।
पीएम- 10
पीएम 10 पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार पार्टिकुलेट मैटर 10 की सीमा 100 है। आम दिनों में पीएम 10 की मात्रा 180 से 200 दर्ज की जाती है। इस बार दिवाली पर यह मात्रा 550 तक चली गई।
रात भर होते रहे बमों के धमाके
सामान्यत: 60 से 65 डेसीबल शोर ही सहन हो पाता है। मॉडल टाउन क्षेत्र में रात 9 से 11 बजे के बीच शोर का स्तर 90 से 100 डेसीबल चला गया। 90 डेसीबल से ज्यादा आवाज मानव कानों के लिए बहुत ज्यादा घातक है। फतेहपुरी चौक पर यह 85 से 100 डेसीबल तक रहा।
बढ़ेगी स्मॉग की समस्या
दिवाली पर इस बार औसतन पांच गुणा ज्यादा प्रदूषण बढ़ा है, जो लगभग दो महीने में प्राकृतिक रूप से सामान्य होगा। तापमान कम होने पर नमी के साथ मिलकर धुएं के ये कण स्मॉग बनाते हैं, जिससे दृश्यता पर असर पड़ता है। - राजेंद्र कुमार, पर्यावरणविद, निदेशक इनवायरो कैम लैब,
आंखों में जलन भी रही
दिवाली की रात एक्यूूआई 550 पहुंच गया था। रात भर आसमान में स्मॉग छाई रही। वीरवार दोपहर तक भी सांस लेने में दिक्कत व आंखों में जलन महसूस हुई। डॉक्टरों के अनुसार स्मॉग दमा रोगियों के लिए बड़ा खतरा है। इसलिए मास्क का प्रयोग करें व काम के लिए ही घरों से बाहर निकलें।
पहली बार नहीं आया बर्न केस
इस बार दिवाली पर ये राहत जरूर रही कि कोई बर्न केस नहीं आया। पहली पहली बार यह हुआ है जब कोई बर्न केस नहीं आया। डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने पहली बार ये देखा है कि सिविल अस्पताल में कोई केस नहीं आया।
एयर क्वालिटी इंडेक्स कितना होना चाहिए?
एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) को 0-50 के बीच बेहतर, 51-100 के बीच संतोषजनक, 101 से 200 के बीच सामान्य, 201 से 300 के बीच खराब, 301 से 400 के बीच बहुत खराब और 401 से 500 के बीच गंभीर माना जाता है।
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इनवायरो कैम लैब निदेशक राजेंद्र कुमार के मुताबिक, इस बार प्रदूषण के स्तर में पांच गुणा ज्यादा बढ़ोतरी हुई है हालांकि पिछले साल के मुकाबले इस बार प्रदूषण स्तर कम था। पर्यावरण में ध्वनि प्रदूषण भी विभिन्न स्थानों पर 90 से 112 डेसीबल मिला जो अत्यधिक स्तर का माना जाता है। इससे सुबह के समय धुंध जैसी समस्या बढ़ सकती है। नवंबर माह में तापमान में गिरावट होती है तो इस समस्या के और गहराने की आशंका है। सामान्यत: हवा में जिस प्रदूषक की मात्रा 100 होती है दिवाली के दिनों में यह 550 तक पहुंच गई।
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सल्फर डाइऑक्साइड
सल्फर डाइऑक्साइड (एसओएक्स)इसकी 80 माइक्रोग्राम से अधिक मात्रा स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होती है। वातावरण में इसका कोई स्रोत नहीं होता, इसलिए यह सामान्य तौर पर वाहनों से निकले धुएं के कारण यह 15 से 20 माइक्रोग्राम ही रहता है। दिवाली पर पटाखे जलाने से इस प्रदूषक की मात्रा 60 माइक्रोग्राम तक पहुंच गई।
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नाइट्रोजन ऑक्साइड
नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओएक्स)पर्यावरण मंत्रालय के निर्देशानुसार इसकी मात्रा 80 माइक्रोग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। सामान्यत: यह 20 से 30 माइक्रोग्राम दर्ज किया जाता है। दिवाली पर यह सीमा 80 से 90 माइक्रोग्राम तक पहुंच गई।
पीएम 2.5
पीएम पार्टिकुलेट मैटर 2.5पर्यावरण में यह ऐसे धूल के कण हैं, जो सांस के साथ मानव फेफड़ों में प्रवेश करते हैं। वातावरण में दृश्यता पर भी असर डालते हैं। इसकी सीमा 60 माइक्रोग्राम होती है। सामान्य दिनों में यह 45 से 50 तक होती है जो दिवाली के बाद 130 से 140 दर्ज की गई।
पीएम- 10
पीएम 10 पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार पार्टिकुलेट मैटर 10 की सीमा 100 है। आम दिनों में पीएम 10 की मात्रा 180 से 200 दर्ज की जाती है। इस बार दिवाली पर यह मात्रा 550 तक चली गई।
रात भर होते रहे बमों के धमाके
सामान्यत: 60 से 65 डेसीबल शोर ही सहन हो पाता है। मॉडल टाउन क्षेत्र में रात 9 से 11 बजे के बीच शोर का स्तर 90 से 100 डेसीबल चला गया। 90 डेसीबल से ज्यादा आवाज मानव कानों के लिए बहुत ज्यादा घातक है। फतेहपुरी चौक पर यह 85 से 100 डेसीबल तक रहा।
बढ़ेगी स्मॉग की समस्या
दिवाली पर इस बार औसतन पांच गुणा ज्यादा प्रदूषण बढ़ा है, जो लगभग दो महीने में प्राकृतिक रूप से सामान्य होगा। तापमान कम होने पर नमी के साथ मिलकर धुएं के ये कण स्मॉग बनाते हैं, जिससे दृश्यता पर असर पड़ता है। - राजेंद्र कुमार, पर्यावरणविद, निदेशक इनवायरो कैम लैब,
आंखों में जलन भी रही
दिवाली की रात एक्यूूआई 550 पहुंच गया था। रात भर आसमान में स्मॉग छाई रही। वीरवार दोपहर तक भी सांस लेने में दिक्कत व आंखों में जलन महसूस हुई। डॉक्टरों के अनुसार स्मॉग दमा रोगियों के लिए बड़ा खतरा है। इसलिए मास्क का प्रयोग करें व काम के लिए ही घरों से बाहर निकलें।
पहली बार नहीं आया बर्न केस
इस बार दिवाली पर ये राहत जरूर रही कि कोई बर्न केस नहीं आया। पहली पहली बार यह हुआ है जब कोई बर्न केस नहीं आया। डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने पहली बार ये देखा है कि सिविल अस्पताल में कोई केस नहीं आया।
एयर क्वालिटी इंडेक्स कितना होना चाहिए?
एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) को 0-50 के बीच बेहतर, 51-100 के बीच संतोषजनक, 101 से 200 के बीच सामान्य, 201 से 300 के बीच खराब, 301 से 400 के बीच बहुत खराब और 401 से 500 के बीच गंभीर माना जाता है।

पानीपत। दिपावली के अवसर पर पटाखे जलाते हुए।- फोटो : Panipat